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Byju’s की तरह डूबी AAP? क्या बनी दिल्ली में केजरीवाल के हार की वजह

Byju’s और AAP की सफलता और गिरावट में कई समानताएं हैं. दोनों ने बड़े वादों, शानदार मार्केटिंग और मीडिया सपोर्ट से जबरदस्त बढ़त बनाई, लेकिन जब हकीकत सामने आई और वादों पर अमल कमजोर पड़ा, तो उनकी लोकप्रियता गिर गई. अगर वादा ज्यादा और डिलीवरी कम हो, तो गिरावट तय होती है.

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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

2022 Byju’s के फाउंडर बायजू रविंद्रन का वक्त था. उन्होंने 2021 में कोचिंग इंस्टिट्यूट आकाश को खरीदा और उनकी कंपनी की वैल्यू सीधे 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई. हर कोई Byju’s की सफलता की कहानी सुन रहा था और बायजू रविंद्रन कॉरपोरेट इंडिया के नए सुपरस्टार बन चुके थे. मीडिया में उनकी धूम थी. लेकिन आज उनकी कंपनी की वैल्यू शून्य हो चुकी है. अब कोई भी उन्हें छूने तक को तैयार नहीं.  

दूसरी ओर, पिछले दशक के एक और "सुपरस्टार" अरविंद केजरीवाल अभी इतनी बुरी स्थिति में नहीं पहुंचे हैं. उनकी पार्टी अभी भी पंजाब में सत्ता में है, गोवा में 5% और गुजरात में 13% वोट शेयर है. दिल्ली में भी AAP का वोट शेयर 43% है, जो आमतौर पर किसी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए काफी होता.  

लेकिन Byju’s और AAP की कहानी हमें एक बड़ी सीख देती है – नेतृत्व, गवर्नेंस, वादे और हकीकत के बीच का फर्क, और सबसे बड़ी बात – जब कोई सोचने लगे कि वो सबको हमेशा बेवकूफ बना सकता है, तो उसका पतन निश्चित होता है.  

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बायजू रविंद्रन के पास दोबारा खड़े होने का मौका है. कौन जानता है, वे फिर से कोई नया बिजनेस आइडिया लाकर उसे सफल बना लें. इसी तरह, अरविंद केजरीवाल भी किसी नए आंदोलन या अभियान के सहारे अपनी खोई जमीन वापस पा सकते हैं.  

दोनों के लिए राहत की बात ये है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हो चुकी है. जब 2021 में वे राष्ट्रपति पद से हटे थे, तो हर किसी को लगा कि अब उनका राजनीति में कोई भविष्य नहीं. लेकिन 2024 में उन्होंने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया.  

अब चुनावी नतीजों पर चर्चा करें, तो बहुत से लोग जाति, धर्म, मिडिल क्लास वोट और तमाम फैक्टर्स को गिनाएंगे. लेकिन सच्चाई साफ है – AAP का वोट शेयर 10% गिर चुका है. 2020 में 53% वोट पाने वाली AAP इस बार सिर्फ 43% पर सिमट गई. इसका ज्यादातर फायदा बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों को मिला. कांग्रेस की स्थिति फिर से शून्य पर ही रही.  

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90% वोट गिने जा चुके हैं और तस्वीर साफ है – बीजेपी की सीटें 8 से बढ़कर 48 हो गईं, जबकि AAP की 62 से गिरकर 22 पर सिमट गई. लेकिन ये चुनाव सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है. असली मुद्दा है – कैसा नेतृत्व टिकाऊ और मजबूत होता है?  

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Byju’s और AAP दोनों ने जबरदस्त मीडिया मैनेजमेंट और विज्ञापनों के सहारे अपनी शानदार छवि बनाई. Byju’s ने पैरेंट्स को भरोसा दिलाया कि अगर वे मोटी रकम खर्च कर उनके कोर्सेज लें, तो उनके बच्चे पढ़ाई में आगे निकल जाएंगे.  

इसी तरह, AAP ने दिल्ली के लोगों को भरोसा दिलाया कि वो एक ईमानदार सरकार है, जो गरीबों के लिए काम करेगी. मुफ्त बिजली, बेहतर स्कूल और मोहल्ला क्लीनिक जैसी चीजों ने इसे मजबूत किया. लेकिन हकीकत धीरे-धीरे सामने आने लगी.

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Byju’s के मामले में, धीरे-धीरे पैरेंट्स को अहसास हुआ कि उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई खास सुधार नहीं हो रहा. सोशल मीडिया पर लोगों ने शिकायतें करनी शुरू कीं और देखते ही देखते Byju’s का बुलबुला फूट गया.  

AAP के मामले में, लोगों ने देखा कि स्कूलों में बच्चों को 9वीं में फेल करके 10वीं में 100% रिजल्ट दिखाया गया. पानी, सड़क, कूड़ा, सीवेज और प्रदूषण जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस रहीं. MCD जीतने के बाद AAP अब दिल्ली की दुर्दशा के लिए बीजेपी को दोष भी नहीं दे सकती थी.  

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बड़ी बात ये है कि जब आप जितना वादा करते हैं, उतना पूरा नहीं कर पाते, तो कीमत चुकानी ही पड़ती है. और अगर आप खुद को सबसे ईमानदार और अलग दिखाने की कोशिश करते हैं, तो गिरावट और भी ज्यादा दर्दनाक होती है.

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