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कर्नाटक के कुल कोरोना केसों में बेंगलुरु की हिस्सेदारी, किसी भी राज्य की राजधानी से ज्यादा

सर्वाधिक केसों वाले 10 राज्यों में, कर्नाटक में 4.5 लाख से अधिक केसों के साथ चौथे स्थान पर है. हालांकि, इस दक्षिणी राज्य में महामारी का फैलाव सबसे अधिक केंद्रीकृत हैं. covid19india.org की ओर से इकट्ठा किए गए डेटा का इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने विश्लेषण किया.

देश में कोरोना से अब तक 80 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है (फाइल फोटो) देश में कोरोना से अब तक 80 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बेंगलुरु में पुष्ट केसों की संख्या 1.7 लाख से ज्यादा
  • मुंबई में 1.69 लाख से अधिक पुष्ट केस सामने आए
  • देश में कोरोना मरीजों की संख्या 49 लाख के पार

बेंगलुरु, जून के आखिर तक भारत के अहम बड़े शहरों में कोरोना वायरस से सबसे कम प्रभावित था, अब यह देश में सबसे अधिक कोविड केसों वाला शहर बन गया है. हालांकि, आईटी पावरहाउस की पहचान रखने वाले बेंगलुरु की कर्नाटक में महामारी में कितनी अधिक हिस्सेदारी रही है, वह अभूतपूर्व है.  

रिपोर्ट लिखे जाने तक बेंगलुरु में अब तक कोरोना वायरस के 1.7 लाख से अधिक पुष्ट मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि मुंबई ( जहां एक वक्त में देश में सबसे ज्यादा संक्रमित लोगों की संख्या थी) में 1.69 लाख से अधिक पुष्ट केस सामने आए. 

सर्वाधिक केसों वाले 10 राज्यों में, कर्नाटक में 4.5 लाख से अधिक केसों के साथ चौथे स्थान पर है. हालांकि, इस दक्षिणी राज्य में महामारी का फैलाव सबसे अधिक केंद्रीकृत हैं. covid19india.org  की ओर से इकट्ठा किए गए डेटा का इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने विश्लेषण किया. सिर्फ एक जिले - बेंगलुरु – की राज्य के सभी केसों में 37% से अधिक हिस्सेदारी है. अगर कर्नाटक के तीन सर्वाधिक प्रभावित तीन जिलों (बेंगलुरु, मैसूर, बेल्लारी) की बात की जाए तो राज्य के कुल केसों में करीब आधे यहीं से हैं.  

गुजरात भी महामारी के कुछ जगहों पर अधिक केंद्रित रहने के मामले में कर्नाटक के बाद दूसरा बड़ा राज्य है, लेकिन वहां से इसका स्तर कम है. अहमदाबाद, सूरत और वड़ोदरा जैसे तीन जिलों की गुजरात के सभी केसों में हिस्सेदारी 60% से अधिक है.  

इसके विपरीत, बिना किसी मेगासिटी वाले आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक प्रभावित जिले की राज्य के कुल केसों में हिस्सेदारी 15% है. दस सबसे प्रभावित राज्यों में कम से कम केंद्रित प्रकोप बिहार में हैं. 

चार सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में, अधिकतर जिले राज्य के 5% से भी कम केसों में हिस्सेदारी करते हैं, सिर्फ आंध्र प्रदेश अपवाद है जहां कम जिले हैं और महामारी का अधिक क्षेत्र में फैलाव है. 

अधिकतर, लेकिन सभी राज्यों में नहीं, यह देखने को मिला है कि कोविड का प्रकोप सबसे ज्यादा राजधानी शहर में देखने को मिला, यानि सबसे ज्यादा केस वहीं से सामने आए. इस मामले में महाराष्ट्र (पुणे जिला) और आंध्र प्रदेश (पूर्वी गोदावरी) अपवाद हैं. 

बेंगलुरु की कर्नाटक के कुल केसों में अधिक हिस्सेदारी सबसे अलग है. बेंगलुरु की जुलाई में कर्नाटक के कुल केसों में हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी तक बढ़ गई थी. कर्नाटक सरकार के कोविड-19 टेक्नीकल एडवाइजरी ग्रुप के सदस्य और एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ गिरधर बाबू कहते हैं,  “कर्नाटक में, कंटेनमेंट उपायों को लागू करने के लिए लॉकडाउन का अच्छी तरह से इस्तेमाल किया गया, हालांकि, अनलॉकिंग और प्रतिबंधों को हटाने के साथ केसों की संख्या में वृद्धि हुई है.” 

कर्नाटक में कोविड का प्रकोप जुलाई से ही बढ़ने लगा था. जून के आखिर में, जब मुंबई में 80,000 के आसपास केस थे तो बेंगलुरु में लगभग 4,500 पुष्ट केस थे. लेकिन उसके बाद से बेंगलुरु में केसों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी. कर्नाटक ने रविवार को 9,894 नए कोविड केस रिपोर्ट किए और 104 मौतों की सूचना दी. राज्य में एक दिन के लिए ये सबसे बड़ा आंकड़ा है. 

कर्नाटक के कोविड वॉर रूम के चीफ मुनीष मौदगिल कहते हैं, “यह एक सकारात्मक संकेत है कि कोविड संक्रमण शिखर पर जाता है और नीचे आता है. बेंगलुरु के लिए ये धारणा सही नहीं है कि संक्रमण नीचे नहीं आ रहा है. लेकिन कुल मिलाकर संख्या कुछ क्षेत्रों में कम नहीं हुई है लेकिन कुछ क्षेत्रों में नीचे आई है. इससे कुल संख्या स्थिर बनी रहती है. कोताही के लिए कहीं कोई गुंजाइश नहीं है. 

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