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सबरीमाला मंदिर का सोना ‘तांबा’ बताकर बाहर निकाला गया...! ED की 21 ठिकानों पर रेड

जांच में पता चला कि 2019 से 2025 के बीच सोने को तांबे की प्लेट बताकर रिकॉर्ड में छिपाया गया और अवैध रूप से बाहर ले जाया गया. ED ने अपराध की आय का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को समझने के लिए डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जब्त किए हैं. मामले में अन्य वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच चल रही है.

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The investigation should proceed fearlessly. Honest officials can be included in the SIT team leader.
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सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी की कोच्चि जोनल ऑफिस ने शुक्रवार को केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 21 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की.

ये कार्रवाई प्र‍िवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्र‍िंंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है और इसका संबंध सबरीमाला मंदिर की संपत्तियों, खासकर सोने से जड़े पवित्र आभूषणों की कथित हेराफेरी से बताया जा रहा है.

ईडी की जांच के मुताबिक, ये मामला केरल क्राइम ब्रांच की ओर से दर्ज कई FIRs से सामने आया है, जिनमें त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के कुछ अधिकारियों, निजी व्यक्तियों, बिचौलियों और ज्वैलर्स की कथित मिलीभगत की बात सामने आई है. कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद 9 जनवरी 2026 को इस मामले में ECIR दर्ज की गई थी.

प्रारंभिक जांच में ईडी को संकेत मिले हैं कि 2019 से 2025 के बीच मंदिर के सोने से मढ़े पवित्र प्रतीकों को आधिकारिक रिकॉर्ड में जानबूझकर ‘तांबे की प्लेट’ बताकर दर्ज किया गया और फिर अवैध रूप से मंदिर परिसर से बाहर ले जाया गया.

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ईडी का आरोप है कि इस सोने को चेन्नई और कर्नाटक की निजी इकाइयों में रासायनिक प्रक्रिया (chemical processing) के ज़रिये निकाला गया, जिससे अपराध की आय (proceeds of crime) पैदा हुई. इस रकम को कथित तौर पर छिपाया गया, इधर-उधर ट्रांसफर किया गया और वैध रूप देने की कोशिश की गई.

छापेमारी के दौरान प्रवर्तन न‍िदेशालय यानी ईडी की टीमों ने अपराध की आय का पता लगाने, लाभार्थियों की पहचान करने, आपत्तिजनक दस्तावेज़ और डिजिटल सबूत जब्त करने के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क को समझने पर फोकस किया है.

जांच एजेंसी का कहना है कि इस दौरान सबरीमाला मंदिर से जुड़े अन्य वित्तीय अनियमितताओं के संकेत भी मिले हैं, जिनमें चढ़ावे और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े फंड की कथित हेराफेरी शामिल है. इन सभी पहलुओं की भी PMLA के तहत अलग से जांच की जा रही है.

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