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'NEET लीक में नेताओं-कोचिंग सेंटर्स की मिलीभगत', महाराष्ट्र के मंत्री का दावा

NEET-UG पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने कोचिंग संचालकों और नेताओं के बीच साठगांठ का दावा करते हुए दोषियों की संपत्ति जब्त करने की मांग की है. वहीं CBI ने लातूर से एक कोचिंग डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है, जिसके मोबाइल से परीक्षा से 5 दिन पहले लीक हुआ पेपर मिलने का दावा किया गया है.

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नीट पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट का बड़ा बयान (File Photo)
नीट पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट का बड़ा बयान (File Photo)

देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा NEET-UG के पेपर लीक मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है. महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने दावा किया है कि इस पूरे मामले में सिर्फ कोचिंग सेंटर ही नहीं, बल्कि कई बड़े नेताओं की भूमिका भी हो सकती है. उनका कहना है कि कोचिंग चलाने वाले लोगों के राजनीतिक दलों के नेताओं से अच्छे संबंध होते हैं. इसी वजह से कई बार ऐसे मामलों में उन्हें बचाव मिल जाता है.

उन्होंने आगे कहा कि कुछ कोचिंग संचालक तो नेताओं के बेहद करीब होते हैं और जन्मदिन जैसे मौकों पर उनके नाम के होर्डिंग तक लगवाते हैं. मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इसी तरह की मिलीभगत की वजह से पेपर लीक जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती और आम छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है.

सीबीआई के मुताबिक, NEET-UG परीक्षा का पेपर असली एग्जाम से पूरे 5 दिन पहले ही लीक हो गया था. जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र के लातूर से रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेज के डायरेक्टर रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है, जिसका लातूर समेत 7 जिलों में कोचिंग सेंटर चलता है और टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये का है. छापेमारी के दौरान मोटेगांवकर के मोबाइल से NEET-UG का पेपर भी बरामद हुआ है

छापेमारी के दौरान उनके मोबाइल से NEET-UG पेपर मिलने का भी दावा किया गया है. आरोप है कि उन्होंने पेपर मिलने के बाद छात्रों को हाथ से लिखे नोट्स और संभावित सवाल दिए थे, ताकि वे परीक्षा में फायदा उठा सकें. बता दें कि अब तक इस मामले में करीब 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

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लातूर-सीकर बने जांच के बड़े केंद्र

CBI की जांच का फोकस अब दो बड़े कोचिंग हब पर है, महाराष्ट्र का लातूर और राजस्थान का सीकर. इन दोनों शहरों को लेकर जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यहां से पेपर लीक नेटवर्क आगे दूसरे राज्यों तक फैला. लातूर में कार्रवाई के बाद अब सीकर में भी कुछ पुराने लिंक खंगाले जा रहे हैं. आरोप है कि इसी सीकर लिंक से देश के दूसरे हिस्सों में भी NEET-UG का पेपर भेजा गया था. दावा तो यहां तक है कि पिछले साल 2025 में भी इसी बीवाल परिवार के 5 लड़कों ने लीक पेपर के दम पर एग्जाम पास किया और सरकारी कॉलेज में एडमिशन पा लिया, जबकि यह बात भी सामने आ रही है कि पहले भी पेपर लीक होकर सीकर आता रहा है.

आंकड़ों की बात करें तो 2024 में सीकर से 27,216 छात्र NEET-UG में शामिल हुए थे. इनमें 700 से ज्यादा नंबर लाने वाले 149 छात्र थे. वहीं 650 से ज्यादा नंबर 2,037 छात्रों के आए. 600 से ज्यादा नंबर 4,729 छात्रों के रहे. वहीं, लातूर से 24,611 छात्र परीक्षा में बैठे थे, जिनमें 3,534 छात्रों ने 500 से ज्यादा नंबर हासिल किए.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि टॉप 50 सेंटर में से 37 सेंटर अकेले सीकर के और 9 लातूर के हैं. यही वजह है कि अब इन दोनों शहरों पर जांच एजेंसियों की नजर सबसे ज्यादा है. इस पूरे मामले में एक गजब का संयोग यह भी सामने आया है कि जितने बच्चे लातूर और सीकर में मेडिकल (NEET-UG) का पेपर पास कर लेते हैं, उतने बच्चे वहां इंजीनियरिंग का पेपर नहीं पास कर पाते.

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