महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों का इंतजार खत्म हो गया है. शनिवार को राज्य की 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए मतदान हो रहा है. चुनाव आयोग के मुताबिक, शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.
पुणे जिला परिषद चुनाव इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है. यह जिला परिषद लंबे समय से पवार परिवार के नेतृत्व वाली NCP का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. मतदान के दौरान दिवंगत अजित पवार के भाई श्रीनिवास पवार अपने बेटे युगेंद्र पवार के साथ सुबह काटेवाड़ी के प्राथमिक स्कूल स्थित मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचे. वहीं, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार भी पार्थ पवार और अपनी सास आशाताई पवार के साथ मतदान करेंगी.
हालांकि, बीते कुछ वर्षों में पुणे जिले में BJP की बढ़ती पकड़ और अजित पवार के निधन के बाद स्थानीय राजनीति के समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP इस बार पुणे जिला परिषद की 73 में से 72 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि BJP ने 55 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. इससे जिले में मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है.
राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, महाराष्ट्र में कुल 731 जिला परिषद सीटों और 1,462 पंचायत समिति सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में कुल 7,438 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. जिला परिषद की 731 सीटों में से 369 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति के लिए 83, अनुसूचित जनजाति के लिए 25 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 191 सीटें आरक्षित हैं. आरक्षित सीटों पर 2,624 उम्मीदवार मैदान में हैं.
पंचायत समिति की 1,462 सीटों में से 731 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं. इनमें अनुसूचित जाति के लिए 166, अनुसूचित जनजाति के लिए 38 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 342 सीटें आरक्षित हैं. पंचायत समिति चुनाव में कुल 4,814 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं.
इन चुनावों में रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर जिलों में मतदान हो रहा है. वोटिंग की प्रक्रिया सुबह 7.30 बजे शुरू हो गई और शाम 5.30 बजे तक चलेगी.
मतदान पहले 5 फरवरी को होना था, लेकिन 28 जनवरी को उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान दुर्घटना में निधन के बाद राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया था. इस वजह से चुनाव की तारीख आगे बढ़ा दी गई थी.
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, मतगणना 9 फरवरी को सुबह 10 बजे से शुरू होगी. मतगणना पूरी होने के बाद आदर्श आचार संहिता हटा ली जाएगी.
चुनाव आयोग ने बताया कि इस बार मतदाताओं की संख्या भी काफी बड़ी है. राज्य में कुल 1,06,33,269 पुरुष मतदाता, 1,01,86,965 महिला मतदाता और अन्य श्रेणी के 468 मतदाता हैं. पूरे राज्य में 25,471 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए करीब 1.28 लाख कर्मचारियों को तैनात किया गया है. इनमें 125 रिटर्निंग ऑफिसर और 125 असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर शामिल हैं. आयोग ने 51,537 कंट्रोल यूनिट और 1,10,329 बैलेट यूनिट सहित पर्याप्त संख्या में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की व्यवस्था की है. अधिकारियों को मतदान प्रक्रिया के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है.
हर मतदाता को दो वोट डालने होंगे. एक वोट जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र के लिए और दूसरा पंचायत समिति निर्वाचन मंडल के लिए. जिला परिषद का बैलेट सफेद बैलेट यूनिट पर होगा, जबकि पंचायत समिति का बैलेट गुलाबी बैलेट यूनिट पर दिया जाएगा.
मतदाता राज्य चुनाव आयोग के 'मताधिकार' मोबाइल ऐप के जरिए अपना नाम और मतदान केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा आयोग की वेबसाइट पर भी मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई है.
वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाली महिलाओं के लिए मतदान केंद्रों पर रैंप, व्हीलचेयर और शौचालय जैसी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव गांवों के भविष्य को तय करने और लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं.