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POCSO एक्ट पर बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को SC में दी गई चुनौती

हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना 'स्किन टू स्किन' कॉन्टैक्ट के छूना POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा.

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बॉम्बे हाईकोर्ट (File Photo)
बॉम्बे हाईकोर्ट (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूथ बार एसोसिएशन ने दी चुनौती
  • POCSO एक्ट की धारा-8 पर बवाल

यूथ बार एसोसिएशन ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को बिना 'स्किन टू स्किन' कॉन्टैक्ट के छूना POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा.

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने कहा था कि केवल नाबालिग का सीना छूना यौन हमला नहीं कहलाएगा. यौन हमला तब कहलाएगा, जब आरोपी पीड़ित के कपड़े हटाकर या कपड़ों में हाथ डालकर फिजिकल कॉन्टैक्ट करे. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR ) ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले पर आपत्ति जाहिर की थी.

क्या है मामला
यह मामला 2016 का है. दोषी सतीश बंदू रागड़े 12 वर्षीय बच्ची को अपने घर ले गया था और उसने बच्ची का ब्रेस्ट दबाया. जब बच्ची घर नहीं लौटी तो उसकी मां उसे ढूंढ़ने के लिए निकली. मां ने बच्ची को रागड़े के घर पाया. बाद में बच्ची ने मां को बताया कि रागड़े उसे अमरूद देने के बहाने से अपने घर ले गया था और उसने उसकी ब्रेस्ट दबाया. 

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में सुनवाई के दौरान जस्टिस पुष्पा गनेड़ीवाला की एकल बेंच ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को POCSO अधिनियम की धारा-8 के तहत बरी कर दिया गया, जिसमें उसे तीन साल की न्यूनतम सजा मिल सकती थी. 

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