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कोरोना से लड़ाई में जंग हार गए PSI मोहन दगडे, दूसरी लहर में जान गवाने वाले मुंबई के पहले पुलिस अधिकारी

मोहन दगडे की उम्र 54 वर्ष थी. कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद से वे BKC कोविड-19 सेंटर में भर्ती थे, शुरुआत में उन्हें कोरोना वायरस के कुछ लक्षण थे. लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ था. कल भी उनकी तबीयत और अधिक बिगड़ गई थी और सोमवार की सुबह करीब 3.30 बजे वे कोरोना से लड़ाई हार गए.

मुंबई पुलिस के PSI मोहन दगडे (फाइल फोटो) मुंबई पुलिस के PSI मोहन दगडे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अस्पताल में भर्ती थे मगर स्वास्थ्य में नहीं आया सुधार
  • पहली लहर में बहुत से पुलिसकर्मियों ने गंवाई जान
  • मुंबई में कोरोना अपनी खतरनाक रफ्तार पर

कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश की कमर तोड़ दी है. देश भर में बीते चौबीस घंटे में के अंदर 1.68 लाख नए मामले सामने आए हैं. इनमें सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से आ रहे हैं. महाराष्ट्र में एक पुलिस अधिकारी की मौत भी कोरोना के कारण हो गई है. मुंबई के वाकोला पुलिस थाने के PSI मोहन दगडे ने सोमवार की सुबह कोरोना के कारण दम तोड़ दी है.

मोहन दगडे की उम्र 54 वर्ष थी. कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद से वे BKC कोविड-19 सेंटर में भर्ती थे, उन्हें कोरोना वायरस के कुछ लक्षण भी थे. लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ था. कल उनकी तबीयत और अधिक बिगड़ गई थी लेकिन सोमवार की सुबह करीब 3.30 बजे वे कोरोना से लड़ाई हार गए. इससे पहले कोरोना की पहली लहर में मुंबई के बहुत से पुलिसकर्मी, स्टाफ, अधिकारी मारे गए थे लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में कोरोना के कारण मुंबई के किसी पुलिस अधिकारी की ये पहली मृत्यु है.

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना का प्रसार अत्यधिक तेजी से हो रहा है. बीते दिन ही महाराष्ट्र में 60 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किए गए थे. महाराष्ट्र में इस वक्त 5.65 लाख के करीब एक्टिव मामले मौजूद हैं. राज्य में कोविड बिस्तरों के अलावा वैक्सीन की भी भारी कमी है.

बीते दिन ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की कोविड टास्क फोर्स के साथ एक मीटिंग की थी, जिसमें राज्य में लॉकडाउन लगाने की आवश्यकता से लेकर तमाम मुद्दों पर बात की गई. इसी बैठक में राज्य के स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि 20250 ICU बिस्तरों में से लगभग 75 फीसदी बिस्तर पहले ही भर चुके हैं. करीब 11 से 12 जिले ऐसे हैं, जहां पर एक भी बिस्तर बचा ही नहीं है.

 

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