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हादसे से ठीक पहले बदली सीट... बेटी की जिद ने बचा ली कोरोमंडल ट्रेन के यात्री की जान

ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार को हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना में सैकड़ों लोगों की जान चले गई जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए. बालासोर रेल हादसे में बाल-बाल बचे एमके देब ने अपना किस्सा साझा करते हुए बताया कि कैसे बेटी की जिद से उनकी जान बच गई.

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बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे में  अभी तक 275 लोगों की मौत हो चुकी है (Photo- PTI)
बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे में अभी तक 275 लोगों की मौत हो चुकी है (Photo- PTI)

बालासोर ट्रेन हादसा कई परिवारों को ताउम्र ना भूलने वाले जख्म दे गया है. हादसे में जहां 275 लोगों की मौत हो गई है वहीं एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं. हादसे को तीन दिन हो चुके हैं और इसकी कई कहानियां अब सामने निकलकर आ रही हैं. ऐसी ही एक कहानी है एमके देब की, जो कोरोमंडल ट्रेन में बेटी के साथ कटक जा रहे थे. देब बताते हैं कि अगर उनकी बेटी ने जिद ना की होती तो वो आज जिंदा नहीं होते.

बेटी की जिद पर बदली सीट

एमके देब अपनी आठ वर्षीय बेटी स्वाति के साथ शुक्रवार शाम को उसी कोरोमंडल एक्सप्रेस में सफर कर रहे थे जो भीषण हादसे का शिकार हुई. देब भी नहीं जानते थे कि बेटी की जिस जिद की वजह से वह सीटों की अदला-बदली कर रहे हैं वह जिद उन्हें नया जीवनदान दे रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिता-पुत्री की जोड़ी खड़गपुर में ट्रेन में सवार हुई और उन्हें कटक में उतरना था क्योंकि शनिवार को उनकी एक डॉक्टर के साथ अपॉयमेंट थी. हालांकि उनके पास थर्ड एसी कोच में यात्रा करने का टिकट था, लेकिन बच्चे ने खिड़की के पास बैठने की जिद कर दी.

खड़गपुर में एक सरकारी कर्मचारी देब बताते हैं, 'हमारे पास विंडो सीट टिकट नहीं थी. हमने टीसी से अनुरोध किया, जिन्होंने सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो हम अन्य यात्रियों के साथ अपनी सीटों की अदला-बदली करवा लें. हम दूसरे कोच में गए और दो लोगों से अनुरोध किया, जो सहमत हो गए. वे हमारे मूल कोच में आए थे, जबकि हम उनके कोच में जाकर उनकी सीट पर बैठ गए जो तीन रेक दूर था.'

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वो कोच बुरी तरह हुआ क्षतिग्रस्त

इसके कुछ देर बाद ही ट्रेन बालासोर में हादसे का शिकार हो गई जिसमें 275 लोगों की मौत हो गई. इसे किस्मत ही कहेंगे कि एमके देब अपनी बेटी के साथ जिस डिब्बे में बैठे थे, उसका कुछ नहीं बिगड़ा था जबकि जिस कोच में उनकी सीट रिजर्व थी, वो कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई लोगों की जान चले गई. देब ने बताया, "हमने जिन दो यात्रियों के साथ अपनी सीटों की अदला-बदली की थी, उनके बारे में हमें पता नहीं चल सका है. हम उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं. साथ ही, हम इस चमत्कार के लिए ईश्वर के आभारी हैं। हमारे कोच में लगभग सभी यात्री थे.'

डॉक्टर भी हैरान

मामूली रूप से घायल देब और उसकी बेटी स्थानीय लोगों की मदद से शनिवार सुबह कटक पहुंचने में सफल रहे. बच्ची के बाएं हाथ में फोड़ा है और वह डॉक्टर से सलाह लेना चाहती है.  बाल रोग विशेषज्ञ विक्रम सामल ने कहा, 'जब मुझे पिता-पुत्री की जोड़ी के चमत्कारिक ढंग से बचने के बारे में पता चला तो मेरे पास अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्द कम पड़ गए. टक्कर के बाद कोच के अंदर गिरने के बाद उन्हें मामूली चोटें आईं.'

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