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ईंधन संकट के बीच देश में LPG का प्रोडक्शन 10% बढ़ा, उद्योगों की गैस सप्लाई में सरकार ने की कटौती

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलएनजी आपूर्ति प्रभावित होने के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू गैस आवंटन में बदलाव किया है. नई व्यवस्था के तहत एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है. सरकार के मुताबिक सभी रिफाइनरियां 100% क्षमता पर काम कर रही हैं और घरेलू जरूरतों के लिए एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड गैस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है.

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केंद्र सरकार ने ईंधन संकट के बीच रिफाइनरियों को एलपीजी का प्रोडक्शन 10% बढ़ाने का निर्देश दिया. (Photo: PTI)
केंद्र सरकार ने ईंधन संकट के बीच रिफाइनरियों को एलपीजी का प्रोडक्शन 10% बढ़ाने का निर्देश दिया. (Photo: PTI)

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलएनजी आपूर्ति में आई बाधा के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू गैस आवंटन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक अब एलपीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों को भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है. ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस आपूर्ति में आ रहे संकट के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संसद में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अहम बठैक कर हालात का जायजा लिया.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तेल रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत बढ़ाया गया है और सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थिति पर नियंत्रण के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू किया गया है, न कि आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (Essential Services Maintenance Act). सरकार का कहना है कि भारत की स्थिति कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर है और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ लगातार संपर्क में रहा जा रहा है.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'भारत लगातार विभिन्न स्रोतों और मार्गों से ऊर्जा का आयात कर रहा है. हमने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100% आपूर्ति हो और युद्ध की स्थिति के बावजूद अन्य उद्योगों को उनकी 70-80% आपूर्ति मिलती रहे. हम अपने घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई कमी नहीं है और घबराने की कोई वजह नहीं है.'

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दूसरे उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती

अधिकारियों के अनुसार फिलहाल एलपीजी का कोई संकट नहीं है और घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. नई व्यवस्था के तहत अब घरेलू प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सबसे पहले एलपीजी, सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस क्षेत्र को दी जाएगी. इन क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी. इसके बाद फर्टिलाइजर इंडस्ट्री को उसकी जरूरत का करीब 70 प्रतिशत गैस आपूर्ति दी जाएगी, जबकि चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत मांग का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी.

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GAIL करेगी गैस सप्लाई का मैनेजमेंट

सरकार ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही एलपीजी संकट की अफवाहों पर लोग भरोसा न करें. कुछ संगठनों द्वारा संकट की बात उठाए जाने के बावजूद सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरत के अनुसार कदम उठा रही है. अधिसूचना के अनुसार देश की प्राकृतिक गैस आपूर्ति का प्रबंधन GAIL करेगी, ताकि प्राथमिक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और घरेलू रसोई गैस तथा परिवहन के लिए सीएनजी की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे. बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एलएनजी आयात की स्थिति सबसे बड़ी चिंता बन गई है.

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युद्ध के कारण LNG आयात प्रभावित

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि संकट लंबा खिंचता है तो भारत गैस की आपूर्ति के लिए नॉर्वे और अमेरिका जैसे दूर के देशों से एलएनजी मंगाने के विकल्प पर विचार कर सकता है, हालांकि लंबी दूरी के कारण इसकी लॉजिस्टिक्स जटिल और महंगी हो सकती है. सूत्रों का कहना है कि फिलहाल रूस से मिलने वाली तेल आपूर्ति भारत के कच्चे तेल आयात के लिए अस्थायी राहत दे रही है. हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) क्षेत्र के साथ भारत के लगभग 40-50 अरब डॉलर के निर्यात पर जोखिम बढ़ गया है. विशेष रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, कीमती धातु, रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्र ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.

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भारत के 7 लाख कंटेनर गल्फ में फंसे

इसके अलावा खाद्य पदार्थ, प्रोसेस्ड फूड, टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के निर्यात पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि निर्यात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन जहाजों को वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे शिपमेंट में देरी हो रही है. जीसीसी देशों पर भी दबाव है, लेकिन वे भारत के साथ व्यापारिक मार्ग खुले रखने के लिए इच्छुक हैं. सूत्रों के मुताबिक भारत के करीब 6 से 7 लाख टीईयू (कंटेनर) खाड़ी क्षेत्र के व्यापार मार्गों पर हैं. इनमें से लगभग 3.5 लाख कंटेनर फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में ही फंसे हुए हैं. कुछ जहाज अरब सागर और ओमान के समुद्री क्षेत्र में आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि खाड़ी के अंदर गहराई में मौजूद कंटेनरों को निकालना ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है. 

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