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'राजनीतिक दलों की 69 प्रतिशत आय अज्ञात स्रोतों से', केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

राजनीतिक दलों की 69 प्रतिशत आय का स्रोत ज्ञात नहीं है. चुनावी बॉन्ड से राजनीतिक दलों को फंडिंग की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने इस बात की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दी.

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सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती दी गई है
सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता को चुनौती दी गई है

राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है. दरअसल इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये मिलने वाला चंदा अज्ञात स्रोत में गिना जाता है यानी चंदा देने वाले की डिटेल्स सार्वजनिक नहीं होती है. रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वित्त वर्ष 2004-05 से 2014-15 के बीच 11 वर्षों के दौरान राजनीतिक दलों की कुल आय का 69%  हिस्सा अज्ञात स्रोतों से आया था. 

क्या कहती है एडीआर की रिपोर्ट 

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में चुनावी बॉन्ड योजना लाए जाने से पहले वर्ष 2004-05 और 2014-15 के दौरान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के फंडिंग स्रोतों का विश्लेषण किया गया था. सॉलिसिटर जनरल ने उक्त एडीआर रिपोर्ट की मुख्य बातों को अदालत के समक्ष रेखांकित किया जिसमें कहा गया था कि इस समय अवधि के दौरान राष्ट्रीय दलों को अज्ञात स्रोतों से 6,612.42 करोड़ रुपये और क्षेत्रीय दलों को 1220.56 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी.

पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई योगदान रिपोर्ट से उपलब्ध दानदाताओं के विवरण के आधार पर इस रिपोर्ट में आय विवरण दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, अज्ञात स्रोत आईटी रिटर्न में घोषित आय हैं, लेकिन 20,000 रुपये से कम के दान के लिए आय का स्रोत नहीं बताया गया है. ऐसे स्वैच्छिक योगदान के दाताओं का विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है.

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 20 हजार से कम का चंदा अज्ञात स्त्रोत

एसजी तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष एक उदाहरण के माध्यम से विस्तार से बताया कि अज्ञात स्रोत क्या हैं. उन्होंने बताया कि 20,000 से कम का चंदा राजनीतिक दल कई दानदाताओं से ले सकते हैं, जो 'अज्ञात स्रोतों' के अंतर्गत आएगा. राजनीतिक दलों को एक बार में 20000 से कम का योगदान देने वाले दानदाताओं की पहचान सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं है.

सॉलिसिटर जनरल (SG) ने कहा,'हर राजनीतिक दल को वैध पैसे की भी आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें रैलियों आदि के लिए खर्च दिखाना होता है. वे ऐसा कैसे करते हैं? एक राजनीतिक दल के रूप में मैंने 100 करोड़ रुपये जमा किये हैं और कहा है कि इतने सारे लोगों ने मुझे 19000 रुपये दिए हैं, यदि यह 20000 से कम है तो मुझे उनकी पहचान का खुलासा नहीं करना चाहिए. इसलिए जो नकदी मुझे प्राप्त होती है उसे मैं अज्ञात स्रोतों के रूप में दिखाता हूं. लोगों से प्राप्त पैसा जिन्होंने कथित तौर पर मुझे 19000 दिए हैं तो इसके लिए कानून के तहत किसी रिकॉर्ड की आवश्यकता नहीं है. यह राशि 69% है.' 

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एसजी तुषार मेहता ने जताई ये चिंता

एसजी ने योजना रद्द होने पर संभावित परिणामों के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करने के लिए एडीआर रिपोर्ट का संदर्भ दिया. रिपोर्ट में पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई योगदान रिपोर्ट से उपलब्ध दानदाताओं के विवरण के आधार पर आय विवरण प्रदान किया गया है. 

एसजी मेहता ने कहा कि योजना में हस्तक्षेप करने से इस क्षेत्र में हुई प्रगति को झटका लग सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना लाने से पहले राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये से कम देने वाले व्यक्तियों या संगठनों का नाम उजागर करने की आवश्यकता नहीं है. परिणामस्वरूप, दो-तिहाई से अधिक धनराशि का पता नहीं लगाया जा सकता है और यह 'अज्ञात' स्रोतों से आती है.

अज्ञात स्रोतों से राजनीतिक दलों की आय

केंद्र ने बताया है कि एडीआर रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2004-05 और 2014-15 के बीच 11 वर्षों के दौरान अज्ञात स्रोतों से राजनीतिक दलों की कुल आय इस प्रकार थी:

- कांग्रेस की कुल आय 3,323. 39 करोड़ रुपये का 83% 

- भाजपा की कुल आय 2,125.91 करोड़ रुपये का 65% 

- एसपी की कुल आय 766.27 करोड़ रुपये का 94%

- शिरोमणि अकाली दल की कुल आय 88.06 करोड़ रुपये का 86% चंदा अज्ञात स्त्रोतों से आया. 

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2004-05 से 2014-15 के दौरान अज्ञात स्रोतों से आय में वृद्धि हुई है. राष्ट्रीय दलों की अज्ञात स्रोतों से आय 313% बढ़ गई है. यह आय वित्त वर्ष 2004-05 के दौरान 274.13 करोड़ रुपये थी जो वित्त वर्ष 2014-15 में बढ़कर 1130.92 करोड़ रुपये हो गई. क्षेत्रीय दलों की अज्ञात स्रोतों से आय में 652 फीसदी बढ़ी है यह आय वित्त वर्ष 2004-05 के दौरान 37.393 करोड़ रुपये थी जो वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान 281.01 करोड़ रुपये हो गई.

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों में मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने 2004-05 और 2014-15 के बीच 20,000 रुपये से अधिक का शून्य योगदान पाने की घोषणा की है, जिसका अर्थ है कि पार्टी का 100% चंदा अज्ञात स्रोतों से आया है. 

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