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भारत के लिए उग्रवादियों और चीन से लिया है लोहा... ऐसी है Bhutan की सेना

Royal Bhutan Army Strength
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भारत के उत्तर-पूर्वी दिशा में मौजूद 38, 394 वर्ग किलोमीटर का छोटा सा पड़ोसी देश भूटान. यह केरल से थोड़ा ही छोटा है. इस खूबसूरत हिमालयी देश की कुल आबादी भी लगभग 7.27 लाख है. भूटान की सेना का नाम है रॉयल भूटान आर्मी (Royal Bhutan Army - RBA). इसकी स्थापना 64 साल पहले 1958 में की गई थी. इसका मुख्यालय भूटान की राजधानी थिंपू के लुंगतेनफू (Lungtenphu) में है. 

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भूटान के महाराज जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक इस सेना के सुप्रीम कमांडर इन चीफ है. जबकि, सेना प्रमुख बाटू शेरिंग हैं. यहां की सेना में भर्ती होने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 साल है. लोग स्वेच्छा से भर्ती होने जाते हैं. इस समय रॉयल भूटान आर्मी में 5 हजार जवान हैं. जो देश की अलग-अलग सीमाओं पर तैनात है. 

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इनके अलावा रॉयल बॉडीगार्ड्स (RBG) हैं, जो राजा और उनके शाही परिवार की सुरक्षा करते हैं. भूटान में लोग अपने मन से परिवार के एक बच्चे को सेना में भेजते हैं. इसके अलावा लोग रॉयल भूटान पुलिस की मदद के लिए भी खुद से आगे आते हैं. पुलिस ज्वाइन करके लॉ एंड ऑर्डर को संतुलित करते हैं. 

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भारत के साथ अच्छे संबंध होने की वजह से भूटान की सेना को ट्रेनिंग और हथियारों से मदद मिलती रहती है. चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने 1950 में तिब्बत पर अपना कब्जा बढ़ाना शुरु किया. तब भारत ने तिब्बत में रॉयल भूटान आर्मी की शुरुआत करने में मदद की. फिर 1958 में शाही सरकार ने 2500 सैनिकों की एक फौज तैयार की. 
 

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1968 में रॉयल भूटान आर्मी में 4850 जवान आ चुके थे. 1990 में ये बढ़कर 6000 हो गए. लेकिन बाद में इसकी संख्या को धीरे-धीरे कम किया गया. इसके सैनिक संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में दूसरे देशों में भी जाते हैं. भारतीय सेना ने भूटानी सेना की ट्रेनिंग के लिए इंडियन मिलिट्री ट्रेनिंग टीम (IMTRAT) बनाया. यहीं पर RBA और RBG की ट्रेनिंग होती है. इसके अलावा पुणे स्थित एनडीए और देहरादून स्थित आईएमए में भी भूटानी सेना के जवानों को ट्रेनिंग दी जाती है. 

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RBA भारत के पूर्वी एयर कमांड पर निर्भर है. भारतीय वायुसेना भूटान की हर संभव मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है. साल 2003 में जब ULFA के खिलाफ RBA ने ऑपरेशन ऑल क्लियर चलाया था, तो कुछ जवान भूटान के भी घायल हो गए. उनकी मदद करने भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर गए थे. 

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RBA ने 27 दिसंबर 2003 को आतंकियों के 30 कैंपों पर एकसाथ हमला बोला था. जहां से भूटानी सेना को 500 से ज्यादा एके-47 राइफल्स मिली थीं. 3 जनवरी 2004 तक 485 उल्फा, एनडीएफबी और केएलओ के उग्रवादी मारे गए या पकड़े गए थे. भूटानी सेना ने बाद में उग्रवादियों और हथियारों को भारतीय सेना को सौंप दिया था. इस संघर्ष में 11 भूटानी सैनिक शहीद हो गए और 35 जवान घायल हो गए थे. 

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RBA के जवान ब्राउनिंग हाई पावर पिस्टल का उपयोग करते हैं. इसके अलावा उनके पास INSAS, AK-104, AK-101, Type-56, Heckler & Koch G3, FN FAL, L1A1 और M16A2 राइफल्स का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा इनके पास 81 मिलिमीटर मोर्टार हैं. बीटीआर-60 और फर्स्ट विन आर्मर्ड व्हीकल हैं. सेना के परिवहन के लिए एमआई हेलिकॉप्टर्स हैं. 

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RBA ने अपना कैंप डोकलाम के पास बना रखा है, ताकि चीन की तरफ से किसी भी तरह की हरकत न होने पाए. यहां पर रॉयल भूटान आर्मी भारतीय सेना का साथ देती है. (सभी फोटोः रॉयल भूटान आर्मी/फेसबुक/एएफपी)