आजतक रेडियो' के मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट 'आज का दिन' में आज हम बात करेंगे यूपी चुनाव में खुद को किंगमेकर समझ रहे चंद्रशेखर की. चर्चा होगी कि कहीं वो ऐसा समझकर कोई बड़ी भूल तो नहीं कर रहे? चर्चा इस बात पर होगी कि आपराधिक मामलों में लिप्त सांसद विधायकों की जानकारी 48 घंटे के भीतर देने के कोर्ट के निर्देश से क्या बदल जाएगा? बात YSRCP और BJP के साथ आने पर कहां पेंच फंस रहा है, इस पर भी होगी. इसके अलावा आने वाले समय में भारत के कौन से शहर डूब सकते हैं? इस पर भी चर्चा करेंगे.
आजतक रेडियो पर हम रोज़ लाते हैं देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियां और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं.
1. क्या चंद्रशेखर यूपी में चुनौती दे पाएंगे?
दलित समाज के युवा नेता के तौर पर उभर रहे भीम आर्मी प्रमुख चन्द्रशेखर आज़ाद रावण भी उत्तर प्रदेश में मिशन 2022 के लिए कमर कस चुके हैं. उनकी आज़ाद समाज पार्टी विधानसभा चुनाव लड़ेगी और इसके लिए तैयारियां लगातार चल रही हैं. चंद्रशेखर दलित बाहुल्य इलाकों का दौरा भी कर रहे हैं. हांलाकि चन्द्रशेखर पश्चिमी यूपी में काफी सक्रिय रहे हैं और इस इलाके की राजनीति में उनका सियासी प्रभाव भी अच्छा खासा है. ऐसे में अब उनका पूरे यूपी की तरफ रुख करना काफी इंट्रेरस्टिंग साबित होगा.
लेकिन यूपी की सियासी पिच इतनी कठिन है कि यहां पर बल्लेबाजी करने के लिए किसी भी राजनीतिक दल को सहारे की ही जरूरत पड़ती है. चन्द्रशेखर भी ये बात भली भांति जानते हैं. सियासी हक़ की चाह रखने वाले चन्द्रशेखर गठबंधन से इनकार तो नहीं कर रहे लेकिन उन्होंने कहा है कि पार्टियों को साथ आना है तो बड़ा दिल दिखाना होगा. और ये भी कहा है कि जिसकी सरकार बनेगी हमारी वजह से बनेगी, जिसकी नहीं बनेगी हमारी वजह से नहीं बनेगी.
तो अब यूपी में सियासी सफलता दलित वोटों पर बहुत हद तक निर्भर है ये तो सभी जानते हैं. मायावती ही सूबे की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. लेकिन चन्द्रशेखर के खुद के मजबूती से चुनाव लड़ने और निर्णायक भूमिका में रहने वाले दावे में कितना दम है? क्या वे पहले से मौजूद राजनीतिक प्रतिद्वंदियों और यूपी की सियासत के मंझे खिलाड़ियों के लिए चुनौती खड़ी कर पाएंगे?
2. SC के फैसले से राजनीति का अपराधीकरण कम होगा?
बहुत पहले ये बात कही गई थी कि राजनीति का अपराधीकरण और अपराधियों का राजनीतिकरण, दोनों एक समाज और लोकतंत्र के लिए घातक हैं लेकिन आंकड़े इस बात की ताईद करते हैं कि समय के साथ हमारे यहाँ राजनीति में अपराधियों की दखल और बतौर जनप्रतिनिधि उनकी भागीदारी बढ़ती चली गयी, विधायक, सांसद जो समाज को रिप्रेजेंट करते हैं और उनके लिए अहम पॉलिसीज बनाते हैं अगर वे ही आपराधिक मामलों में लिप्त रहते हैं तो यह बड़ा परेशानी का सबब होता है.
भारत में राजनीति का अपराधिकरण एक बहुत बड़ी समस्या है, सुप्रीम कोर्ट ने बीते सालों में इस स्थिति में सुधार लाने के लिए कई निर्देश दिए हैं, लेकिन यह समस्या जस की तस है. ऐसा ही कुछ हमें 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला, जहां चुनाव में उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को कोर्ट के आदेश के मुताबिक पालन नहीं किया गया, इस पर याचिका लगी और कल इस पर आदेश देते हुए कोर्ट ने बीजेपी और कांग्रेस समेत नौ राजनीतिक दलों पर ऐसे उम्मीदवारों के बारे में पूरी जानकारी सार्वजनिक ना करने पर जुर्माना लगाया.
बहरहाल कल ले कोर्ट के इस निर्देश के बहाने हमने बात की गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के कोफाउंडर जगदीप छोकर से, एडीआर चुनाव सुधार के ही सम्बन्ध में काम करती है, हमने जगदीप जी से यही पूछा कि कोर्ट का ये जो फैसला है कि राजनीतिक पार्टियों को उम्मीदवारों के एलान के 48 घंटे के भीतर मुकदमों की जानकारी जारी करनी होगी। इस फैसले को किस तरह देखा जाना चाहिए? और सांसदों-विधायकों के ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला अगर है तो वह संबंधित हाईकोर्ट की मंजूरी के बगै़र वापस नहीं लिया जा सकेगा, इस बात को क्यों कोर्ट को रेखांकित करना पड़ा?
3. YSRCP और BJP के बीच कहां फंस रहा पेंच?
पिछले महीने जब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, तो भाजपा, बिहार के अपने अलाई जनता दल यूनाइटेड को कैबिनेट में शामिल करने में कामयाब रही, लेकिन इसी के साथ पार्टी ने अपने कुछ सहयोगियों को समय के साथ खोया भी है, चाहें वो शिवसेना हो या फिर शिरोमणी अकाली दल. ऐसे में, कल एक ख़बर आई कि पिछले कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने दक्षिण की प्रमुख पॉलिटिकल पार्टी, जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) को साथ लाने का प्रयास किया था लेकिन बात नहीं बन सकी, कहा जा रहा है कि अंतिम समय में YSRCP ने रुख बदल लिया और ये चाह धरा रह गया.
कहा तो यहां तक गया कि भाजपा ने न सिर्फ अब बल्कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भी आंध्रप्रदेश के इस रीजनल पार्टी को साधने का प्रयास किया था, अब तक जगनमोहन रेड्डी का रुख ये रहता है कि वे केंद्र के प्रति मित्रवत बने तो रहते हैं लेकिन एनडीए में शामिल नहीं, सिर्फ़ इश्यू बेस्ड सपोर्ट देते रहे हैं और आगे भी उनकी यही चाह है लेकिन आख़िर इस तरह का रूख रखने वाली एक क्षेत्रीय पार्टी के साथ भाजपा गठबंधन करने को इतनी आतुर क्यों है? और इसमें वायएसरसीपी की क्या इच्छा है?
4. भारत के कौनसे शहर डूब सकते हैं?
समय के साथ- साथ इंसान जितनी ज़्यादा तरक्की कर रहा है उतनी ही ज़्यादा अपने लिए परेशानियां भी खड़ी कर रहा है. दिन- प्रतिदिन प्रकृति के लिए भी परेशानियां बढ़ती जा रहीं हैं. और जिसको लेकर वैज्ञानिक कई तरह के रिपोर्ट भी ज़ारी कर रहे हैं. जिससे ये मुश्किलें उजागर भी हो रही हैं.
अभी हाल ही में आईपीसीसी ने दुनिया भर में पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर एक रिपोर्ट दी है. और नासा ने उस रिपोर्ट के आधार पर सी लेवल प्रोजेक्शन टूल बनाया है, ये एक कंप्यूटर मॉडल है. इससे ये पता चला है कि एशिया के चारों ओर समुद्र का लेवल , एवरेज ग्लोबल रेट की तुलना में तेज रफ़्तार से बढ़ रहा है.
सबसे ज़्यादा खतरा कोस्टल सिटीज को है. और भारत के 12 तटीय शहरों के जलमग्न होने के आसार हैं, ऐसे में, आईपीसीसी की जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार कोस्टल सिटीज़ ही क्यों सबसे अधिक संवेदनशील / वल्नरेबल है? और भारत के कौन- कौन से ऐसे शहर हैं जिनके पानी में डूब जाने के आसार हैं?