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प्रचंड गर्मी से बढ़ी बिजली की डिमांड, जून-जुलाई के लिए सरकार का एक्शन प्लान तैयार

देश भर में भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. बिजली मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को बताया कि मई के 265 GW से बढ़कर जुलाई तक यह मांग 283 GW तक पहुंचने का अनुमान है.

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बिजली संकट पर हाईलेवल मीटिंग (Photo: Representative/File)
बिजली संकट पर हाईलेवल मीटिंग (Photo: Representative/File)

भारत में बिजली की खपत में जोरदार उछाल आया है. अप्रैल के अंत में बिजली की मांग 256 GW थी, जो 20 मई तक बढ़कर 265 GW हो गई. जानकारों का मानना है कि जून में यह 271 GW और जुलाई तक 283 GW तक पहुंच सकती है. इस बढ़ती मांग के पीछे की मुख्य वजह भीषण गर्मी और एयर कंडीशनिंग का बढ़ता इस्तेमाल है. बढ़ती मांग के साथ ही ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है, जिससे निपटने के लिए सरकार ने पावर प्लांट्स को अपनी पूरी क्षमता से काम करने के निर्देश दिए हैं.

बिजली पर बनी संसदीय स्थायी समिति की बैठक 'आत्मनिर्भर बिजली भारत' के निर्माण में PSUs की भूमिका की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई थी. हालांकि, चर्चा का केंद्र जल्द ही एक ज्यादा तात्कालिक चिंता की तरफ मुड़ गया- 'भारत की, लंबी और भीषण गर्मियों के दौरान बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी.'

कई सदस्यों ने बिजली मंत्रालय के अधिकारियों से सवाल किया कि क्या सिस्टम 'पीक लोड' (बिजली की सबसे ज़्यादा मांग) को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार है, खासकर तब जब विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से 'लोड शेडिंग' (बिजली कटौती) की खबरें आ रही हैं.

संसदीय स्थायी समिति की बैठक के दौरान बिजली मंत्रालय से गर्मियों की तैयारियों को लेकर कड़े सवाल पूछे गए. कई सांसदों ने अपने इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें कीं. बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने सिद्धार्थनगर में बिजली की अनियमित आपूर्ति का मुद्दा उठाया. उत्तर प्रदेश ने भी अतिरिक्त बिजली की मांग की है. 

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हालांकि, मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ये बिजली कटौती की घटनाएं सिस्टम की कमी नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर की समस्याएं हैं, जिन्हें जल्द ही सुलझाया जा रहा है.

मेंटेनेंस बंद, कोयले का स्टॉक फुल!

बिजली मंत्रालय ने आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब गर्मियों के पीक सीजन के दौरान किसी भी पावर प्लांट में 'मेंटेनेंस शटडाउन' नहीं किया जाएगा. इस कदम से ग्रिड में 15 हजार मेगावाट एक्स्ट्रा बैकअप क्षमता जुड़ेगी. इसके साथ ही, थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले की उपलब्धता 18 दिनों तक सुनिश्चित कर दी गई है, जिससे फ्यूल की किल्लत से प्रोडक्शन न रुके. फ्यूल सप्लाई चेन की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी तरह का व्यवधान पैदा न हो.

गर्मियों के वक्त में बिजली संकट को कम करने के लिए सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी जोर दे रही है. सौर ऊर्जा का इस्तेमाल दिन के वक्त की मांग को पूरा करने के लिए किया जा रहा है. वहीं, जून में पवन ऊर्जा के बेहतर हालात से 20 GW अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद है. शाम और रात के वक्त जब सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती, तब हाइड्रोपावर को रणनीतिक रूप से तैनात किया जाएगा. इसके अलावा, गैस आधारित पावर प्रोडक्शन के लिए नाइजीरिया जैसे देशों से आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.

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मंत्रालय का मिला आश्वासन 

ऊर्जा मंत्रालय ने पैनल को आश्वासन दिया कि गर्मियों के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार कर ली गई है. अधिकारियों ने बताया कि इस मौसम में बिजली की खपत तेजी से बढ़ जाती है, इसलिए बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही कदम उठाए गए हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिजली की बढ़ती मांग से ग्रिड पर दबाव पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन हमारी तैयारियों का मकसद बिजली आपूर्ति में आने वाली रुकावटों को कम से कम करना है.

सूत्रों ने 'आजतक' को बताया कि बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने अपने संसदीय क्षेत्र सिद्धार्थनगर में बार-बार होने वाली 'लोड शेडिंग' (बिजली कटौती) को लेकर चिंता जताई. उन्होंने बताया कि हाल ही में अपने विजिट के दौरान उन्होंने पाया कि बिजली की आपूर्ति काफी अनियमित थी. इसके जवाब में, अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त बिजली की मांग की है और इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बातचीत चल रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि इस तरह की समस्याएं केवल कुछ ही इलाकों तक सीमित हैं.

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