अदालत के एक हालिया फैसले ने भगवा आतंकवाद के नैरेटिव पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस फैसले में कई निर्दोष व्यक्तियों को 17 साल बाद बरी किया गया है. चर्चा के दौरान यह आरोप लगाया गया कि हिंदू आतंकवाद का आविष्कार एक राजनीतिक दल के मुख्यालय में हुआ था. वक्ताओं ने 2007 के समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, 2008 के मालेगांव ब्लास्ट और 2007 के मक्का मस्जिद ब्लास्ट जैसे मामलों का जिक्र किया.