विदेशों से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए भारतीय डॉक्टरों को कोरोना काल में अपनी चिकित्सा सेवा देने की इजाजत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर हुई हैं. इन याचिकाओं परसुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को यानी आज सुनवाई होगी. विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए डॉक्टरों को कोरोना काल में सेवा देने की इजाजत को लेकर याचिका पर जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ सुनवाई करेगी.
जानकारी के मुताबिक ये याचिकाएं इंडियन फॉरेन मेडिकल स्टूडेंट्स वेलफेयर, एमसीआई, गुरुकुल ट्रस्ट के साथ-साथ एसोसिएशन ऑफ एमडी फिजिशियंस की ओर से दाखिल हुई हैं. इन सबकी ओर से दायर याचिका में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन यानी एनबीई की नियमावली 2002 के नियम 11 में राहत देने की गुहार सर्वोच्च न्यायालय से लगाई गई है.
इससे विदेशी मेडिकल कॉलेजों या विश्वविद्यालयों से चिकित्सा स्नातक की डिग्री लेकर लौटे डॉक्टर्स के कोरोना संकट के दौरान देश की सेवा करने का रास्ता साफ हो जाएगा. याचिका में यह मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को ये आदेश दे कि 2020 के पासआउट विदेशी एमबीबीएस डॉक्टर्स को स्क्रीनिंग टेस्ट क्वालिफाइंग से पहले इंटर्नशिप करने की इजाजत दी जाए.
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि परीक्षा बाद में भी कराई जाएगी तो कम से कम डॉक्टर्स अपनी सेवा तो दे सकेंगे. डॉक्टर्स को उस इम्तिहान में ग्रेस मार्क देकर 130-35 के प्राप्तांक पर भी उत्तीर्ण किया जाए जिससे देश के मेडिकल कॉलेज या विदेशी मेडिकल कॉलेजों से उत्तीर्ण भारतीय छात्रों के साथ दशकों से हो रहे भेदभाव को खत्म किया जा सके. अभी नेपाल सहित कुछ देशों से पास आउट छात्रों को ही इंटर्नशिप में रियायत मिलती है.
एफएमजीएस डॉक्टर्स को इस संकटकाल में सेवा का मौका देने के लिए सरकार इनको भी चिकित्सा बेड़े में शामिल करे. कोर्ट सरकार को इस बाबत निर्देश दे. इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज एकसाथ सुनवाई होनी है.