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गुजरात दंगा: PM मोदी को क्लीन चिट के खिलाफ जाकिया जाफरी की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने ये फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने सात महीने पहले 9 दिसंबर 2021 को जाकिया जाफरी की याचिका पर मैराथन सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था.

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फरवरी 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे. (फाइल फोटो) फरवरी 2002 में गुजरात में दंगे हुए थे. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुजरात दंगों के दौरान जाकिया के पति की हुई थी हत्या
  • जाकिया ने एसआईटी रिपोर्ट को दी थी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है. ये याचिका जाकिया जाफरी की ओर से दाखिल की गई थी. कोर्ट ने SIT की जांच रिपोर्ट को सही माना है. जाकिया जाफरी पूर्व सांसद अहसान जाफरी की पत्नी हैं. 

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने ये फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने सात महीने पहले 9 दिसंबर 2021 को जाकिया जाफरी की याचिका पर मैराथन सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. गुजरात दंगों की जांच के लिए बनी एसआईटी ने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे अब के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी.

तीस्ता सीतलवाड़ का कोर्ट ने किया जिक्र

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के पिछले रिकॉर्ड और भूमिका का जिक्र भी एसआईटी की रिपोर्ट और गुजरात सरकार की दलीलों के हवाले से किया है. कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि तीस्ता सीतलवाड़ के बारे में और छानबीन की जरूरत है. क्योंकि तीस्ता इस मामले में जकिया जाफरी की भावनाओं का इस्तेमाल गोपनीय ढंग से अपने स्वार्थ के लिए कर रही थी. वो इसीलिए इस मामले में लगातार घुसी रही. क्योंकि जकिया अहसान जाफरी इस पूरे मामले में असली पीड़ित हैं. लेकिन तीस्ता अपने हिसाब से उनको इस मुकदमे में मदद करने के बहाने उनको नियंत्रित कर रही थी. जबकि वो अपने हित साधने की गरज से बदले की भावना रखते हुए इस मुकदमे में न केवल दिलचस्पी ले रही थी बल्कि अपने मनमुताबिक चीजें भी गढ़ रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा कि मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल होने के दावेदारों के बयान भी मामले में राजनीतिक रूप से सनसनी पैदा करने वाले थे. दरअसल संजीव भट्ट, हिरेन पंड्या और आरबी श्रीकुमार ने SIT के सामने बयान दिया था जो आगे चलकर निराधार साबित हुआ था. जांच में पता चला कि ये लोग तो लॉ एंड ऑर्डर की समीक्षा के लिए बुलाई गई उस मीटिंग में थे ही नहीं. इस झूठे दावे से इस धारणा को बल मिलता है कि ऊंचे स्तर पर साजिश रची गई और सुनियोजित ढंग से उस पर अमल किया गया. एसआईटी ने जब तथ्यों के आधार पर जांच की तो साजिश का ये ताना-बाना ताश के पत्तों के महल की तरह भरभरा कर गिर पड़ा.

एहसान जाफरी की दंगों में हुई थी मौत

दरअसल, 2002 में गुजरात दंगों के दौरान जाकिया जाफरी के पति तब कांग्रेस से विधायक रहे एहसान जाफरी को दंगाई भीड़ ने मार डाला था. गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी हत्याकांड में एहसान जाफरी भी मारे गए थे. एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने SIT की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी.

एसआईटी की रिपोर्ट में प्रदेश के उच्च पदों पर रहे लोगों को क्लीन चिट दी गई थी. एसआईटी ने राज्य के उच्च पदाधिकारियों की ओर से गोधरा ट्रेन अग्निकांड और उसके बाद हुए दंगे भड़काने में किसी भी साजिश को नकार दिया था. साल 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने SIT की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ जाकिया की शिकायत खारिज कर दी थी. 

रविशंकर प्रसाद ने क्या कहा?

एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका गुजरात हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी अब इसे खारिज कर दिया है. 

इस फैसले के बाद बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. जोर देकर कहा गया है कि एक फर्जी मामले के जरिए पीएम मोदी को बदनाम करने की कोशिश की गई. उनके पीछे लेफ्ट की गैंग को लगा दिया गया.

 

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