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BJP को फीडबैक, लंबा चला किसान आंदोलन तो खिसक सकता है वोटबैंक

सूत्रों के अनुसार किसान आंदोलन को लेकर जो फीडबैक मिला है, वह बीजेपी के लिए अच्छा नहीं है. पश्चिमी यूपी में जिस तरह से फीडबैक मिल रहा है, उसके मुताबिक, अगर किसान आंदोलन लंबा चलेगा तो 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी का जाट वोट बैंक खिसक सकता है.

नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं किसान (फाइल फोटोः पीटीआई) नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं किसान (फाइल फोटोः पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'सरकार को सुननी चाहिए किसानों की बात'
  • '2022 के यूपी चुनाव में खिसक सकता है जाट वोट बैंक'
  • पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से भी नाराजगी

कई महीने से चल रहे किसान आंदोलन के बाद आ रही जमीनी रिपोर्ट बताती है कि बीजेपी के लिए संकेत अच्छे नहीं हैं. सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि केंद्रीय मंत्री संजीव बलियान ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर कृषि कानूनों के खिलाफ लगभग तीन महीने से चल रहे आंदोलन पर रिपोर्ट दी है कि आंदोलन बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है.  

पिछले हफ्ते जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह ने हरियाणा, पश्चिमी यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश की चालीस जाट बहुल सीटों से आने वाले सांसदों, विधायकों और प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की थी. इस बैठक में तय किया गया था कि सांसद आम जनता के बीच जाकर कृषि कानूनों के बारे में बताएं कि किस तरह से ये कानून किसानों के लिए फायदेमंद हैं, साथ ही ये भी बताएं कि ये आंदोलन नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने की मंशा से विपक्षी दलों की ओर से चलाया जा रहा है.

सूत्रों की मानें तो किसान आंदोलन को लेकर जो फीडबैक मिला है, वह बीजेपी के लिए अच्छा नहीं है. पश्चिमी यूपी में जिस तरह से फीडबैक मिल रहा है, उसके मुताबिक, अगर किसान आंदोलन लंबा चलेगा तो 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी का जाट वोट बैंक खिसक सकता है.

लोगों में बढ़ रही है नाराजगी

जमीनी स्तर के लोगों मानना है कि किसान आंदोलन जल्दी से जल्दी खत्म हो, इसके लिए सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए. हरियाणा में जाटों की नाराजगी की असली वजह हरियाणा का नेतृत्व है और कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन ने ये नाराजगी और बढ़ा दी है. पश्चिमी यूपी में जाटों की नाराजगी इस कारण भी बढ़ी है कि गन्ने पर मिलने वाली सब्सिडी को भी नहीं बढ़ाया गया है. इसके साथ-साथ गन्ना किसानों के बकाया पैसों का भुगतान भी नहीं किया गया है.

खबरों के मुताबिक, पार्टी को सुझाव मिले हैं कि किसान आंदोलन के कारण जाटों के साथ अलग-अलग जातियों में नाराजगी बढ़ सकती है. पश्चिमी यूपी की 36 जातियों की खाप पंचायतों का मुख्यालय मुजफ्फरनगर में हैं. इन खाप पंचायतों से बैक चैनल बातचीत करके आम लोगों की नाराजगी को दूर किया जा सकता है.

एकजुट हो सकते हैं जाट-मुस्लिम

आंदोलन लंबा चला तो जाट और मुस्लिम वोट बैंक एकजुट होने की सम्भावनाएं बढ़ सकती हैं. पश्चिमी यूपी में ही नहीं, बल्कि जिन-जिन प्रदेशों में भी जाट हैं, वे अन्य जातियों को भी प्रभावित करने में सक्षम हैं. पार्टी को जमीन पर लोगों समझाना पड़ेगा कि तीनों कृषि कानून किसान के लिए फायदे का सौदा हैं, इसका बड़े स्तर पर प्रचार करना होगा. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से किसानों समेत सभी वर्गों में सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है.

किसान आंदोलन को लेकर पश्चिमी यूपी में जमीनी हालात क्या हैं, इसकी रिपोर्ट भले ही केंद्रीय नेतृत्व को मिल गई हो, लेकिन बीजेपी को ये भी पता है कि 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से जाट वोट बैंक बीजेपी के पक्ष में वोट करता आया है. चाहे 2014 का लोकसभा चुनाव हो या 2017 का विधानसभा चुनाव या फिर 2019 का लोकसभा चुनाव, जाट आरक्षण को लेकर नाराजगी के बावजूद जाटों ने बीजेपी को वोट किया था. 

 

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