वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर फिर से कड़ा हमला बोला है. पार्टी ने वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि इंडो-गंगेटिक प्लेन्स और हिमालय की तराई वाले क्षेत्रों में वायु प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य और विकास संकट बन चुका है, लेकिन केंद्र सरकार इस समस्या को गंभीरता से लेने में विफल है.
कांग्रेस महासचिव और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ‘अ ब्रीथ ऑफ चेंज’ पूरी तरह तथ्य आधारित है और समय की जरूरत को साफ करती है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में हर साल लगभग 10 लाख लोगों की आयु से पहले मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है. इसके साथ ही, प्रदूषण के कारण क्षेत्रीय GDP में लगभग 10 प्रतिशत की आर्थिक हानि भी हो रही है.
रमेश ने कहा कि यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अब जल्द से जल्द कदम उठाने की आवश्यकता है. उन्होंने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के इमिशन स्टैंडर्डस को सख्ती से लागू करने, पुराने प्लांट्स को धीरे-धीरे बंद करने, और राज्यों के बीच साझा एयरशेड आधारित गवर्नेंस अपनाने की बात कही.
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साथ ही, कांग्रेस लंबे समय से एयर पॉल्यूशन कंट्रोल एंड प्रिवेंशन एक्ट 1981 और नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स 2009 की समीक्षा करने की मांग कर रही है ताकि पीएम 2.5 जैसे खतरनाक प्रदूषकों पर ख़ास तौर पर फोकस किया जा सके.
जयराम रमेश ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के बजट और दायरे दोनों को बढ़ाने, सार्वजनिक परिवहन के विस्तार और इलेक्ट्रिफिकेशन और वाहनों के इमिशन स्टैंडर्डस को कठोर बनाने की भी वकालत की.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वायु प्रदूषण से लाखों लोगों की जान जा रही है और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है, तो मोदी सरकार कब तक इस समस्या से इनकार करती रहेगी. यह आलोचना ऐसे समय में आई है जब दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और स्वास्थ्य संकट लगातार बढ़ रहा है.