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डोज की वास्तविकता: 23 में से 21 राज्यों में अप्रैल के मुकाबले मई में वैक्सीनेशन धीमा, दिल्ली-असम में तेज

आजतक/इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) द्वारा निकाले गए आंकड़ों के अनुसार मई में 23 प्रमुख राज्यों में से 21 में टीकाकरण अभियान धीमा हो गया. और यह तब है जब देशभर में बड़ी संख्या में लोग टीकाकरण के लिए आकर्षित हुए.

देश में टीकाकरण अभियान मई महीने में भी जोर नहीं पकड़ सका (सांकेतिक-पीटीआई) देश में टीकाकरण अभियान मई महीने में भी जोर नहीं पकड़ सका (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टीकाकरण अभियान में तेलंगाना में 71 फीसदी से ज्यादा गिरावट
  • केरल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में अभियान में गिरावट देखी गई
  • राजधानी दिल्ली और असम में रोजाना के टीकाकरण में वृद्धि दर्ज

कोरोना संकट और दूसरी लहर के बीच उम्मीद थी कि अप्रैल के बाद भारत में कोविड-19 टीकाकरण की गति मई महीने में तेज गति पकड़ेगी. हालांकि ऐसा नहीं हो सका. आंकड़े भी टीकाकरण अभियान में निराशाजनक गिरावट को दर्शाते हैं.

अप्रैल में रोजाना दी जाने वाली औसतन 29 लाख डोज के मुकाबले एक महीने बाद यह संख्या गिरकर 19 लाख तक आ गई. 

यह तब भी हुआ पूरे देश में बड़ी संख्या में लोग टीकाकरण के लिए आकर्षित हुए और कतार में लगने लगे.

तेलंगाना में भारी गिरावट दर्ज
आजतक/इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) द्वारा निकाले गए आंकड़ों के अनुसार मई में 23 प्रमुख राज्यों में से 21 में टीकाकरण अभियान धीमा हो गया.

तेलंगाना (-71.2 फीसदी), केरल (-59.1 फीसदी), छत्तीसगढ़ (-56.5 फीसदी), और ओडिशा (-49.2 फीसदी) उन राज्यों में शामिल हैं जहां टीकाकरण की गति में काफी गिरावट देखी जा रही है.

दिल्ली और असम टीकाकरण में आगे
अगर इसके साथ ही सकारात्मक पक्ष पर नजर डालें तो असम और दिल्ली में औसत दैनिक टीकाकरण की दर में उछाल देखा गया.

पूर्वोत्तर राज्य में औसतन दैनिक टीकाकरण अभियान में 16.6 फीसदी का उछाल आया. अप्रैल में औसतन 47,854 की तुलना में मई में बढ़कर यह 55,780 तक पहुंच गया, जबकि राजधानी दिल्ली में अप्रैल में औसतन 66,882 से 12.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मई में 75,120 तक पहुंच गया.

दिल्ली और असम में टीकाकरण अभियान सकारात्मक रहा
दिल्ली और असम में टीकाकरण अभियान सकारात्मक रहा

इसके अलावा, दिल्ली उन राज्यों की सूची में भी सबसे आगे है, जहां 18-44 आयु वर्ग में टीकाकरण किए गए जनसंख्या का अधिकतम अनुपात है. दिल्ली की 10 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है.

बढ़ोतरी वाली लिस्ट में दिल्ली के बाद बिहार, राजस्थान, गुजरात और झारखंड शामिल हैं. संख्या के मामले में देखें तो बिहार इस श्रेणी में चार्ट में सबसे आगे है. लेकिन बिहार में युवा आबादी का एक बहुत बड़ा पूल है.

टीकाकरण के लिए उत्पादन में बढ़ोतरी
भले ही देश टीकाकरण अभियान की गति को तेज करने के लिए संघर्ष कर रहा है, नीति आयोग ने फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन और मॉडर्ना जैसी वैश्विक फॉर्मा कंपनियों के साथ कई दौर की चर्चा की है ताकि डोज की सप्लाई बढ़ाई जा सके.

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जबकि मॉडर्ना से 2022 में वैक्सीन की सप्लाई शुरू होने की उम्मीद है तो फाइजर की वैक्सीन जुलाई में ही भारतीय बाजार में प्रवेश करने के लिए तैयार है.

घरेलू स्तर पर वैक्सीन की उपलब्धता को बढ़ाने की भी लगातार कोशिश की जा रही है. केंद्र ने कोवैक्सीन शॉट्स के उत्पादन में वृद्धि के लिए देश की पोलियो वैक्सीन परियोजना में अग्रणी रही जैव प्रौद्योगिकी फर्म BIBCOL को शामिल किया है.

पीएसयू BIBCOL, जिसने भारत बॉयोटेक के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर किया है. एक विशेष प्रयोगशाला स्थापित करने और सितंबर से हर महीने कोवैक्सीन की एक करोड़ डोज बनाने की योजना तय की गई है.

स्वदेशी टीकों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई अन्य बॉयोटेक और अनुसंधान फर्मों के साथ भी समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं. पांच और कंपनियों के अलावा डॉ. रेड्डीज घरेलू सप्लाई के लिए रूस की स्पुतनिक वी के उत्पादन में शामिल हैं. (रिपोर्ट-सम्राट शर्मा)


 

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