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देश में जनगणना का काम फिर क्यों अटक गया? जानें- कहां फंसा है पेच

अगर कोरोना महामारी नहीं आई होती तो देश में अब तक जनगणना हो चुकी होती. लेकिन कोरोना के कारण जनगणना का काम अटका हुआ है. अब फिर से ये अटक गया है. ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार ने सभी राज्यों को 30 जून तक प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज करने को कहा है. नियमों के मुताबिक, सीमाएं तय होने के तीन महीने बाद ही जनगणना हो सकती है.

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भारत में आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. (फाइल फोटो- Getty Images)
भारत में आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. (फाइल फोटो- Getty Images)

पहले से ही अटक चुका जनगणना का काम अभी और अटकेगा. अधिकारियों ने बताया कि जनगणना का काम 30 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि जनगणना के लिए घरों की लिस्टिंग और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने का काम 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 के बीच होना था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण ये नहीं हो सका.

ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार एंड सेंसस ने सभी राज्यों को 30 जून तक प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज करने को कहा है. नियमों के मुताबिक, सीमाएं तय होने के तीन महीने बाद ही जनगणना हो सकती है.

पर अब क्यों अटकेगा?

रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर ने सभी राज्यों को लिखे पत्र में बताया है कि सभी प्रशासनिक सीमाओं को सील करने की तारीख 30 जून तक बढ़ा दी गई है.

नियमों के तहत, सभी जिलों, उप-जिलों, तहसील, तालुका और पुलिस थानों की प्रशासनिक सीमाएं सील होने के तीन महीने बाद ही जनगणना की जा सकती है.

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अब जब बाउंड्री को फ्रीज करने की तारीख 30 जून तक बढ़ा दी गई है तो ऐसे में जनगणना का काम भी 30 सितंबर तक टल गया है.

क्या होगा इसमें?

दरअसल, जगनणना के लिए प्रशासनिक सीमाएं तय होना जरूरी है. पत्र में लिखा है कि 1 जुलाई 2023 से सीमाएं तय मानी जाएंगी. 

ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार ने पत्र में लिखा है कि राज्य सरकारें 30 जून 2023 तक अपनी प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव कर सकतीं हैं और नोटिफिकेशन के माध्यम से इसकी जानकारी दे सकतीं हैं.

कोरोना महामारी के आने से पहले प्रशासनिक सीमाओं को 1 जनवरी 2020 से 31 मार्च 2021 के बीच फ्रीज करना था.

इसके बाद सीमाओं को फ्रीज करने की तारीख पहले 31 दिसंबर 2021 और फिर 31 दिसंबर 2022 तक बढ़ाई गई थी.

वरना हो जाती जनगणना

अगर कोरोना महामारी नहीं आई होती तो अब तक जनगणना हो चुकी होती. 1881 से हर 10 साल में जनगणना की जाती है. 

जनगणना का काम 1 मार्च 2021 तक हो जाना था. वहीं, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 अक्टूबर 2020 तक जनगणना होनी थी.

जनगणना का काम अभी भी होल्ड पर ही है क्योंकि सरकार की ओर से नया शेड्यूल जारी नहीं किया गया है.

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अभी कितनी आबादी है देश की?

भारत में पहली बार 1881 में जनगणना हुई थी. उस समय भारत की आबादी 25.38 करोड़ थी. तब से ही हर 10 साल पर जनगणना होती है.

आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत की आबादी 121 करोड़ से ज्यादा थी. 2001 से 2011 के बीच भारत की आबादी 18 फीसदी के आसपास बढ़ गई थी.

इसमें 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं. भारत की कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं. इनके बाद ईसाई 2.78 करोड़ (2.3%) और सिख 2.08 करोड़ (1.7%) हैं. बाकी बौद्ध और जैन धर्म को मानने वालों की आबादी 1% से भी कम है.  

अभी भारत की आबादी 141 करोड़ होने का अनुमान है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इस साल भारत की आबादी चीन से ज्यादा हो जाएगी. 2050 तक चीन की आबादी घटकर 131 करोड़ तो भारत की आबादी बढ़कर 166 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी.

 

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