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राजकोट के गेम जोन अग्निकांड में एक ही घर के 5 लोगों की मौत, बहू-बेटे को बचाने घुसे पिता-चाचा की भी गई जान

हादसे के समय राजकोट के नाना मावा में स्थित गेम जोन में जडेजा परिवार के 5 लोग मौजूद थे. वीरेंद्र सिंह जडेजा (42) की बेटी देविकाबा जडेजा बताती हैं कि हादसे के वक्त पापा उसके भाई और तीन रिश्तेदारों के साथ गेमिंग जोन में मौजूद थे. जैसे ही उन्हें हादसे का पता चला उन्होंने भाई और रिश्तेदारों को रेस्क्यू करने के लिए दौड़ लगा दी.

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राजकोट अग्निकांड में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है. (File Photo)
राजकोट अग्निकांड में अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है. (File Photo)

राजकोट के जिस गेमिंग जोन अग्निकांड ने 28 लोगों की जान ले ली, उसने कई परिवारों को गहरा दुख पहुंचाया है. कई परिवार ऐसे भी हैं, जिन्होंने इस हादसे में अपने 4 से 5 रिश्तेदारों को तक खोया है. ऐसा ही एक परिवार राजकोट का जडेजा परिवार भी है, जिसने इस हादसे में अपने परिवार के 5 सदस्यों को खो दिया है.

हादसे के समय राजकोट के नाना मावा में स्थित गेम जोन में जडेजा परिवार के 5 लोग मौजूद थे. वीरेंद्र सिंह जडेजा (42) की बेटी देविकाबा जडेजा बताती हैं कि हादसे के वक्त पापा उसके भाई और तीन रिश्तेदारों के साथ गेमिंग जोन में मौजूद थे. जैसे ही उन्हें हादसे का पता चला उन्होंने भाई और रिश्तेदारों को रेस्क्यू करने के लिए दौड़ लगा दी. लेकिन अफसोस उनमें से कोई भी जिंदा नहीं बच सका. हालांकि, फिलहाल सभी मृतकों के सैंपल गांधीनगर की फोरेंसिक लैब में भेजे गए हैं, ताकी लाशों की पुष्टि हो सके.

ट्रैम्पोलिन गेम खेलने गए थे बच्चे

हादसे में अपने पिता और भाई को खोने वाली देविकाबा ने कहा,'हमारे परिवार के जिन पांच सदस्यों की मौत हुई है, उनमें से तीन 10-15 साल की उम्र के बच्चे हैं. 25 मई की भयावहता को याद करते हुए देविकाबा ने कहा,'मेरे माता-पिता, भाई और मेरे मामा का परिवार गेम जोन में गया था. हम लोग रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे. मेरे दो भाई और बहन ट्रैम्पोलिन गेम खेलने के लिए ऊपरी मंजिल पर गए थे.'

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नहीं थी आग बुझाने की व्यवस्था

देविकाबा ने आगे बताया,'जब आग लगी तो हम रेस्टोरेंट में बैठे थे. लेकिन हादसे के तुरंत बाद मेरे पिता और चाचा दौड़कर भाई-बहन को बचाने के लिए तीसरे फ्लोर पर ट्रैम्पोलिन के पास पहुंचे. वहं, कुछ धमाके हुए और कोई भी नहीं बच सका.' उसने दावा किया कि हादसे वाली जगह पर आग बुझाने का कोई उपकरण नहीं था. वहां फायर अलार्म भी नहीं सुना गया. यही एक बड़ा कारण है कि कोई भी सुरक्षित रूप से बाहर नहीं निकल सका.

दो महीने पहले ही हुई थी शादी

जडेजा परिवार के अलावा अग्निकांड में जान गंवाने वालों में नवविवाहित जोड़े विवेक (26) और खुशाली दुसारा (24) का नाम भी शामिल है. उनके साथ हादसे के वक्त उनकी भाभी टीशा भी थीं. हादसे की खबर मिलने के बाद गिर सोमनाथ जिले में उनके परिवार को रात भर नींद नहीं आई, क्योंकि वे दंपति से फोन पर संपर्क नहीं कर सके. विवेक और खुशाली की दो महीने पहले ही शादी हुई थी.

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