सीमा पर हो रही घुसपैठ की घटनाओं को रोकने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. चीन और पाकिस्तान के साथ लगती सीमाओं पर नजर रखने के लिए भारत अपने निगरानी तंत्र को और मजबूत करने जा रहा है. मेक इन इंडिया को बढ़ावा देते हुए रक्षा बलों के लिए सेना की संयुक्त अधिग्रहण योजना के तहत 97 नए अत्यधिक सक्षम ड्रोन खरीदे जा रहे हैं. वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने इंडिया टुडे को इस बारे में जानकारी दी.
सूत्रों ने बताया कि कार्यक्रम की लागत 10,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है. इस प्रस्ताव को निकट भविष्य में रक्षा मंत्रालय द्वारा मंजूरी के दिए जाने की उम्मीद है. इन ड्रोन से भारत को पाकिस्तान और चीन के साथ सीमाओं पर अपनी सभी मध्यम और लंबी दूरी की निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी.
सूत्रों ने बताया कि अमेरिका से 31 प्रीडेटर ड्रोन खरीदने के फैसले के बाद भारत अब 'मेक-इन-इंडिया' प्रोजेक्ट के तहत 97 बेहद सक्षम ड्रोन खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इस अधिग्रहण में ट्रेड एजेंसी भारतीय वायु सेना होगी जिसे इन 97 ड्रोनों में से 40 से अधिक मिलेंगे.
रक्षा बलों ने मिलने वाले ड्रोनों की संख्या निर्धारित करने के लिए एक वैज्ञानिक विश्लेषण किया है और यह सशस्त्र बलों की क्षमता के साथ-साथ रक्षा में मेक इन इंडिया योजना के लिए बड़ी सफलता साबित होगी. प्रीडेटर ड्रोन हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस श्रेणी में होंगे जबकि ये ड्रोन मध्यम ऊंचाई वाले लॉन्ग एंड्योरेंस श्रेणी में हैं. इन दो प्रकार के ड्रोनों के अधिग्रहण से भारत को पाकिस्तान और चीन के साथ सीमाओं पर अपनी सभी मध्यम और लंबी दूरी की निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी.