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तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर होंगी द्रौपदी मुर्मू, जानें क्या होती हैं राष्ट्रपति की शक्तियां

द्रौपदी मुर्मू ने आज 15वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले लीं. वो देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं. द्रौपदी मुर्मू देश की प्रथम नागरिक हैं और उनके पास इतनी शक्तियां हैं कि वो कुछ भी कर सकतीं हैं. अब मुर्मू ही तीनों सेनाओं की सुप्रीम कमांडर होंगी. मुर्मू का कार्यकाल 24 जुलाई 2027 तक होगा. अगर इससे पहले उन्हें पद से हटाना है, तो सदन में महाभियोग प्रस्ताव के जरिये ही हटाया जा सकता है.

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द्रौपदी मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं. (फाइल फोटो-PTI) द्रौपदी मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं राष्ट्रपति
  • प्रधानमंत्री की नियुक्ति भी राष्ट्रपति ही करते हैं
  • देश में इमरजेंसी की घोषणा भी राष्ट्रपति का काम

द्रौपदी मुर्मू देश की नई राष्ट्रपति बन गईं हैं. उन्होंने सोमवार को राष्ट्रपति पद की शपथ ली. राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को 64 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे. जबकि, विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 36% से भी कम वोट मिले. द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं. 

संविधान में राष्ट्रपति को इतनी शक्तियां मिली हैं कि ऐसा कोई काम नहीं है, जिसे वो न कर सकते हों. राष्ट्रपति का प्रमुख दायित्व प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना और संविधान का संरक्षण करना होता है.

संविधान का अनुच्छेद 53, राष्ट्रपति को तीनों सेनाओं का सुप्रीम कमांडर बनाता है. राष्ट्रपति ही तीनों सेनाओं के प्रमुखों की नियुक्ति करते हैं. किसी दूसरे देश के साथ युद्ध होता है, तो उसकी घोषणा राष्ट्रपति करते हैं. साथ ही युद्ध के दौरान शांति की घोषणा का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास ही है. 

राष्ट्रपति अपने सारे फैसले मंत्रिपरिषद (जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं) की सलाह पर लेते हैं. राष्ट्रपति चाहें तो मंत्रिपरिषद की सलाह को पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं. लेकिन वही सलाह अगर दोबारा मिलती है, तो राष्ट्रपति उसे मानने के लिए बाध्य हैं. 

राष्ट्रपति के पास कौन-कौन सी शक्तियां होती हैं?

- राष्ट्रपति के पास इतनी शक्तियां होती हैं कि वो देश में कुछ भी कर सकते हैं. अनुच्छेद 72 के तहत, राष्ट्रपति किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को माफ, निलंबित या कम कर सकते हैं. फांसी की सजा पाए दोषी पर भी फैसला ले सकते हैं.

- भारत के चीफ जस्टिस, राज्य के हाईकोर्ट के जजों, राज्यपालों, चुनाव आयुक्तों और राजदूतों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करते हैं. 

- अनुच्छेद 352 के तहत, राष्ट्रपति युद्ध या बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में देश में इमरजेंसी की घोषणा कर सकते हैं.

- अगर किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र फेल हो गया है, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर वहां राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं.

- अनुच्छेद 360 के तहत भारत या किसी राज्य या किसी क्षेत्र में वित्तीय संकट की स्थिति में राष्ट्रपति वहां वित्तीय आपात की घोषणा कर सकते हैं.

- अनुच्छेद 75 के तहत, प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति ही करते हैं. सभी अंतरराष्ट्रीय समझौते और संधियां राष्ट्रपति के नाम पर ही होतीं हैं. 

- राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही कोई बिल कानून बनता है. राष्ट्रपति चाहें तो उस बिल को कुछ समय के लिए रोक सकते हैं या पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं. अगर संसद से दूसरी बार भी बिल पास हो जाता है, तो राष्ट्रपति को हस्ताक्षर करना पड़ता है.

राष्ट्रपति को कैसे हटाया जा सकता है?

- द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल 24 जुलाई 2027 को खत्म होगा. वो उसके बाद 2027 के चुनाव में फिर से खड़ी हो सकतीं हैं. हालांकि, अब तक सिर्फ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ही ऐसे हैं जो दो बार राष्ट्रपति रहे हैं.

- द्रौपदी मुर्मू को अगर 2027 से पहले हटाना है तो सिर्फ महाभियोग के जरिये ही हटाया जा सकता है. हालांकि, आजतक किसी भी राष्ट्रपति को कार्यकाल से पहले महाभियोग के जरिये नहीं हटाया गया है.

- महाभियोग को संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है. लेकिन, लोकसभा में इसे लाने के लिए कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी है.

- महाभियोग का प्रस्ताव पेश करने से 14 दिन पहले बताना जरूरी होता है. सदन में वोटिंग होती है. अगर एक सदन में ये दो-तिहाई समर्थन से पास हो जाता है, तो दूसरे सदन में भेजा जाता है. अगर दूसरे सदन में भी दो-तिहाई बहुमत से पास हो जाता है, तो राष्ट्रपति को पद से हटा हुआ माना जाता है.

 

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