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Weather Forecast: फरवरी में बारिश की कमी ने तोड़ा 66 सालों का रिकॉर्ड, इस हफ्ते भी जारी रहेगा शुष्क मौसम का दौर

उत्तर भारत में मौसम फिलहाल पूरी तरह शुष्क बना हुआ है. मैदानी इलाकों में कोई सक्रिय मौसम प्रणाली नहीं है, जबकि एक पश्चिमी विक्षोभ 6 मार्च को पश्चिमी हिमालय पहुंचेगा, जिसका असर मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित रहेगा.

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उत्तर और पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
उत्तर और पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में आज (5 मार्च) भी शुष्क मौसम का दौर जारी रहने वाला है. फिलहाल यहां बारिश के कोई आसार नहीं हैं. मैदानी इलाकों में कोई सक्रिय मौसम प्रणाली मौजूद नहीं है. हालांकि पहाड़ी इलाकों में हल्की बारिश देखी जा सकती है. आइये जानते हैं देशभर के मौसम का हाल.

मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एजेंसी, स्काईमेट के मुताबिक, इस सप्ताह उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर कोई सक्रिय मौसम प्रणाली मौजूद नहीं है. हालांकि एक पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय की ओर 6 मार्च 2026 को आएगा लेकिन इसका का प्रभाव मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा. इसका हल्का असर तराई या पहाड़ों की तलहटी तक पहुंच सकता है, लेकिन दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना नहीं है.

इन मौसम प्रणालियों के गुजरने के कारण मैदानों में तापमान का अंतर बढ़ेगा. इसके चलते दिल्ली-एनसीआर में अगले 4-5 दिनों तक तेज सतही हवाएं चलेंगी. सप्ताहांत के आसपास हवाओं की रफ्तार कुछ कम हो सकती है. ये तेज हवाएं तापमान को तेजी से बढ़ने नहीं देंगी और अधिकतम तापमान इस सप्ताह 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रहेगा. हालांकि मौसमी बदलाव और हवाओं की रफ्तार कम होने के बाद 8 मार्च से तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाएगी.

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मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में आज का न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस तो अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रह सकता है और दिन के समय तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी. वहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आज धूप खिली रहेगी और आसमान साफ ​​रहेगा. यहां का न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तो अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.

स्काईमेट के मुताबिक, फरवरी 2026 ने 1960 के बाद सबसे कम बारिश का रिकॉर्ड बनाया. इस साल फरवरी में केवल 4.2 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत 22.7 मिमी है. इससे पहले 1960 में फरवरी के दौरान मात्र 2.7 मिमी बारिश हुई थी. उत्तर भारत के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर भारत की स्थिति सबसे खराब रही. उत्तर भारत में लगभग 85% बारिश की कमी रही, जबकि पूर्वोत्तर भारत में 90% से अधिक की भारी कमी दर्ज की गई.

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