आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने संसद में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए मांग की है कि दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के खुले गड्ढों में गिरने से होने वाली मौतों जैसी घटनाओं में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. उन्होंने ऐसे मामलों में अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने के लिए विशेष कानून बनाने की अपील की है. ये मांग हाल ही में जनकपुरी में हुई एक दर्दनाक घटना के संदर्भ में की गई है, जहां एक युवक कमल ध्यानी की मौत हो गई थी.
AAP के राज्यसभा सांसद डॉ. मित्तल ने राज्यसभा में लगातार बढ़ रही प्रशासनिक संवेदनहीनता को लेकर सवाल किया है. उन्होंने कहा, हाल ही में हमने देखा कि हमने देखा, कैसे सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा उपायों की अनदेखी के कारण आग लगती है, जिससे नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है. इसी तरह सिविक अथॉरिटी की घोर लापरवाही कभी सड़क धंस जाती है तो कभी बेसमेंट में पानी भर जाता है. जिसके कारण डूबने से छात्रों की मौत हो जाती है.
'जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई'
उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी दर्दनाक घटनाओं के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती. कार्रवाई के नाम पर सिर्फ उनका तबादला या निलंबन कर दिया जाता है.
आप नेता ने पब्लिक सर्विस अकाउंटेबिलिटी एक्ट जैसा एक सख्त केंद्रीय कानून लाए. इस कानून के तहत लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो और पीड़ित को दिए जाने वाला मुआवजा भी दोषी के वेतन या संपत्ति से ही दिया जाए. इससे व्यक्तिगत जवाबदेही बढ़ेगी.
उन्होंने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि मैंने एक विशेष उल्लेख किया था, जहां मैंने कहा कि जब सरकारी कार्यालयों की लापरवाही से मौतें होती हैं तो जिम्मेदार लोगों को कभी जवाबदेह नहीं ठहराया जाता. उन्हें केवल ट्रांसफर या सस्पेंड किया जाता है और मामूली कार्रवाई की जाती है. उनके खिलाफ आपराधिक कानून की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए...
बता दें कि ये मुद्दा दिल्ली में सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर की लापरवाही से जुड़े हादसों को रेखांकित करता है. हाल ही में जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर कार्य के लिए खोदे गए एक 15 फुट गहरे गड्ढे में बाइक सवार कमल ध्यानी गिर गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ट्रॉमेटिक एस्फिक्सिया और दम घुटना बताया गया था, जहां बाइक का वजन छाती पर पड़ने और मुंह-नाक में मिट्टी भरने से सांस रुक गई. इस घटना ने शहर में खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की कमी को उजागर किया था. पुलिस ने ठेकेदारों के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज किया था, लेकिन AAP का मानना है कि उच्च अधिकारियों को भी जवाबदेह बनाना जरूरी है.