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बजट में दिल्ली के लिए शून्य! केजरीवाल सरकार ने कहा- धोखे और उम्मीदों पर पानी फेरने वाला बजट

वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, भाजपा के पास सब कुछ है, ज़्यादा बजट है, एलजी है, दिल्ली के अफसरों पर कंट्रोल है, लेकिन सब कुछ होने के बावजूद भाजपा ने पिछले 11 सालों में एक काम नहीं किया. ये भाजपा का मॉडल है. दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल का मॉडल जिसके पास सिर्फ सालाना 40,000 करोड़ रुपये आते हैं.

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आतिशी (Credits: PTI)
आतिशी (Credits: PTI)

केजरीवाल सरकार में वित्त मंत्री अतिशी ने दावा किया है कि केंद्रीय बजट एक बार फिर दिल्लीवालों के लिए धोखे और उम्मीदों पर पानी फेरने वाला बजट साबित हुआ है. आतिशी के मुताबिक, इस केंद्रीय बजट में भी दिल्ली को एक पैसा नहीं मिला है. वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, पिछले साल दिल्ली के लोगों ने केंद्र सरकार को 2.32 लाख करोड़ रुपये टैक्स दिया था, लेकिन इसके बावजूद भाजपा की केंद्र सरकार ने दिल्ली को इस बजट में कुछ नहीं दिया.

वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, दिल्लीवालों ने अपने इनकम टैक्स का मात्र 5-5% दिल्ली के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए मांगा था लेकिन भाजपा शासित केंद्र सरकार दिल्ली को इतना भी नहीं दे सकी. करों में हिस्सेदारी के रूप में बाक़ी राज्यों को 1.24 लाख करोड़ रुपये का आवंटन मिला, लेकिन सर्वाधिक इनकम टैक्स देने वाले राज्यों में शामिल दिल्ली को एक पैसा नहीं मिला. केंद्रीय बजट में राज्यों की लोकल बॉडीज के लिए 82,207 करोड़ रुपये का आवंटन लेकिन यहां भी दिल्ली को निराशा मिली और एमसीडी को भी एक पैसा नहीं मिला.

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उन्होंने कहा कि, केंद्रीय बजट में भाजपा ने एक बार और स्पष्ट किया-पिछले 11 सालों में भाजपा और उनकी केंद्र सरकार ने न तो दिल्ली के लोगों के लिए कुछ किया है न ही करेगी. वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, भाजपा शासित केंद्र सरकार ने अपना 11वां बजट देश के लोगों के सामने रखा. ये बजट दिल्ली के लोगों को धोखा देने का बजट, उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने का बजट साबित हुआ है. हर बार की तरह भाजपा शासित केंद्र सरकार ने दिल्ली के लोगों को उनका हक़ नहीं दिया.

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'दिल्ली सरकार को एक पैसा नहीं दिया गया'

वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, आज संसद में पेश किए गए बजट में दिल्ली के लोगों की मांग थी कि, वो जो टैक्स केंद्र सरकार को देते है उसका 5% हिस्सा दिल्ली सरकार को मिलना चाहिए लेकिन उस मांग के बदले केंद्र सरकार से दिल्ली को एक पैसा नहीं मिला. शेयर इन सेंट्रल टैक्सेस पर दिल्ली को एक पैसा आवंटित नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि, दिल्ली के लोगों की माँग थी कि, जिस तरह से देश भर में लोकल बॉडीज को बजट का आवंटन होता है, वैसे ही दिल्ली एमसीडी के लिए बजट आवंटन होना चाहिए. हमारी मांग थी कि, दिल्ली के लोगों द्वारा दिए जा रहे टैक्स का 5% एमसीडी को मिलना चाहिए लेकिन एमसीडी को भी केंद्र सरकार से बजट में एक रुपया भी नहीं मिला.

वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, ऐसा नहीं है कि, केंद्र सरकार ने और राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सा नहीं दिया. केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए दस्तावेज से स्पष्ट है कि, इस वित्तीय वर्ष में 1.24 लाख करोड़ रुपये का बजट अलग अलग राज्यों को दिया गया है. उसी तरह लोकल बॉडीज को ग्रांट के रूप में 82,207 करोड़ रुपये आवंटित किए गए है, लेकिन इस सब में दिल्ली को एक पैसा आवंटित नहीं किया गया है. 

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उन्होंने कहा कि, दिल्ली के लोग देश में सर्वाधिक टैक्स देने वाले राज्यों में शामिल है, देश के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण इंजन है. दिल्ली के लोगों ने पिछले साल केंद्र सरकार को 2.07 लाख करोड़ रुपये इनकम टैक्स और 25,000 करोड़ रुपये सीजीएसटी दिया.

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इसके बदले दिल्ली के लोगों ने अपने टैक्स का 5% हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और 5% हिस्सा दिल्ली की साफ़-सफ़ाई और सौंदर्यीकरण के लिए मांगा. कुल मिलाकर दिल्ली के लोगों ने केंद्र सरकार से मात्र 20,000 करोड़ रुपये की मांग की, जो उनके द्वारा दिए जाने वाले टैक्स का मात्र 10% है और ये केंद्र सरकार के कुल बजट का मात्र 0.4% है, लेकिन इसके बावजूद भी केंद्र सरकार ने न तो टैक्स शेयर में और न ही एमसीडी के लिये दिल्ली को एक पैसा दिया.

'दिल्ली वाले 40 हजार करोड़ का टैक्स देते हैं'

वित्त मंत्री आतिशी ने कहा कि, अब दिल्लीवालों के सामने 2 मॉडल बिलकुल साफ़ है. एक मॉडल अरविंद केजरीवाल का गवर्नेंस मॉडल है. दिल्ली के लोग सालाना 40,000 करोड़ रुपये का टैक्स दिल्ली की सरकार को देते हैं. दिल्ली सरकार ने इन पैसों का इस्तेमाल दिल्ली को 24x7 बिजली देने में, फ्री बिजली-पानी देने, अनाधिकृत कालोनियों में पानी का नेटवर्क डालने में, दिल्ली के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में, लोगों की बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में, फ़्लाइओवर-रोड बनवाने, ट्रांसपोर्ट बेहतर बनाने में करती है.

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दूसरी तरफ दिल्ली के लोग भाजपा शासित केंद्र सरकार को 2.32 लाख करोड़ रुपये टैक्स देते हैं लेकिन केंद्र सरकार इसमें दिल्ली को एक पैसा नहीं देती है. उन्होंने कहा कि, "आज मैं भाजपा को चैलेंज देती हूं कि, वो पिछले 11 बार से लगातार बजट पेश कर रहे है लेकिन क्या उन्होंने इस 11 बजट में दिल्ली के लिए एक काम भी किया?"

दिल्ली के सीएम की शक्तियां छीन ली गई है, अफसरों पर कंट्रोल छीन लिया गया है, उनके सारे काम रोकने की कोशिश की जाती है. फिर भी अरविंद केजरीवाल जी की सरकार फ्री बिजली देती है, 24 घंटे बिजली देती है, बच्चों की शानदार शिक्षा देती है, लोगों को अच्छा इलाज देती है, बस यात्रा देती है.

‘सरकार बचाओ-महंगाई बढ़ाओ’ वाला बजट

आम आदमी पार्टी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेश केंद्रीय बजट को ‘सरकार बचाओ-महंगाई बढ़ाओ’ वाला करार दिया. ‘‘आप’’ के सांसद संजय सिंह ने कहा कि इस बजट से देश के किसानों, महिलाओं, युवाओं, कर्मचारियों के हिस्से तो कुछ नहीं आया, लेकिन टैक्स न बढ़ाकर कॉरपोरेट घरानों को राहत जरूर दी है. यह बजट किसानों को एमएसपी की गारंटी देने, अग्निवीर योजना को खत्म करने, ओल्ड पेंशन, पेट्रोल-डीजल समेत रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स में छूट पर पूरी तरह खामोश है.

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संजय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा पेश बजट में दो-तीन बातें महत्वपूर्ण हैं. पहला, पिछले कई वर्षों से बजट की खुशहाली का अंदाजा शेयर मार्केट के गिरने और उठने से लगाया जाता है. मोदी सरकार का बजट आने के बाद शेयर मार्केट में करीब 12,00 अंक की गिरावट देखी गई. यानि इस बजट के आने के बाद शेयर मार्केट में भी कोई उत्साह नहीं है. दूसरा, बजट से उम्मीद लगाए अलग-अलग वर्गों के लोगों को भी निराशा हाथ लगी है.

देश का अन्नदाता किसान केंद्र के तीन काले कानून के खिलाफ एक साल तक सड़कों पर बैठा रहा. वो एमएसपी की मांग कर रहा है. किसानों को उम्मीद थी कि हमारा एमएसपी दोगुना किया जाएगा, लेकिन बजट में कोई प्रवधान नहीं है, जबकि 750 किसान शहादत दे चुके हैं और अभी भी सिंघु बॉर्डर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडू समेत देश के अलग-अलग क्षेत्रों में आंदोलनरत है. मोदी सरकार ने किसानों को दूध से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया है. उनको याद ही नहीं कि देश में किसान भी रहते हैं.

'सेना के लिए कोई बजट निर्धारित नहीं किया गया'

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संजय सिंह ने कहा कि एनडीए के घटक दल भी अग्निवीर योजना को कूड़ेदान में डालने की मांग कर रहे थे. ये योजना देश की सेना और हमारे नौजवानों के साथ विश्वासघात है लेकिन मोदी सरकार ने बजट में अग्निवीर योजना पर एक शब्द नहीं बोली. देश का युवा चाहता है कि फिर से पहले की तरह ही सेना की भर्ती बहाल की जाए. अग्निवीर योजना सेना को ठेके पर रखने की योजना है. यह भारत की सेना और भारत माता का अपमान है. इसलिए आम आदमी पार्टी इस योजना को वापस लेने की मांग करती रही है लेकिन सेना के लिए भी कोई बजट निर्धारित नहीं किया गया.

उन्होंने कहा कि इस देश का कर्मचारी वर्ग अपने बुढ़ापे के लिए चिंतित है. उसकी मांग है कि फिर से पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए. केंद्र सरकार नई पेंशन स्कीम में कर्मचारियों का पैसा शेयर मार्केट में लगाती हैं. शेयर मार्केट बढ़ेगा तो कर्मचारियों का पैसा बढ़ेगा और मार्केट गिरेगा तो पैसा डूब जाएगा.

डेढ़ लाख रुपए की तनख्वाह पाने वाले कर्मचारियों को भी मात्र 1200-1300 रुपए पेंशन मिल रही है. मोदी जी ने देश के कर्मचारी वर्ग को निराश किया है. माताओं-बहनों और मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि सरकार पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स में छूट देगी, जिससे उन्हें महंगाई से राहत मिलेगी लेकिन इस पर भी मोदी सरकार का बजट खामोश है.

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स्टॉक बेचने पर भी लगेगा टैक्स

संजय सिंह ने कहा कि इस देश के छोटे निवेशक शेयर बाजार की छोटी-छोटी कंपनियों में पैसा लगाते हैं और अपना घर चलाते हैं. देश में इन छोटे निवेशकों की संख्या करीब 10 करोड़ है. अगर उनके परिवारों को मिला लिया जाए तो ये संख्या 30 करोड़ तक जाती है लेकिन सरकार ने लॉन्ग टर्म इनकम पर टैक्स बढ़ाकर 10 से 12.5 फीसद कर दिया और शॉर्ट टर्म को 15 से बढ़ाकर 20 फीसद कर दिया.

यानि अगर कोई भी व्यक्ति अपना शेयर एक साल से ज्यादा की अवधि तक रखने के बाद बेचता है तो अब उसे अपनी आमदनी में से सरकार को 12.5 फीसद टैक्स देना होगा. यदि वो शॉर्ट टर्म के शेयर बेचता है तो उसे अब अपनी आमदनी का 20 फीसद देना होगा.

संजय सिंह ने कहा कि सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण आया. भाजपाई कह रहे हैं कि चीन की वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना है. फिर इनकी नाटक मंडली चीन का सामान बेचने वाली दुकान में जाकर तोड़फोड़ कर देंगे और दिन भर मीडिया में खबर चलती रहेगी. भाजपाई अपने आका से ये नहीं पूछते हैं कि उनके प्रधान नेता ने चीन के साथ 68 फीसद व्यापार बढ़ाया है. एक भारतीय जो चीन से व्यापार कर रहा है, उसका सामान तोड़ देते हैं.

इनको मोदी जी से पूछना चाहिए कि गलवान घाटी में हमारे 20 जवान शहीद हुए, अरुणाचल से लेकर बाकी राज्यों से खबरें आती हैं कि चीन भारत की सीमा में घुसपैठ कर रहा है. मोदी सरकार ने उस चीन के साथ 68 फीसद व्यापार बढ़ाया है. यानि सरकार उल्टा चीन की कमाई करवा रही हैं, ताकि वो और टैंकर-मिसाइल बनाएं और भारत की सीमाओं में घुसपैठ करें. वहीं, देश के अंदर चीन के सामानों का बहिष्कार करने के लिए अपनी पार्टी के लोगों से ड्राम करवाते हैं. इस आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट से ये तथ्य बाहर आए हैं.

उधर, पंजाब से ‘‘आप’’ सांसद मलविंद सिंह कांग ने कहा कि डेढ़ घंटे के बजट भाषण में एक बार भी पंजाब का जिक्र नहीं आया, जबकि पंजाब देश का अन्न भंडार भरता है और केंद्र सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा के तहत देश के 80 करोड़ लोगों को मिल रहे मुफ्त अनाज में पंजाब का 50 फीसद का योगदान है.

केंद्रीय वित्त मंत्री ने बाढ़ को लेकर केवल हिमाचल और भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड का जिक्र किया और उनके लिए पैकेज की भी घोषणा की, जबकि बाढ़ के चलते पंजाब के लोगों ने भी अपनी फसलों और प्रॉपर्टी का नुकसान झेला है, लेकिन उसका बजट में कोई प्रावधान नहीं है. पंजाब में हर रोज देश की शरहदों पर शहीद होने वाले जवान का शव तिरंगे में लपेट कर आती है. इसके बाद भी पिछली बार मोदी सरकार ने 15 अगस्त और 26 जनवरी को परेड में निकाली जाने वाली झांकियों में पंजाब की झांकियों को शामिल करने से इन्कार कर दिया. उन्होंने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है.

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केंद्र सरकार ने पिछले साल खाद पर 25 हजार करोड़ सब्सिडी देने की घोषणा की थी, लेकिन इस बार इसमें भी 36 फीसद कटौती कर दी गई है. इस बार बजट में 16 हजार करोड़ रुपए सब्सिडी देने की घोषणा की गई है. देश में बेरोजगारी और मंहगाई सबसे उच्च स्तर पर है. खाद, बीज, डीजल पेट्रोल महंगा है. किसान एमएसपी मांग रहा है. कई महीनों से धरने पर किसान बैठे हैं लेकिन एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं दी गई.

मोदी जी को किसानों, जवानों, गरीबों, मजदूरों, महिलाओं की फिक्र नहीं है. मोदी जी को केवल अपनी सरकार बचाने की फिक्र है. यह सरकार बचाओ बजट है. पंजाब बॉर्डर स्टेट है. नार्के का बड़ा आंतक है. पड़ोसी देश पंजाब में घुसपैठ करते हैं. हम केंद्र को कई बार पत्र लिखकर बॉर्डर को सुरक्षित करने और पंजाब को अतिरिक्त फंड देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन नही मिला. यह बजट पूरी तरह से पंजाब विरोधी है और देश की दशा-दिशा को कहीं भी परिभाषित नहीं करता है.

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