नागपुर के आसमान में जब एयर इंडिया का विशाल बोइंग 777-300ER विमान धीरे-धीरे रनवे से रफ्तार पकड़ते हुए ऊपर उठा, तो स्टाफ में खुशी की लहर दौड़ गई. दरअसल, यह टेकऑफ एक टेस्ट फ्लाइट के लिए था. यह छह साल की लंबी खामोशी के बाद विमान की वापसी की कहानी थी. विमान कभी तकनीकी खराबी के कारण जमीन पर खड़ा रह गया था, वह अब फिर से आसमान में उड़ान भरने के लिए तैयार है.
दरअसल, एयर इंडिया का बोइंग 777-300ER करीब छह साल पहले तकनीकी खराबी की वजह से नागपुर में ग्राउंडेड कर दिया गया था. किसी भी विमान के लिए इतने लंबे समय तक जमीन पर खड़े रहना असामान्य माना जाता है. लेकिन इस दौरान इसे पूरी तरह से ठीक करने और दोबारा उड़ान के लिए तैयार करने का काम लगातार चलता रहा.
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छह साल तक खड़ा रहा विमान
जब यह विमान नागपुर के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर में लाया गया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसे फिर से आसमान में उड़ते देखने में इतना लंबा वक्त लग जाएगा.
तकनीकी खराबी के कारण इसे उड़ान से बाहर कर दिया गया था. इसके बाद एयर इंडिया और एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) की इंजीनियरिंग टीमों ने इस विमान को फिर से तैयार करने के लिए लंबी प्रक्रिया शुरू की.
विमान के कई अहम सिस्टम की जांच की गई, पार्ट्स को बदला गया और कई स्तरों पर तकनीकी परीक्षण किए गए. विमान को फिर से उड़ान के लिए तैयार करना आसान काम नहीं था, क्योंकि इतने लंबे समय तक ग्राउंडेड रहने के बाद हर हिस्से की बारीकी से जांच करनी पड़ती है.
आखिरकार आ गया वह दिन
लंबी मेहनत के बाद वह दिन भी आया, जब यह विमान फिर से रनवे पर तैयार खड़ा था. नागपुर एयरपोर्ट पर मौजूद कई लोगों के लिए यह एक खास पल था.
विमान के इंजन स्टार्ट हुए, रनवे पर धीरे-धीरे उसकी रफ्तार बढ़ी और कुछ ही सेकंड में यह आसमान की ओर उठ गया. यह टेकऑफ एक तरह से छह साल की मेहनत और तकनीकी कौशल नतीजा था.
नागपुर से अहमदाबाद तक टेस्ट फ्लाइट
विमान को दोबारा कॉमर्शियल सेवा में शामिल करने से पहले उसकी टेस्ट फ्लाइट की गई. इसके तहत यह विमान नागपुर से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरकर गया.
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करीब तीन घंटे की यह टेस्ट फ्लाइट पूरी तरह सफल रही. अहमदाबाद पहुंचने के बाद विमान को फिर से नागपुर वापस लाया गया. इस दौरान विमान के सभी सिस्टम की बारीकी से निगरानी की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अब इसमें कोई तकनीकी समस्या नहीं है.
अनुभवी पायलटों ने संभाली कमान
इस ऐतिहासिक टेस्ट फ्लाइट की कमान अनुभवी पायलटों के हाथ में थी. विमान को नागपुर से अहमदाबाद तक कैप्टन अरविंद सिंह और लेडी कमांडर एनी दिव्या ने उड़ाया.

दोनों पायलटों ने टेस्ट फ्लाइट के दौरान विमान की सभी तकनीकी स्थितियों पर नजर रखी. उड़ान के दौरान सभी सिस्टम सामान्य पाए गए और टेस्ट फ्लाइट सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई.
इंजीनियरों की मेहनत रंग लाई
एयर इंडिया और एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड की टीमों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है. छह साल से खड़े विमान को फिर से उड़ान के लिए तैयार करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी.
इंजीनियरों ने विमान के हर छोटे-बड़े हिस्से की जांच की और आवश्यक मरम्मत तथा तकनीकी सुधार किए. इसके बाद कई चरणों में परीक्षण किए गए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विमान पूरी तरह सुरक्षित है.
जल्द ही फिर दिखेगा आसमान में
अधिकारियों के मुताबिक, टेस्ट फ्लाइट सफल रहने के बाद अब यह विमान जल्द ही दोबारा एयर इंडिया की कॉमर्शियल सेवाओं में शामिल हो जाएगा. अगले चार से पांच दिनों में यह विमान नियमित उड़ानों के लिए तैयार हो सकता है. इसके बाद यात्रियों को भी इस विमान में सफर करने का मौका मिलेगा.
नागपुर MRO सेंटर की बड़ी उपलब्धि
नागपुर में स्थित बोइंग MRO सेंटर के लिए भी यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यहां विमान की मरम्मत और तकनीकी जांच का काम किया गया था. इतने लंबे समय तक ग्राउंडेड रहे विमान को फिर से उड़ान के लिए तैयार करना किसी भी तकनीकी टीम के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन टीम ने इसे तैयार कर दिया.
एयर इंडिया के इस बोइंग 777 की कहानी धैर्य, तकनीकी कौशल और टीमवर्क की कहानी है. छह साल तक खामोश खड़ा रहा यह विमान अब फिर से आसमान में उड़ने के लिए तैयार है. जब यह विमान नागपुर के रनवे से उड़ान भर रहा था, तो वह सिर्फ एक मशीन नहीं था. वह एक ऐसी कहानी का प्रतीक था, जिसमें मेहनत, इंतजार और उम्मीद तीनों शामिल थे. अब कुछ ही दिनों में यह विमान फिर से यात्रियों को लेकर आसमान में उड़ान भरता नजर आएगा.