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Indian Machine Guns: 10 शानदार मशीन गन, हर गोली पर लिखा है देश के एक-एक 'दुश्मन' का नाम

Indian Army Machine Guns
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भारत के पास 10 बेहतरीन मशीन गन (Machine Guns) हैं. जिनका उपयोग भारतीय सेना (Indian Army), भारतीय वायु सेना (Indian Air Force), भारतीय नौसेना (Indian Navy), कोस्टगार्ड, पुलिस कमांडों, अर्द्धसैनिक बलों द्वारा किया जाता है. इन मशीन गन्स की रेंज, गोलियों की ताकत और गति दुश्मन का होश उड़ाने के लिए काफी होता है. जब भी पाकिस्तान सरहद पार से सीजफायर का उल्लंघन करता है, तो इन्ही मशीन गनों से उसे करारा जवाब दिया जाता है. (फोटोः विकिपीडिया)

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इन्सास एलएमजी (INSAS LMG)

इन्सास एलएमजी का उपयोग करगिल युद्द, नेपाली सिविल वॉर, नक्सल और माओवादी विरोधी अभियानों में बहुत हुआ है. इसे भारत में ही बनाया गया है. इसे इंडियन स्माल आर्म्स सिस्टम (INSAS) लाइट मशीन गन (LMG) कहते हैं. भारत के पास ऐसी 9 लाख से ज्यादा बंदूकें हैं. इसकी रेंज 700 मीटर होती है. इसमें दो तरह की मैगजीन लगती है. 20 राउंड की और 30 राउंड की. दो तरह से फायरिंग होती है. सेमी-ऑटो और ऑटोमैटिक मोड में. एक मिनट में 600 से 650 राउंड फायर कर सकती है. गोली की गति 915 मीटर प्रति सेकेंड होती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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मशीन गन 1ए (Machine Gun 1A)

ब्रेन लाइट मशीन गन. इसी मशीन गन से भारतीय सेना के जवानों और कई परमवीर योद्धाओं ने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तानी दुश्मनों की धज्जियां उड़ा दी थीं. इसका उपयोग करगिल युद्ध में भी किया गया था. मैगजीन के साथ इसका वजन 11.3 किलोग्राम होता है. लंबाई 45.5 इंच होता है. इसके बैरल की लंबाई 25 इंच होती है. इसे चलाने के लिए दो लोग लगते हैं. एक गनर और दूसरा असिस्टेंट. यह एक मिनट में 520 राउंड तक फायर करती है. इसकी रेंज 550 मीटर है. गोली की गति 743.7 मीटर प्रति सेकेंड होती है. इसमें 20 राउंड की एसएलआर मगैजीन, 30 राउंड की डिटैचेबल बॉक्स मैगजीन और 100 राउंड की पैन मैगजीन लगती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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एफएन मिनिमी (FN Minimi)

इस मशीन गन के 10 वैरिएंट्स मौजूद हैं. जो 5.32 किलोग्राम से लेकर 8.8 किलोग्राम तक वजनी होती हैं. लंबाई 30.2 इंच से लेकर 40.9 इंच तक होती है. इसकी गोली 925 मीटर प्रति सेकेंड की गति से चलती है. फायरिंग रेंज 300 से 100 मीटर होती है. बेल्ट लगाकर 100 से 200 राउंड फायरिंग की जा सकती है. या 200 राउंड का बॉक्स मैगजीन या 30 राउंड का स्टेनैग मैगजीन लगाई जा सकती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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आईएमआई नेगेव एनजी 5 (IMI Negev NG5)

इजरायल द्वारा बनाई गई दुनिया खतरनाक मशीन गन में से एक. भारत में मौजूद इस मशीन गन का वजन 7.65 किलोग्राम है. इसकी नली की लंबाई 18 इंच होती है. इसमें 5.56x45mm नाटो मैगजीन लगती है. यह गैस ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट तकनीक पर काम करती है. यह एक बार में 850 से 1050 राउंड प्रति मिनट की दर से फायर करती है. इसकी गोलियां 915 मीटर प्रति सेकेंड की गति से दुश्मन की धज्जियां उड़ा सकती है. इस मशीन गन की फायरिंग रेंज 300 से 1000 मीटर होती है. अधिकतम 1200 मीटर तक फायर कर सकती है. इसमें 150 से 200 राउंड की बेल्ट या 35 राउंड की मैगजीन लगाई जा सकती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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आईएमआई नेगेव एनजी7 (IMI Negev NG7)

यह मशीन गन नेगेव एनजी5 का अपग्रेडेड वर्जन है. इसकी लंबाई 20 इंच होती है. इसमें 7.62x51 मिलिमीटर नाटो कार्टिरेज लगती है. यह सेमी-ऑटो या ऑटोमैटिक मोड में चलती है. इसमें 100 से 125 राउंड की ड्रम मैगजीन लगती है. इसका वजन 7.95 किलोग्राम होती है. यह 600 से 750 राउंड प्रति मिनट की दर से फायर करती है. गोली की गति 860 मीटर प्रति सेकेंड होती है. फायरिंग रेंज 300 से 800 मीटर होती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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एफएन मैग (FN MAG)

बेल्जियम में बनी इस मशीन गन का उत्पादन भारत में ही होता है. इसके लिए ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों को लाइसेंस मिला है. इसका वजन 11.8 किलोग्राम है. लंबाई 49.7 इंच होता है. बैरल की लंबाई 24.8 इंच है. इसमें 7.62x51 मिलिमीटर नाटो कार्टिरेज लगती है. इस मशीन गन से अधिकतम 1000 राउंड प्रति मिनट फायर कर सकते हैं. गोली 840 मीटर प्रति सेकेंड की गति से जाती है. फायरिंग रेंज बाइपॉड पर 800 मीटर और ट्राईपॉड पर 1800 मीटर हो जाती है. मौसम सही रहे तो इसकी गोली 3.5 किलोमीटर तक जाती है. इसमें एम13 लिंक्ड बेल्ट लगती है, जिससे गोलियां जाती हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

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एमके-48 मशीन गन (Mk-48 मशीन गन)

इस मशीन गन का उपयोग भारतीय सेना के पैरा-स्पेशल फोर्सेस करते हैं. इसके अलावा भारतीय नौसेना के मार्कोस और वायुसेना के गरुड़ कमांडो करते हैं. यानी दुश्मन के लिए पहले तो इन कमांडो का नाम ही काफी है. ऊपर से इनके हथियार तो और जानलेवा. पैरा-स्पेशल फोर्सेस ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था. मार्कोस ने 26/11 हमले में सबसे पहले रेस्पॉन्ड किया था. इस मशीन गन के तीन वैरिएंट्स हैं. वजन 8.2 से 11.2 किलोग्राम तक होता है. इसकी लंबाई 39.75 इंच और बैरल की लंबाई 19.75 इंच होती है. इसमे स्टेनैग 2310 गोलियां लगती हैं. यह एक मिनट में 710 से 760 गोलियां प्रति मिनट फायर करती है. एरिया टारगेट रेंज 800 मीटर और अधिकतम फायरिंग रेंज 3.6 किलोमीटर है. इसमें गोलियों की बेल्ट लगाई जाती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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पीके मशीन गन (PK Machine Gun)

AK-47 को बनाने वाले मिखाइल कलाश्निकोव ने ही इसे डिजाइन किया है. 1961 से अब तक यह कई देशों की सेनाओं में सर्विस दे रही है. यह 7.7 से 9 किलोग्राम वजनी होती है. लंबाई 47.4 इंच है. बैरल की लंबाई 23.8 इंच होती है. इसमें 7.62x54mm R गोलियां लगाई जाती हैं. यह मशीन गन 650 राउंड प्रति मिनट फायर कर सकती है. गोलियां 825 मीटर प्रति सेकेंड की गति से चलती हैं. फायरिंग रेंज 1 से डेढ़ किलोमीटर होती है. वैसे मौसम साथ दे तो इसके वैरिएंट्स 3.8 से लेकर 4 किलोमीटर तक गोली दाग सकते हैं. इसमें 50 राउंड की बेल्ट या 100, 200 या 250 राउंड का बॉक्स मैगजीन लगता है. (फोटोः विकिपीडिया)

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एनएसवी मशीन गन (NSV Machine Gun)

1971 से अब तक यह दुनिया के कई देशों की सेनाओं में फ्रंट पर सर्विस दे रही है. यह 12.7 कैलिबर की हैवी मशीन गन है. भारत की सीमाओं पर मौजूद बंकरों में इसका उपयोग किया जाता है. ताकि इसकी दहाड़ और मार से दुश्मन की हालत पस्त हो जाए. यह 25 किलोग्राम वजनी होती है. इसकी लंबाई 61.4 इंच होती है. इसमें 12.7x108mm की गोली लगती है. यह एक मिनट में 700 से 800 राउंड फायर कर सकती है. गोलियां 845 मीटर प्रति सेकेंड की गति से जाती है. हवा में यह 1500 मीटर तक मार सकती है. इसके अलावा जमीन पर इसकी रेंज 2000 मीटर है. इसमें 50 राउंड की बेल्ट लगती है. (फोटोः विकिपीडिया)

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एम 2 ब्राउनिंग (M2 Browning)

1993 से अब तक दुनिया के कई देशों में हो रहा है उपयोग. भारत में एम2एचबी (M2HB) वैरिएंट का उपयोग होता है. यानी एम2 हैवी बैरल का यूज किया जा रहा है. इसका वजन 38 किलोग्राम होता है. लंबाई 65.1 इंच होती है. इसी मशीन गन का दूसरा वैरिएंट ब्राउनिंग M1919 का उपयोग KGF2 फिल्म में किया गया है. एम2 ब्राउनिंग मशीन गन के बैरल की लंबाई 45 इंच है. इसमें .50 बीएमजी कार्टिरेज लगती है. जो 450 से 600 राउंड प्रति मिनट फायर करती है. गोली 890 मीटर प्रति सेकेंड की गति से दुश्मन की ओर बढ़ती है. इसकी रेंज बहुत खतरनाक है. यह 1.8 किलोमीटर से लेकर 7.4 किलोमीटर तक फायर कर सकती है. इसमें बेल्ट से गोलियां लगाई जाती हैं. (फोटोः विकिपीडिया)