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आज का दिन: आर्यन खान की मुश्किलों पर फुलस्टॉप नहीं, चीन के खिलाफ बनेगा एक और 'क्वॉड'

अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की मुश्किलों पर फुलस्टॉप नहीं लग पा रहा. ड्रग्स केस में फंसे आर्यन खान की जमानत याचिका को कोर्ट बार-बार खारिज़ कर रहा है. आर्यन के लिए जेल से निकलने का इंतजार लम्बा होता जा रहा है वो 10 से ज्यादा दिन जेल में काट चुके हैं.

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आर्यन खान (फाइल फोटो) आर्यन खान (फाइल फोटो)

अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की मुश्किलों पर फुलस्टॉप नहीं लग पा रहा. ड्रग्स केस में फंसे आर्यन खान की जमानत याचिका को कोर्ट बार-बार खारिज़ कर रहा है. आर्यन के लिए जेल से निकलने का इंतजार लम्बा होता जा रहा है वो 10 से ज्यादा दिन जेल में काट चुके हैं.

कल क्रूज़ ड्रग्स केस को लेकर हुई सुनवाई में जज ने किसी भी पक्ष की दलील नहीं सुनी और डायरेक्टली अपना फैसला सुना दिया, जिसमें आर्यन खान की बेल याचिका को खारिज़ कर दिया गया. इसके बाद आर्यन को फिलहाल आर्थर  रोड जेल में ही रहना पड़ेगा. उनका केस लड़ रहे वकील अब बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर रुख करने जा रहे हैं. पर सवाल यही है कि आर्यन खान के केस में इतनी खींचतान क्यों हो रही है?

कल अदालत की सुनवाई के दौरान क्या हुआ, किस आधार पर जमानत याचिका को खारिज़ किया गया और इस पूरे मामले को लेकर आर्यन के वकील ने क्या दलील दी? आर्यन के केस में कंप्लीकेशन्स क्यों हैं? उन्हें ज़मानत के लिए इतने पापड़ क्यों बेलने पड़ रहे हैं?

एक ग्रुप के बारे में आपने कई बार सुना होगा खासकर भारत-चीन संबंधों में तनाव के बाद, इसके रेलेवेन्स को लेकर खूब बातें होती हैं. नाम है इसका - क्वॉड. क्वॉड, दरअसल - अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत, इन चार देशों का एक समूह है, लेकिन कमोबेश अब इसी के तर्ज़ पर एक नया संगठन गढ़ने की क़वायद हुई है और ये कवायद शुरू हुई इजरायल से, जहां के दौरे पर हमारे विदेश मंत्री एस. जयशंकर थे. तो इस नए संगठन को लेकर अमेरिका, इजरायल, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक सहमति बनी है जहां वे आर्थिक और राजनीतिक लेवल पर कोऑपरेशन बढ़ाने की ओर आगे बढ़े हैं.

अमेरिका इसके ज़रिए पश्चिमी एशिया को मथने की चाह रखता है तो दूसरे देशों के अपने इंटरेस्ट हैं. साथ ही, कहा गया है कि इस नए क्वॉड का मक़सद गवर्मेन्ट टू गवर्नमेंट इंटरेक्शन के बजाय बिजनेस टू बिजनेस पर फ़ोकस करना होगा, तो इस एक नए क्वॉड में भारत और अमेरिका का, इजराइल और यूएई को साथ लेकर चलना, क्या ये चाहत अचानक हो गई और कौन से एरियाज हैं जहां इन देशों के साझा हित हैं? और क्या इस टाईअप के कुछ ख़तरे भी हैं?

सियासत और सियासत करने वाले ऊंट की ही तरह कब किस करवट बैठें कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता. यूपी राजनीति का भी एक ऐसा ही ऊंट यानी चेहरा हैं ओमप्रकाश राजभर , कुछ वक्त पहले बीजेपी सरकार में मंत्री थे. फिर इस्तीफा दे दिया. चुनाव करीब आए तो ओवैसी से मुलाकात की, लगा कि उनके साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ेंगे , फिर अखिलेश यादव से भी मुलाकात की.

उसी मुलाकात के बाद फिर बीजेपी की तरफ झुकाव दिखने लगा और अब फिर से सपा की ओर जाते दिख रहे हैं. कल अखिलेश के साथ मुलाकात के बाद राजभर ने सपा से  गठबंधन की इच्छा जताते हुए ये भी कहा कि कि हमारा मोर्चा पूर्वांचल में काफी ताक़तवर है, ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी और हमारा साथ बनता है तो पूर्वांचल में भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाएगा.

ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अन्य हिस्सों में भी इस गठबंधन से काफी लाभ होगा. तो अब सवाल ये है कि अगर ओमप्रकाश राजभर सपा के साथ आते हैं तो वो गठबंधन कितना प्रभावी हो सकता है उत्तरप्रदेश की राजनीति में और सपा ने इसको लेकर क्या संकेत दिए हैं? यूपी में उनका राजनीतिक क़द कितना बड़ा है?

इन ख़बरों पर विस्तार से चर्चा के अलावा ताज़ा हेडलाइंस, देश-विदेश के अख़बारों से सुर्खियां और आज के इतिहास की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ

21 अक्टूबर 2021 का 'आज का दिन' सुनने के लिए यहां क्लिक करें.

 

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