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उंगली दबी और दुश्मन साफ... इन 7 खतरनाक स्नाइपर राइफलों का इस्तेमाल करती है Indian Military

indian military sniper rifles
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भारतीय सेना के जवानों और स्पेशल फोर्सेस के कमांडोंज ने कई बार आतंकियों, घुसपैठियों और दुश्मनों को दूर से ही गोली मारकर खत्म किया है. चाहे वह सीमा पर चल रहा युद्ध हो, सर्जिकल स्ट्राइक हो, शहर के अंदर होस्टेज सिचुएशन हो या फिर जंगल वॉरफेयर हो. हर जगह स्नाइपर राइफलों का उपयोग बखूबी होता आया है. आज हम आपको बताएंगे भारतीय सेना की बेहतरीन स्नाइपर राइफलों के बारे में...

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ड्रगनोव एसवीडी (Drugunov SVD)

भारतीय सेना में इसे डेसिगनेटेड मार्क्समैन राइफल (DMR) कहते हैं. इसका जन्म सोवियत यूनियन में हुआ था. 1963 से लगातार यह कई देशों की सेनाओं में सर्विस दे रही है. इसके डिजाइनर येवजेनी ड्रगनोव थे. फिलहाल इसका उत्पादन कलाश्निकोव कंसर्न नॉर्निको कंपनी करती है. भारतीय सेना में मौजूद ड्रगनोव एसवीडी का वजन 4.68 किलोग्राम है. बैरल यानी नली की लंबाई 620 मिलीमीटर होती है. यह 7.62x54mmR कार्टिरेज वाली सेमी-ऑटोमैटिक राइफल है. 

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ड्रगनोव एसवीडी में 10 और 20 राउंड की डिटैचेबल मैगजीन लगती है. इससे चली गोली 830 मीटर प्रति सेकेंड की गति से जाती है. इसमें आप टेलिस्कोपिक साइट, नाइट विजन साइट, आयरन साइट और रीयर नॉच साइट लगा सकते हैं. इसकी रेंज 1200 मीटर है. अगर हवा की गति, ह्यूमेडिटी और तापमान साथ दे तो निशाना और दूर तक लगाया जा सकता है. उपयोग के अनुसार यह राइफल अलग-अलग एसेसरीज से जोड़ी जा सकती है. यह दुनिया की सबसे भरोसेमंद स्नाइपर राइफलों में से एक है. इसका उपयोग दुनिया के करीब 47 देश कर रहे हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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आईएमआई गलिल 7.62 स्नाइपर (IMI Galil 7.62 Sniper)

भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेस इस खतरनाक स्नाइपर राइफल का उपयोग करते हैं. यह इजरायल में बनी है. 1972 से अब तक लगातार उपयोग में है. 15 से ज्यादा युद्धों में इसे इस्तेमाल किया जा चुका है. 51 देश इसका उपयोग कर रहे हैं. भारत में इसका निर्माण पुंज लॉयड रक्षा सिस्टम्स कंपनी करती है. इसके सात वैरिएंट्स है, जिनका वजन 3.75 से 6.4 किलोग्राम तक है. इसकी लंबाई 850 मिमी से लेकर 1112 मिलिमीटर तक लंबी होती है. बैरल 332 मिमी से लेकर 508 मिमी तक लंबी होती है. 

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इसके तीन तरह की गोलियां लगती हैं- 5.56x45 mm NATO, 7.62x51mm NATO और .30 कार्बाइन (मगल वैरिएंट). इसकी फायरिंग रेट 650 से 750 राउंड्स प्रति मिनट है. गोलियां 815 मीटर प्रति सेकेंड से लेकर 950 मीटर प्रति सेकेंड की गति से चलती हैं. इसकी फायरिंग रेंज 300 से 500 मीटर है. इसके अलग-अलग वैरिएंट्स में 15 से लेकर 65 राउंड तक की मैगजीन लगती हैं. इस पर आप फ्लिप-अब रीयर अपर्चर, प्रोटेक्टिव ईयर, फ्लिप अप ट्राईटियम नाइट साइट्स और हुडेड फ्रंट पोस्ट लगा सकते हैं. 

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हेकलर एंड कोच पीएसजी1 (Heckler & Koch PSG1)

इंडियन आर्मी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली स्टैंडर्ड सेमी-ऑटोमैटिक स्नाइपर राइफल है. इसका निर्माण पश्चिमी जर्मनी में हुआ था. यह 1972 से अब तक दुनिया के कई देशों द्वारा उपयोग में लाई जा रही है. इसके तीन वैरिएंट्स मौजूद हैं. 7.2 किलोग्राम वजनी इस स्नाइपर राइफल की लंबाई 48.5 इंच है. बैरल की लंबाई 25.6 इंच होती है. इसमें 7.62x51mm NATO कार्टिरेज लगता है. 

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इसकी गोलियां 868 मीटर प्रति सेकेंड की गति से निकलती है. इसकी रेंज 1000 मीटर है. यानी एक किलोमीटर दूर से दुश्मन के सिर पर आप सीधा निशाना लगा सकते हैं. इसमें 5, 10, 20 राउंड के डिटैचेबल बॉक्स मैगजीन और 50 राउंड की ड्रम मैगजीन लग जाती है. भारत में इसका उपयोग NSG, MARCOS, Indian Army, OCTOPUS और Greyhounds जैसी घातक टुकड़ी करती है. 

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माउजर एसपी 66 (Mauser SP 66)

जर्मनी में बनी यह स्नाइपर राइफल एक स्टैंडर्ड बोल्ट एक्शन राइफल है. इसका उपयोग दुनिया के लगभग सभी देशों में होता है. इसका डिजाइन वॉल्टर गेहमन ने किया था. जिसे माउजर कंपनी ने खरीद लिया था. 1965 से इसका उत्पादन हो रहा है, जिसे बाद में अपग्रेड करके माउजर 86 एसआर नाम दिया गया. यह असल में शीत युद्ध के समय की राइफल है. 

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इसमें तीन राउंड की इंटर्नल मैगजीन लगती थी. जिसमें 7.62x51mm NATO कार्टिरेज होती थी. कहते हैं इसकी सटीकता की वजह से इसे पूरी दुनिया में पसंद किया जाता था. इसकी रेंज 800 मीटर थी. कई यूरोपीय देशों की पुलिस इसका उपयोग आज भी करती हैं. हालांकि कई कस्टमर अब नए राइफल्स की ओर चले गए हैं, लेकिन यह राइफल देखने को मिल जाती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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सिग सॉर एसएसजी 3000 (SIG Sauer SSG 3000)

जर्मनी में बनी स्टैंडर्ड बोल्ट एक्शन स्नाइपर राइफल जिसका उपयोग 1992 से अब तक हो रहा है. इसका उपयोग पेट्रोलिंग, टारगेट और सुपर टारगेट के लिए किया जाता है. 5.44 किलोग्राम वजनी यह राइफल 46.5 इंच लंबी है. इसके बैरल की लंबाई 23.6 इंच है. इसमें 7.62x51mm NATO लगती है. गोलियां 830 मीटर प्रति सेकेंड की गति से टारगेट की तरफ बढ़ती हैं. इसकी फायरिंग रेंज 900 मीटर है. इसमें 5 राउंड इंटर्नल डिटैचेबल मैगजीन लगती है. इसका उपयोग दुनिया के 16 देश कर रहे हैं. 

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साको टीआरजी 42 (Sako TRG 42)

फिनलैंड में बनी इस स्नाइपर राइफल को आपने कई फिल्मों में देखा होगा. यह साल 2000 से लगातार उपयोग में है. इसके सात वैरिएंट्स मौजूद हैं, जिनका वजन 4.7 किलोग्राम से लेकर 5.8 किलोग्राम तक है. लंबाई 39.37 इंच से लेकर 47.24 इंच तक है. बैरल की लंबाई 20.08 इंच से लेकर 27.17 इंच तक है. इस राइफल में पांच तरह के कार्टिरेज लगते हैं. लेकिन भारत में .338 लापुआ मैग्नम कार्टिरेज लगते हैं. 

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इस राइफल की रेंज 800 से 1500 मीटर है. भारतीय सेना की राइफल की रेंज 1500 मीटर यानी डेढ़ किलोमीटर है. इसमें 5 से 10 राउंड की डिटैचेबल बॉक्स मैगजीन लगती है. इसमें अपर्चर रीयर, फ्लिप अप ओपन ट्राइटियम नाइट, कॉम्बैट साइट, डे और नाइट ऑप्टिक्स लगाया जा सकता है. इसका 28 देश उपयोग कर रहे हैं. भारत में इसका उपयोग पैरा स्पेशल फोर्सेस और मिजोरम आर्म्ड पुलिस करती है. 

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बरेटा स्कॉर्पियो टीजीटी (Beretta Scorpio TGT)

इटली में बनी इस स्नाइपर राइफल की लंबाई 45 इंच है. बैरल की लंबाई 29 इंच है. इसका वजन 10.7 किलोग्राम होता है. इसकी अधिकतम फायरिंग रेंज 1800 मीटर यानी 1.8 किलोमीटर है. इसकी गोली 854 मीटर प्रति सेकेंड की गति से निकलती है. इसमें 5 से 8 राउंड डिटैचेबल बॉक्स मैगजीन लगती है.