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लॉकडाउन की आशंका के बीच मुंबई में पैनिक बाइंग, राशन जुटा रहे हैं लोग

मुंबई में राशन लेने के लिए कतार में खड़े एक व्यक्ति ने कहा कि एसेंशियल सर्विस हमेशा चालू रहती हैं, लेकिन हम सभी जानते हैं कि पिछले साल क्या हुआ था. इसलिए मैं यह सोचकर तनाव में नहीं रहना चाहता कि मेरे परिवार के लिए दाल, चावल मिलेगा या नहीं. इसलिए स्टॉकिंग में कोई बुराई नहीं है. 

मुंबई में राशन की दुकानों के बाहर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं मुंबई में राशन की दुकानों के बाहर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मुंबई में लॉकडाउन के खतरे को देखते हुए राशन की दुकानों के बाहर कतारें
  • लाइन में लगकर घंटों अपनी बारी का इंतजार करने को तैयार हैं लोग

कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच महाराष्ट्र में लॉकडाउन का खतरा बरकरार है. इस बीच मुंबई में राशन की दुकानों के बाहर लम्बी कतारें देखने को मिल रही हैं. लॉकडाउन के खतरे को देखते हुए लोगों ने यहां राशन जुटाना शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि हम ऐसी किसी भी स्थिति में नहीं अटकना चाहते हैं जिसमें हमारे पास राशन की कमी आ जाए. 

राशन लेने पहुंची एक महिला ने आजतक से बातचीत में कहा कि वो अपनी बेटी के साथ राशन लेने आई हैं. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को लेकर असमंजस की स्थिति है, ऐसे में हम नहीं चाहते हैं कि लॉकडाउन के दौरान किसी भी किल्लत का सामना करें. इसीलिए स्टॉक रखकर हम निश्चिंत रहना चाहते हैं.   


वहीं एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उन्हें लगा कि राशन का स्टॉक खत्म हो सकता है. उन्होंने कहा कि एसेंशियल सर्विस हमेशा चालू रहती हैं, लेकिन हम सभी जानते हैं कि पिछले साल क्या हुआ था. इसलिए मैं यह सोचकर तनाव में नहीं रहना चाहता कि मेरे परिवार के लिए दाल, चावल मिलेगा या नहीं. इसलिए स्टॉकिंग में कोई बुराई नहीं है. 

 



लॉकडाउन को लेकर बने संशय के बीच राशन की दुकानों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. जबकि दुकानों के बाहर बोर्ड लगे हैं कि 'हम साप्ताहांत में भी आपकी सेवा में खुले हैं', लेकिन बावजूद उसके लोग बाहर लाइन में लगकर घंटों अपनी बारी का इन्तजार करने को तैयार हैं. 


गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हर दिन पचास हजार से अधिक कोरोना के केस आ रहे हैं. बीते दिन ये आंकड़ा 63 हजार पर पहुंच गया था. ऐसे में राज्य के कई हिस्सों में बेड्स की कमी, टेस्टिंग, वैक्सीनेशन को लेकर दिक्कतें आ रही हैं और हर दिन केस बढ़ते जा रहे हैं.

 

 

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