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Coal Crisis Explainer: सालभर में 440% तक बढ़ी कीमत, आयात में गिरावट... जानें भारत-चीन में क्यों आया कोयले का संकट?

भारत के अलावा चीन में भी कोयले का संकट बढ़ता जा रहा है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इंडोनेशियाई कोयले की कीमत बढ़ती जा रही है. एक साल में इंडोनेशियाई कोयला 439% महंगा हो चुका है.

भारत में घट गया है कोयले का आयात. (फाइल फोटो-PTI) भारत में घट गया है कोयले का आयात. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तेजी से बढ़ रही है कोयले की कीमत
  • भारत और चीन सबसे बड़े कन्ज्यूमर
  • दोनों देश घरेलू उत्पादन बढ़ाने में जुटे

देश में इस वक्त कोयले का संकट (Coal Crisis) जारी है. जिन बिजली घरों में पहले 17-17 दिन का कोयले का स्टॉक हुआ करता था, वहां अब महज 4-5 दिन का स्टॉक ही बचा है. जबकि, आधे से ज्यादा पावर प्लांट में तो एक या दो दिन का स्टॉक ही है. ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, विदेश से आने वाले कोयले की कीमत बढ़ने से इसकी सप्लाई कम हुई है और घरेलू कोयले पर निर्भरता बढ़ी है. नतीजतन, कोयले की कमी देखने को मिल रही है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, एशिया में थर्मल कोयले की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जिससे चीन और भारत में कोयले का संकट खड़ा हो गया है. चीन के बाद भारत कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है.

तेजी से बढ़ रही है कोयले की कीमत...

रॉयटर्स ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया का हाई ग्रेड थर्मल कोयले की कीमत 8 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में 229 डॉलर प्रति टन पहुंच गई, जबकि इस साल 30 अप्रैल को इसकी कीमत 88.52 डॉलर प्रति टन थी. इसी तरह जापान और दक्षिण कोरियाई कोयले की कीमतें भी पिछले साल के सितंबर की तुलना में इस साल 400% से ज्यादा बढ़ गई है. वहीं, इंडोनेशियाई कोयला जो 2020 में अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 22.65 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया था, उसकी कीमत 439% बढ़कर 8 अक्टूबर को 122.08 डॉलर प्रति टन हो गई. 

ऑस्ट्रेलियाई कोयला कीमत बढ़ने के बावजूद इंडोनेशियाई कोयले की तुलना में कम बेहतर है. नतीजा ये हुआ कि चीन ने ऑस्ट्रेलिया से कोयला खरीदना बंद कर दिया और इंडोनेशिया से बढ़ा दिया. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया अभी भी भारत को कोयले की आपूर्ति कर रहा है. 

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भारत भी कम खरीद रहा कोयला!

कोयले की बढ़ती कीमत से इसका आयात प्रभावित हुआ है. भारत ने भी कोयले के आयात में कटौती कर दी है. रॉयटर्स ने कमोडिटी कंसल्टेंट Kpler के हवाले से बताया है कि भारत का आयात जून के बाद से कम होता जा रहा है. भारत ने अक्टूबर के पहले हफ्ते में 2.67 मिलियन टन कोयले का आयात किया था जबकि पिछली साल इसी दौरान 3.99 मिलियन टन कोयला आयात किया था.

चीन में बढ़ रहा कोयले का आयात

एक ओर भारत में कोयले के आयात में कमी आ रही है तो इसके उलट चीन में आयात बढ़ रहा है. Kpler के मुताबिक, चीन ने इस साल अक्टूबर के पहले हफ्ते में 3.27 मिलियन टन थर्मल कोयले का आयात किया है, जो पिछली साल के इसी हफ्ते की तुलना में 1.47 मिलियन टन ज्यादा है. ऐसा अनुमान है कि दूसरे हफ्ते में चीन का आयात बढ़कर 4.50 मिलियन टन हो जाएगा. 

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हालात कब तक सुधरने की उम्मीद?

लेकिन भारत और चीन दोनों के लिए ही आयायतित कोयला बहुत जरूरी है. हालांकि, आयातित कोयले की कीमत बढ़ते ही दोनों ही देशों ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. चीन ने उन खानों को फिर से खोलने का आदेश दिया है जिसे उसने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बंद करवा दिया था. वहीं, भारत की सरकारी कंपनी कोल इंडिया भी प्रोडक्शन बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

इन कोशिशों के सफल होने में अभी कुछ और महीने लग सकते हैं. लेकिन जब तक घरेलू उत्पादन वास्तव में नहीं बढ़ जाता, तब तक आयातित कोयले की कीमतों में कमी आने की उम्मीद नहीं है.

 

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