मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की नेता और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर ने स्वयंभू बाबा अशोक खरात से कथित संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और मानहानिकारक बताया है. मंगलवार को जारी अपने बयान में चाकणकर ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है. उन्होंने आरोप लगाने वालों और मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 28 दिनों से उनके और उनके परिवार के खिलाफ मनगढ़ंत और गैर-जिम्मेदाराना आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य केवल उनकी छवि खराब करना है.
गौरतलब है कि अशोक खरात इस समय पुलिस हिरासत में है और उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी समेत कई मामलों की जांच चल रही है. वहीं, प्रवर्तन निदेशालय भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की जांच कर रहा है और आरोपी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर चुका है. इस विवाद के बीच चाकणकर को पिछले महीने महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जब उनके कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें वह खरात के पैर धोती नजर आ रही थीं.
इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को चाकणकर की बहन से भी पूछताछ की थी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उनकी बहन के बैंक खाते का इस्तेमाल खरात ने किसी संदिग्ध लेन-देन के लिए किया था.
चाकणकर ने एक गुमनाम पत्र को लेकर भी सवाल खड़े किए, जिसे इस पूरे विवाद का आधार बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह पत्र किसने लिखा और यह आरोप लगाने वालों तक कैसे पहुंचा. बिना किसी सत्यापन के इस पत्र को मीडिया में जारी कर पूरे दिन बहस चलाई गई, जो दुर्भावनापूर्ण इरादे को दर्शाता है.
उन्होंने नवनीत कांवट का हवाला देते हुए कहा कि बीड के पुलिस अधीक्षक ने भी स्पष्ट किया है कि बिना नाम और पते वाला कोई भी गुमनाम पत्र कानूनी रूप से मान्य नहीं होता और उसे गंभीरता से नहीं लिया जा सकता.
रूपाली चाकणकर ने दोहराया कि उनका या उनके परिवार का खरात मामले में किसी भी तरह के वित्तीय, जमीन या अन्य कथित गलत काम से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है. उन्होंने विश्वास जताया कि सच्चाई जल्द ही सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा.