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...509 वर्ग मील का वो इलाका जिसके लिए असम-मिजोरम के बीच छिड़ा खूनी संघर्ष

असम और मिजोरम के बीच सीमा को लेकर ये विवाद कोई नया नहीं है, लेकिन हाल ही के वक्त में ये विवाद एक बार फिर उठकर सामने आया है.

असम और मिजोरम के बीच संघर्ष (PTI) असम और मिजोरम के बीच संघर्ष (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • असम, मिजोरम के बीच सीमा विवाद
  • सीमा पर संघर्ष, 5 जवान शहीद

पूर्वोत्तर के दो राज्य असम और मिजोरम के बीच बीते दिन सीमा से जुड़े विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया. दोनों राज्यों के बॉर्डर पर सोमवार को देखते ही देखते हिंसा ने इतना भयावह रूप ले लिया कि पत्थरबाजी, गोलाबारी तक की नौबत आ गई और असम पुलिस के पांच जवान शहीद हो गए. अभी भी इस इलाके में पूरी तरह से शांति नहीं स्थापित नहीं हो पाई है, ऐसे में CRPF को तैनात किया गया है.

असम और मिजोरम के बीच सीमा को लेकर ये विवाद कोई नया नहीं है, हाल ही के वक्त में ये विवाद एक बार फिर उठकर सामने आया है. जब असम की ओर से सीमा पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया था. वरना ये विवाद करीब सौ साल पुराना है. इसको लेकर जुड़ा पूरा विवाद आप समझ सकते हैं...

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असम और मिजोरम के झगड़े की असली वजह?

देश के आज़ाद होने के बाद अगर पूर्वोत्तर के नक्शे पर नज़र डालें तो असम सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था. और तब असम के भीतर ही मिजोरम, एज़वाल जिले के रूप में स्थापित था. एक लंबी लड़ाई के बाद मिजोरम को पहले केंद्र शासित प्रदेश और फिर अलग राज्य का दर्जा दिया गया था. लेकिन इसके बाद असम और मिजोरम में सीमा का जो बंटवारा हुआ, उसको लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद गहराता रहा है. 

इसकी असली वजह ये है कि सीमाओं पर पूरी तरह से जंगली इलाका है, ऐसे में भले ही नक्शे पर दो राज्य आसानी से बंटते दिखते हो लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है. असम के कछार और हाइलाकांडी ज़िलों से मिज़ोरम की सीमा लगती है. असम के कछार, हैलाकांडी और करीमगंज जिले की सीमा मिजोरम के कोलासिब, आईज़ॉल और मामित से लगती हुई निकलती है. 


यहां जंगली इलाका होने के कारण स्थानीय लोगों में किसी पक्की लकीर को लेकर संघर्ष होता रहा है, जो बीच-बीच में बड़ी हिंसा का रूप ले लेता है. यही कारण है कि दोनों ओर से इन इलाकों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाती है, ताकि बॉर्डर पार कर कोई अतिक्रमण ना कर ले. दरअसल, सीमा पर मौजूद जंगली हिस्से में मिजोरम 509 वर्ग मील के आरक्षित वन क्षेत्र को अपना मानता है, जबकि असम द्वारा 1933 के संवैधानिक नक्शे पर ज़ोर देता है.

असम और मिजोरम सीमा का ये विवाद अंग्रेज़ों के ज़माने का है. जब 1875 में निकाले गए एक नोटिफिकेशन में काछर को पहाड़ी इलाके से अलग किया गया था, इसके बाद 1933 में एक नक्शा जारी किया गया जिसके अनुसार असम चलता है. लेकिन मिजोरम अभी भी 1875 के नोटिफिकेशन के अनुसार चीज़ों को आगे बढ़ाना चाहता है. 

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हाल ही में कैसे भड़का इतना विवाद?

अगर ताजा विवाद को समझें तो असम की ओर से लगातार सीमा पर अतिक्रमण को हटाने की कोशिश की जा रही थी. इसी बीच इस सीमा पर मिजोरम हिस्से के लोगों ने अतिक्रमण किया था, जिसे हटवाने को लेकर असम की ओर से एक टीम भेजी गई थी. इसी विवाद को लेकर विवाद गहराता गया और देखती ही देखते एक तीखी बहस ने पत्थरबाजी और फिर गोलीबारी का रूप ले लिया. 

असम और मिजोरम के बीच ये विवाद तब हुआ जब हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर का दौरा किया था. पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों के साथ अमित शाह ने मीटिंग की थी, जिसमें असम-मिजोरम का ये विवाद भी सामने आया था. अब हिंसा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने दोनों राज्यों से शांति बनाए रखने की अपील की है. 

इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में काछर जिले के लैलापुर गांव के लोगों का विवाद मिजोरम के एक गांव से हुआ था, जो सीमा पर ही है. इसके अलावा असम के करीमगंज और मामित से जुड़े लोगों के बीच भी अक्टूबर में हिंसा हुई थी. तब मिजोरम की सीमा में झोपड़ी को जला दिया गया था, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर हिंसा भड़क गई थी. 

 

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