रेलवे के सबसे पुराने स्टीम इंजनों में शुमार 'अकबर' हरियाणा के रेवाड़ी शहर में आज भी मौजूद है. इसे लोको शेड में रखा गया है. अकबर कोई साधारण इंजन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की शान, विरासत और सदियों पुरानी यात्रा की जीती-जागती कहानी है.
1965 का गौरवशाली इंजन
अकबर इंजन को 1965 में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) में बनाया गया था. यह WP क्लास का 4-6-2 पैसिफिक स्टीम लोकोमोटिव है. उस समय यह इंजन देश की प्रतिष्ठित एक्सप्रेस ट्रेनों को 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से खींचता था. मुगल सम्राट अकबर की तरह ही यह इंजन भी शक्ति, भव्यता और दूरदर्शिता का प्रतीक बना. जब देश में बिजली और डीजल इंजनों का दौर शुरू हुआ तो कई पुराने स्टीम इंजन बंद हो गए. लेकिन अकबर को रेवाड़ी हेरिटेज स्टीम शेड (हरियाणा) में संरक्षित किया गया और पूरी तरह से नया रूप दिया गया. साल 2012 में अमृतसर वर्कशॉप में इसकी पूरी मरम्मत की गई. यह पूरी तरह से चलने की स्थिति में है.
कई फिल्मों में भी झलक इस इंजन की झलक
अकबर ने सिर्फ रेलवे की सेवा ही नहीं की, बल्कि बॉलीवुड में भी धूम मचाई. फिल्म भाग मिल्खा भाग, सुल्तान, गदर, गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी कई हिट फिल्मों में अकबर इंजन की झलक देखने को मिली. जब यह इंजन स्क्रीन पर दौड़ता है तो दर्शक तालियां बजाने लगते हैं. दिल्ली कैंट-अलवर स्टीम एक्सप्रेस जैसी हेरिटेज ट्रेनों को खींचने वाले इस इंजन की तेज चाल, धुआं उड़ाती चिमनी, तेज सीटी पुरानी यादें ताजा करने वाली हैं.
नॉर्दन रेलवे ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए याद दिलाया है कि अकबर सिर्फ रेल का इंजन ही नहीं बल्कि भारतीय रेलवे का गौरवशाली इतिहास है. आधुनिक वंदे भारत और तेजस के इस दौर में भी ये पुराना इंजन अपनी धमक से कहता है , मैं सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं बल्कि भारत की यात्रा का जीवंत गवाह हूं.
बता दें कि रेवाड़ी में भारत का इकलौता स्टीम लोको शेड है. यहां अकबर के अलावा आजाद, अंगध जैसे अन्य ऐतिहासिक इंजन भी संरक्षित हैं. भारतीय रेलवे इन इंजनों को सिर्फ यादों के लिए नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से चलाकर नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ रही है.