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सिक्किम आपदा को लेकर एक्सपर्ट्स ने पहले दी थी चेतावनी, लापरवाही से ऐसे बढ़ता गया खतरा

सिक्किम में हिमनद लोनक झील पर मंडरा रहे खतरे को लेकर कई बार चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन हर बार इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. इसका नतीजा 4 अक्टूबर को भयावह रूप में सामने आया. प्राकृतिक आपदा में अबतक 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 102 लापता हैं.

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सिक्किम की प्राकृतिक आपदा से 22 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं (फोटो- PTI)
सिक्किम की प्राकृतिक आपदा से 22 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं (फोटो- PTI)

सिक्किम इन दिनों प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है. इस त्रासदी में करीब 17 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 102 लोग लापता हो गए हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो ये आपदा बिना चेतावनी के नहीं आई. इसे लेकर कई बार सरकारी एजेंसियों और शोधकर्ताओं ने सिक्किम में घातक हिमनद झील के आउटबर्स्ट होने से बाढ़ की आशंकाओं के बारे में अलर्ट किया था.

उत्तरी सिक्किम में ल्होनक झील पर आपदा को लेकर 2 साल पहले यानी 2021 में अलर्ट जारी किया गया था, लेकिन सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया गया. इसका खामियाजा लोगों ने 4 अक्टूबर को भुगता. बाढ़ के चलते सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया. झील के ऊपर बादल फटने से तीस्ता नदी बेसिन में अचानक बाढ़ आ गई. इस आपदा से 22 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. 4 अक्टूबर को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण झील में जल स्तर तेजी से बढ़ गया. इससे मंगन, गंगटोक, पाकयोंग और नामची जिलों में भारी नुकसान हुआ है.

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के हालात तब पैदा होते हैं, जब अत्यधिक जल संचय या भूकंप जैसे ट्रिगर के कारण पिघलती हुई ग्लेशियर से बनी झीलें फट जाती हैं, जिससे नीचे की ओर विनाशकारी बाढ़ आ जाती है. 

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स्टडी के अनुसार सिक्किम के सुदूर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित साउथ ल्होनक झील उन खतरनाक 14 झीलों में शामिल है जहां ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की आशंका बहुत ज्यादा रहती है. यह झील समुद्र तल से 5,200 मीटर (17,100 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है और लोनाक ग्लेशियर के पिघलने के कारण बनी है. ग्लेशियरों के पिघलने के कारण झील का आकार तेजी से बढ़ रहा है. सिक्किम की हिमनद झील पर लगे रेड फ्लैग को नजरअंदाज किया गया था.

नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 2012-2013 में की गई एक स्टडी में झील से जुड़े खतरों के बारे में बताया गया था. इसमें 42 प्रतिशत तक खतरा बढ़ने का अनुमान लगाया गया है. 

2016 में लद्दाख के स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल आंदोलन के सोनम वांगचुक के नेतृत्व में एक अभियान चलाया गया था. इस दौरान भी GLOF की आशंका के बारे में चेतावनी दी थी. GLOF जैसी घटनाओं को रोकने के लिए और ग्लेशियल झील से पानी निकालने के लिए हाई डेंसिटी वाले पॉलीथीन पाइप लगाए गए थे. एल्सेवियर जर्नल में प्रकाशित 2021 की एक स्टडी में साउथ लोनाक झील को अत्यंत खतरनाक माना गया है.

ग्लेशियर 1962 से 2008 तक 46 वर्षों में लगभग 2 किमी तक पिघलकर पीछे खिसक गया था, जबकि 2008 से 2019 तक 400 मीटर तक सिमट गया है. इससे झील के खतरे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. क्योंकि निचली घाटी में भारी आबादी रहती है. 2001 में सिक्किम मानव विकास रिपोर्ट ने भी सिक्किम में GLOF से 'गंभीर खतरे' की चेतावनी दी थी.

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