प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि विदेश में शादी न करें, सोना खरीदना कम करें, विदेशी चीजें न खरीदें और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें. ये सुनने में लगता है कि सरकार कहना चाहती है कि खर्च बंद कर दो. लेकिन असल में ऐसा नहीं है. असल में दुनिया में एक बड़ा संकट आ रहा है.
ईरान और अमेरिका के बीच जंग चल रही है. इससे दुनिया का तेल महंगा हो गया है. भारत को दुनिया से 89 फीसदी तेल खरीदना पड़ता है. अगर तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत का सब कुछ महंगा हो जाता है. इसीलिए सरकार लोगों से कह रही है कि स्मार्ट तरीके से खर्च करो. ये घबराहट नहीं है, सावधानी है.
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीयों से कहा है कि वो कुछ चीजें बदलें. जैसे - पहला, विदेश में शादी न करें. शादी में बहुत पैसा खर्च होता है. अगर शादी भारत में करें तो पैसा भारत में ही रहेगा. दूसरा, सोना खरीदना कम करें. भारत अपना सोना बाहर से खरीदता है. सोना खरीदने से विदेशी पैसे की जरूरत पड़ती है.
तीसरा, बाहर से कीमती चीजें न खरीदें. चौथा, बस, मेट्रो या कार पूलिंग करके ऑफिस जाएं. अपनी गाड़ी से न जाएं. पांचवां, जहां से हो सके घर से काम करें.
इसे सरकार क्या कहती है?
सरकार इसे 'आर्थिक देशभक्ति' कहती है, 'बचत' नहीं. मतलब ये कि आपको कम खर्च करना नहीं बल्कि स्मार्ट तरीके से खर्च करना है. देश के लिए सोचकर खर्च करना है.
दुनिया में क्या हो रहा है?
दुनिया में एक बड़ा संकट है. ईरान और अमेरिका के बीच एक जंग चल रही है. इस जंग की वजह से होर्मुज खतरे में है. होर्मुज एक बहुत ही संकरा रास्ता है जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है. अगर ये रास्ता बंद हो जाए तो दुनिया को तेल की कमी हो जाएगी. तेल की कमी से तेल की कीमत आसमान छू जाएगी.
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भारत पर क्या असर पड़ेगा?
भारत इस बात से बेहद चिंतित है. क्यों? पहला, भारत अपना 89 फीसदी तेल दुनिया से खरीदता है. भारत के अपने तेल के कुएं बहुत कम हैं. इसलिए भारत दूसरे देशों से तेल मंगवाता है.
दूसरा, अगर दुनिया में तेल की कमी हो जाए तो तेल की कीमत बहुत बढ़ जाएगी. तीसरा, तेल महंगा हो तो पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाएंगे. सब कुछ महंगा हो जाएगा. आटा, दाल, सब्जियां सब कुछ. चौथा, भारत का रुपया कमजोर हो जाएगा. विदेशी मुद्रा के भंडार खत्म हो जाएंगे.
भारत की आर्थिक स्थिति क्या है?
सरकार कहती है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है. निर्यात रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं. व्यापार का घाटा कम है. लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है.
सरकार क्या कर रही है?
सरकार के अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय, वित्त मंत्रालय सब मीटिंग कर रहे हैं. वो सोच रहे हैं कि इस मुसीबत को कैसे अवसर में बदला जाए.
सरकार खुद भी बचत के उदाहरण दे रही है. मंत्रियों की विदेश यात्रा कम की जा रही है. ऑनलाइन मीटिंगें ज्यादा की जा रही है. मेट्रो का इस्तेमाल प्रोत्साहित किया जा रहा है.
AI का क्या रोल है?
सरकार कह रही है कि अब देश को AI पर ध्यान देना चाहिए. AI से कंपनियों का खर्च कम होगा. काम अधिक होगा. भारतीय कंपनियां विश्व स्तर पर मुकाबला कर सकेंगी.
देश की वास्तविक चिंता क्या है?
असली चिंता ये है कि अगर होर्मुज रास्ता बंद हो जाए या तेल की सप्लाई रुक जाए तो - एक, दुनिया में मंहगाई बढ़ेगी. दूसरी, शिपिंग का खर्च बढ़ेगा. जहाज से सामान मंगवाना महंगा हो जाएगा. तीसरी की स्टॉक मार्केट में गिरावट आएगी. इन सब के अलावा सब देशों को परेशानी होगी. भारत को विशेष परेशानी होगी क्योंकि वो तेल के लिए दूसरों पर निर्भर है.
सरकार कह रही है कि कोई संकट नहीं है फिर क्यों ये सब?
सरकार कहती है कि आपातकाल नहीं है. लेकिन सावधानी जरूरी है. ये पहले से तैयारी है. जैसे घर में आंधीं आने वाली हो तो हम खिड़कियां बंद करते हैं. ये उसी जैसा है.
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खर्च कम नहीं, स्मार्ट खर्च
सरकार कह रही है कि लोगों को कम खर्च नहीं करना चाहिए. लोगों को स्मार्ट खर्च करना चाहिए. अगर शादी करनी है तो भारत में करिए विदेश में नहीं. अगर सोना खरीदना है तो बाद में खरीदें. ये सब करने से भारत के अंदर पैसा रहेगा और विदेशी पैसा नहीं जाएगा.
अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा?
नहीं. सरकार कहती है कि भारत की अर्थव्यवस्था लोगों के खर्च पर निर्भर है. अगर लोग खर्च नहीं करेंगे तो दुकानदारों को नुकसान होगा, मजदूरों को काम नहीं मिलेगा. इसलिए सरकार सिर्फ दिशा बदलना चाहती है खर्च नहीं बंद करना चाहती.