सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में शुक्रवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई जा रही कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड के इमरजेंसी इस्तेमाल को अपना अप्रूवल दे दिया है. हालांकि वैक्सीन के इस्तेमाल पर अंतिम फैसला ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को लेना है. लेकिन अब एक्सपर्ट कमेटी के फैसले के बाद लोगों के जेहन में तमाम तरह के सवाल कूद रहे हैं. जैसे क्या वैक्सीन के इस्तेमाल को हरी झंडी मिल गई है? सभी के लिए वैक्सीन कितनी जल्दी उपलब्ध होगी? और कौन सी वैक्सीन बेहतर है?
ICMR के पूर्व चीफ एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर ने इंडिया टुटे टीवी के कार्यकारी संपादक साहिल जोशी के साथ इन सभी मुद्दों पर विस्तार से बात की.
सवाल: इंग्लैंड में एस्ट्राजेनेका के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिलने के बाद, कोविशील्ड को भारत में समिति से सिफारिश भी मिल गई. क्या हम अपनी पहली वैक्सीन के लिए तैयार हैं या हमें कुछ समय तक इंतजार करना होगा?
जवाब: सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की जानकारी कभी लीक नहीं होती. यदि एक्सपर्ट कमेटी वैक्सीन की सिफारिश कर रही है तो इसका मतलब है कि उनके पास वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति देने के लिए पर्याप्त डेटा है. एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का परीक्षण ब्राजील और यूके में किया गया था, इसलिए हो सकता है कि उन्होंने उन सैंपल्स के डेटा का उपयोग किया हो, लेकिन हमें डेटा सैंपल्स के बारे में जानकारी नहीं है. वैक्सीन की दो खुराक हैं इसलिए हमें यह भी जांचना होगा कि कौन सी खुराक अप्रूव हुई है. यदि हम 2 डोज पॉलिसी का उपयोग करते हैं तो यह हमारे लिए अधिक उपयोगी है क्योंकि दो डोज वैक्सीन की सफलता दर अधिक है.
सवाल: टीके का इमरजेंसी इस्तेमाल क्या है?
जवाब: प्राधिकार के आपातकालीन उपयोग (EUA) जैसा कोई शब्द नहीं है. हम इसे वैक्सीन का "प्रतिबंधित उपयोग" कह सकते हैं. जब हमारे पास दवाओं या वैक्सीनों का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, तो ऐसे मामलों में हम वैक्सीन के प्रतिबंधित उपयोग की अनुमति देते हैं. टीके के प्रतिबंधित उपयोग की दो शर्तें होती हैं. पहली- शासन के नियंत्रण के तहत हमें टीकाकरण की प्रक्रिया का संचालन करना होता है और दूसरी शर्त यह है कि रोगी की सहमति के बिना हम मरीजों पर वैक्सीन का उपयोग नहीं कर सकते हैं.
सवाल: कोविशील्ड वैक्सीन के तीसरे चरण के परिणाम लंबित हैं. अगर हमें इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाती है तो क्या इसका मतलब यह है कि वैक्सीन केवल स्वास्थ्यकर्मियों या बुजुर्ग नागरिकों जैसे सीमित लोगों को ही मिलेगी?
जवाब: हां और जब तक वैक्सीन को अंतिम मंजूरी नहीं मिल जाती है, कंपनी सभी को वैक्सीन नहीं बेच सकती है. सरकार कंपनी के लिए ऐसी शर्तें रख सकती है ताकि वैक्सीन सीमित और प्राथमिकता वाले लोगों को ही मिले.
सवाल: अगर लोगों के पास वैक्सीन के कई विकल्प हैं तो लोग कैसे तय करेंगे कि कौन सी वैक्सीन उनके लिए अच्छी है?
जवाब: जब हम वैक्सीन का चयन करते हैं तो हमें इसकी सफलता दर की तुलना में उस वैक्सीन के दुष्प्रभावों पर विचार करना होता है. सौभाग्यवश टीकों के दुष्प्रभाव क्रिटिकल नहीं हैं और साइड इफेक्ट्स की दर भी बहुत कम है. जब किसी वैक्सीन का चयन करते हैं, तो उसकी उपलब्धता, भंडारण की स्थिति और उसकी कीमतें 3 महत्वपूर्ण कारक होते हैं.
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सवाल: ड्राई रन क्या है?
जवाब: जब हम किसी भी परियोजना को लागू करते हैं तो हमें उन सभी यथार्थवादी मुद्दों पर विचार करना होता है, जिनका हमें सामना करना पड़ सकता है. इसलिए हमें सभी छोटी से छोटी चीजों का ध्यान रखना होता है. यही ड्राई रन है.
सवाल: अगर डब्ल्यूएचओ ने फाइजर वैक्सीन की अनुमति दी है तो क्या उन्हें भारत में अनुमति के लिए फिर से अप्लाई करने की आवश्यकता होगी? फाइजर को भारत में अनुमति क्यों नहीं मिल रही है?
जवाब: वैक्सीन के साइड इफेक्ट लोगों के क्रोमोसोम और जीन पर निर्भर करते हैं. भूगोल के मुताबिक जीनोम स्ट्रक्चर और क्रोमोसम बदल जाते हैं. अगर किसी वैक्सीन को यूरोप या अमरीका में अनुमति मिल रही है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह भारतीयों के लिए भी उपयुक्त है. इसीलिए भारत में अभी तक फाइजर वैक्सीन को अनुमति नहीं मिली है.
सवाल: युवा (25 से 40 साल) पूछ रहे हैं कि उन्हें वैक्सीन कब मिलेगी? वैक्सीन के पहले चरण के रोल आउट के लिए कितना समय जरूरी है?
जवाब: यंगस्टर्स को डरने की जरूरत नहीं है कि उन्हें भी वैक्सीन मिलेगी, लेकिन पहले वैक्सीन कमजोर समूहों तक पहुंचाई जाएगी और यह सही निर्णय है. सभी आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए 6 महीने की अवधि आवश्यक है.