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सुशांत...कंगना...कोरोना...एंटीलिया, वो मौके जब उठे उद्धव सरकार पर सवाल

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई में बनी शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार अपने सवा साल के कार्यकाल में तमाम मुद्दों पर घिरी हुई नजर आई है. एंटिलिया, पालघर में साधुओं की हत्या से लेकर सुशांत राजपूत का मामला हो या फिर फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के दफ्तर पर बीएमसी के एक्शन के चलते उद्धव ठाकरे सरकार विपक्ष के निशाने पर ही है. 

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सीएम उद्धव ठाकरे सीएम उद्धव ठाकरे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कंगना रनौत पर एक्शन से घिरी थी उद्धव सरकार
  • पालघर में साधुओं की हत्या से भी खड़े हुए सवाल
  • कोरोना की रफ्तार अभी भी महाराष्ट्र में जारी

मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर जिलेटिन छड़ मामले की जांच के दौरान एक के बाद एक हो रहे खुलासों के चलते मुंबई पुलिस की हो रही किरकिरी के बीच महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है. उद्धव ठाकरे की अगुवाई में बनी शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन सरकार अपने सवा साल के कार्यकाल में तमाम मुद्दों पर घिरी हुई नजर आई है. पालघर में साधुओं की हत्या से लेकर सुशांत राजपूत का मामला हो या फिर फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के दफ्तर पर बीएमसी के एक्शन के चलते उद्धव ठाकरे सरकार विपक्ष के निशाने पर रही है. 

1. एंटीलिया मामले पर घिरी उद्धव सरकार
मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर जिलेटिन छड़ मामले की एनआईए जांच शुरू होते ही मुंबई पुलिस अफसर सचिन वाजे का नाम आने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल खड़े कर दिए. पहले तो शिवसेना ने सचिन वाजे का बचाव किया यहां तक कि खुद उद्धव ठाकरे भी वाजे के बचाव में आए जिस पर महाराष्ट्र के पूर्व सीएम फडणवीस ने उद्धव सरकार पर जमकर हमले शुरू कर दिए. 

एनआईए की पूछताछ में जब वाजे के सामने सबूत रखे गए तो उन्होंने एंटीलिया मामले में खुद के शामिल होने की बात कबूल कर ली, जिसके बाद से उद्धव सरकार बैकफुट पर हैं. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे सरकार ने मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को हटाकर हेमंत नागराले को मुंबई का नया कमिश्नर बना दिया है. इसके बावजूद उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल रखा है जबकि शिवसेना की सहयोगी एनसीपी से लेकर कांग्रेस तक खामोशी अख्तियार किए हुए हैं. 

2. सुशांत राजपूत मामले में किरकिरी
फिल्म अभिनेता सुशांत राजपूत की पिछले साल हुई मौत के मामले को लेकर भी उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ बीजेपी ने मोर्चा खोल दिया था. सुशांत की मौत के मामले में जांच के लिए बिहार पुलिस मुंबई पहुंची तो महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें क्वारनटीन कर दिया था, जिसे लेकर उद्धव ठाकरे की काफी किरकिरी हुई थी. इतना ही नहीं उद्धव ठाकरे सरकार सीबीआई की जांच की सिफारिश करने से बच रही थी तो बिहार ने सीबीआई जांच की मंजूरी दे दी थी. महाराष्ट्र के बीजेपी नेताओं ने शिवसेना पर काफी गंभीर आरोप लगाए थे. 

3. कंगना पर एक्शन से खड़े हुए सवाल
सुशांत राजपूत की हत्या के बाद से ही बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और शिवसेना नेताओं के बीच जुबानी जंग जमकर हुई थी. ऐसे में कंगना रनौत के मुंबई पहुंचने से पहले बीएमसी उनके पॉली हिल्स स्थित उनके ऑफिस जेसीबी लेकर पहुंच गई. अवैध निर्माण के आरोप में बीएमसी ने कंगना के ऑफिस के एक हिस्से को गिरा दिया था, जिसे लेकर शिवसेना विपक्ष के साथ-अपने सहयोगी दलों के निशाने पर आ गई थी. कंगना रनौत पर हुए एक्शन के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बीएमसी की कार्रवाई को गैर जरूरी बताया था. 

4. पालघर में साधुओं की लिंचिंग
महाराष्ट्र में 16-17 अप्रैल 2020 की रात जब लॉकडाउन में लोग घरों में बंद थे, पालघर से करीब 100 किलोमीटर दूर मॉब लिंचिंग की वारदात हुई. पालघर के गड़चिनचले गांव में मुंबई से सूरत जा रहे दो साधुओं और ड्राइवर की गाड़ी रोक कर भीड़ ने जान ले ली थी. भीड़ के हाथ चढ़े दोनों साधु मुंबई के जोगेश्वरी स्थित हनुमान मंदिर के थे. वो मुंबई से सूरत अपने गुरु के अंतिम संस्कार में जा रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते पुलिस ने इन्हें हाइवे पर जाने से रोक दिया था. इसके बाद इको कार में सवार दोनों साधु ग्रामीण इलाके की तरफ मुड़ गए, जहां वे मॉब लिंचिंग के शिकार हो गए. पुलिस की मानें तो अफवाह के कारण साधु और ड्राइवर भीड़ के शिकार हुए. साधुओं की हत्या के बाद से उद्धव ठाकरे पर सवाल खड़े होने लगे थे.

5. कोरोना की रफ्तार अभी भी जारी
कोरोना संक्रमण को लेकर अभी भी सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से ही आ रहे हैं. कोरोना को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार अपने पुराने साथी बीजेपी के निशाने पर लगातार है. पिछले साल कोरोना के बिगड़ते हालत के चलते बीजेपी नेता ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग तक कर डाली थी. कांग्रेस और एनसीपी ने उस समय किनारा कर लिया था. वहीं, अब एक साल के बाद कोरोना के मामले सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र हैं, जिसके चलते राज्य के कई शहरों में एक बार फिर से रात में कर्फ्यू लगाने का आदेश सरकार ने जारी किया है. कोरोना को नियंत्रण नहीं कर पाने के चलते बीजेपी लगातार उद्धव ठाकरे को पर सवाल खड़े कर रही है. 

6. मुस्लिम आरक्षण पर विवाद
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया गया है. ऐसे में सरकार बनने के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने विधान परिषद में घोषणा की थी कि सरकार राज्य में 5 फीसदी मुस्लिम आरक्षण के लिए कानून लाएगी. मुस्लिम समुदाय के आरक्षण को लेकर बीजेपी ने सवाल खड़े किए तो सीएम उद्धव ठाकरे ने यह कहते हुए इस मुद्दे पर विराम लगाने की कोशिश की थी कि सरकार के सामने अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है. इतना ही नहीं शरजील उस्मानी के महाराष्ट्र के पुणे में हाल ही में आयोजित एल्गार परिषद के सम्मेलन में दिए गए विवादित भाषण को लेकर महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. 

7. नेवी अफिसर से लेकर लता-सचिन पर घिरे उद्धव
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर बने एक कार्टून को पिछले साल सोशल मीडिया पर शेयर करने से नाराज शिवसेना कार्यकर्ताओं ने 62 वर्षीय एक सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी मदन शर्मा के घर में घुसकर जमकर पिटाई कर दी थी. इस मामले में शिवसेना के दो कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक शिवसेना का शाखा प्रमुख कमलेश कदम भी था. यह बात सामने आने के बाद उद्धव ठाकरे सरकार के खिलाफ विपक्षी दल बीजेपी ने सवाल खड़े किए थे. 

वहीं, पॉप सिंगर रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थर्नबर्ग ने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था, जिसके बाद अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, सायना नेहवाल, सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, अजय देवगन, विराट कोहली जैसी कई मशहूर हस्तियों ने ट्वीट कर जवाब दिया था और केंद्र सरकार के समर्थन में खड़े नजर आए थे. इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने मशहूर हस्तियों के द्वारा किए ट्वीट के जांच कराने की बात कही थी, जिसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट कर महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को 'मराठी अस्मिता' से जोड़ दिया था और लिखा था कि ऐसे 'रत्न' कहां मिलेंगे, जो 'भारत रत्न' के खिलाफ जांच के आदेश देते हैं, जो हमेशा देश के साथ खड़े रहते हैं. इसे लेकर उद्धव ठाकरे सरकार बैकफुट पर आ गई थी. 

 

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