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मुंबई: चातुर्मास में भिक्षुओं के लिए बनी सफेद लाइन को लेकर विवाद, आमने-सामने आए मराठी और जैन समुदाय

मुंबई के घाटकोपर इलाके की एक हाउसिंग सोसायटी में जैन समुदाय द्वारा मानसून के दौरान भिक्षुओं के स्वागत के लिए खींची गई एक सफेद लाइन को लेकर मराठी और जैन लोगों के बीच गंभीर विवाद खड़ा हो गया है.

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घाटकोपर की एक सोसायटी में खींची सफेद लाइन को लेकर विवाद. (Photo: ITG)
घाटकोपर की एक सोसायटी में खींची सफेद लाइन को लेकर विवाद. (Photo: ITG)

मुंबई के घाटकोपर में एक हाउसिंग सोसायटी में जैन मुनियों (संतों) के स्वागत के लिए फुटपाथ पर सफेद रंग से खींची गई एक लाइन को लेकर मराठी और जैन समुदाय के लोगों के बीच तनाव पैदा हो गया है. जैन समुदाय का कहना है कि उन्होंने सोसायटी की कमेटी से अनुमति लेने के बाद इस लाइन को खींचा है, जबकि इस लाइन को खींचे जाने का विरोध कर रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक ने सोसायटी कमेटी और प्रशासन ने लाइन को तुरंत हटाने की मांग की है.

दरअसल, घाटकोपर स्थित कैलास एवेन्यू हाउसिंग सोसायटी और आसपास के कई अन्य सोसायटियों में मानसून के दौरान जैन मुनियों के स्वागत के लिए फुटपाथ पर सफेद लाइन बनाई गई है. जैन समुदाय का तर्क है कि ये लाइन जैन संतों के पैदल चलने के लिए अस्थायी रूप से बनाई गई है.

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने उठाया मुद्दा

इस पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक ने इस सफेद लाइन को लेकर आपत्ति जताई है. प्रसाद ने दावा किया कि उनके परिवार के पास उस जमीन का मालिकाना हक है, जिस पर कैलास एवेन्यू सोसायटी बनी है.

उनका कहना है कि जैन भिक्षुओं के लिए खींची गई ये लाइन अस्थायी नहीं, बल्कि पूरी तरह स्थायी है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और साझा जगहों पर इस तरह की लाइन खींचना गलत है, जिसे तुरंत हटाया जाना चाहिए. उन्होंने सोसायटी कमेटी और प्रशासन से इस लाइन को हटाने की भी मांग की है.

जैन समुदाय का तर्क

दूसरी ओर, विवाद बढ़ने पर हाउसिंग सोसायटी के जैन समुदाय के सदस्यों ने अपना पक्ष सामने रखा है. जैन समुदाय के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने हाउसिंग सोसायटी की आधिकारिक कमेटी से लिखित अनुमति लेने के बाद ही इस लाइन को खींचा था.

उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि ऐसा पूरे घाटकोपर इलाके में हर साल सामान्य रूप से किया जाता है, लेकिन अगर इससे किसी को कोई बड़ी समस्या हो रही है तो वो इसे खुद हटा देंगे. हालांकि, जैन समुदाय ने ये भी कहा कि वो ये समझने में पूरी तरह असमर्थ हैं कि एक साझा स्थान पर खींची गई इतनी छोटी-सी लाइन किसी अन्य व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण कैसे बन सकती है.

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