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तेंदुए के शावक को बिल्ली का बच्चा समझकर खेत से घर उठा लाए बच्चे, फिर..

महाराष्ट्र के मालेगांव (Maharashtra Malegaon) में किसान के बच्चे खेत से बिल्ली का बच्चा समझकर तेंदुए के शावक को घर उठा लाए. बच्चे उसके साथ खूब खेलते रहे. किसान के परिवार ने उसकी देखभाल की, लेकिन सभी में यह कनफ्यूजन बना रहा कि ये तेंदुए का शावक है या बिल्ली का बच्चा है.

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शावक के साथ खेलती बच्ची. शावक के साथ खेलती बच्ची.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र के मालेगांव का मामला
  • सूचना मिलने पर पहुंची वन विभाग की टीम

महाराष्ट्र के मालेगांव (Maharashtra Malegaon) में एक किसान का परिवार एक सप्ताह तक तेंदुए के शावक को अपने घर में रखे रहा. जब इस बात की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी गई तो टीम ने वहां पहुंचकर शावक को अपने जिम्मे लिया. दरअसल, तेंदुए के शावक को बच्चे बिल्ली का बच्चा समझकर खेत से उठा लाए थे. बच्चे शावक के साथ कई दिन तक खेलते रहे. जब वन विभाग की टीम पहुंची तो स्पष्ट हुआ कि बिल्ली के बच्चे जैसा दिखने वाला तेंदुए का शावक है.

जानकारी के अनुसार, एक हफ्ते पहले साहेबराव गंगाराम ठाकरे के मोरजार हलके में घर के नजदीक खेत में बच्चों ने एक छोटा पिल्ला देखा, जो बिल्ली जैसा लग रहा था. बच्चे उसके साथ खेलने लगे, वह बिल्ली से अलग रंग का था और देखने में प्यारा लग रहा था. बच्चे उसके साथ कई दिन तक खेलते रहे. जानकारी होने पर वन विभाग की टीम ने किसान के घर जाकर शावक को कब्जे में लिया. जब किसान के परिवार को पता चला कि यह बिल्ली का बच्चा नहीं, बल्कि एक तेंदुए का शावक है तो वह डर गए.

साहेबराव ठाकरे ने कहा कि मेरे घर के पास 50 फीट में गन्ने का खेत है. नजदीक ही कुछ पेड़ हैं. वहां बच्चों को एक बिल्ली जैसा दिखने वाला बच्चा मिला. सब बच्चे शोर करने लगे कि बिल्ली का बच्चा है. मैंने जाकर देखा तो वह तेंदुए का शावक लग रहा था. इसके बाद सभी को घर में रहने को कहा. क्या पता शावक की मां यानी मादा तेंदुआ गन्ने ते खेत में हो और अटैक कर दे. इसके बाद शावक को घर के बाहर ही रखा. खिड़की से देखते रहे, लेकिन पूरे दिन मादा तेंदुआ नहीं आई.

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उन्होंने बताया कि तेंदुए का शावक खेत की तरफ जाकर घर की तरफ आ जाता था. ऐसे 2-3 दिन बीत गए. बच्चे खेलते थे तो शावक देखता रहता था. शावक छोटी बच्ची के साथ खेलने लगा था. घर में घूमता रहता था. परिवार के लोग उसे दूध पिलाते थे, रोटी खिलाते थे. इसके बाद सवाल यह था कि यह बिल्ली है या तेंदुए का शावक. 

ठाकरे ने कहा कि 2 साल की नातिन को उसने खेल-खेल में काट भी लिया. ऐसे 6-7 दिन बीत गए तो वन विभाग को सूचना दी. इसके बाद वन विभाग की टीम ने आकर शावक को कस्टडी में ले लिया. हालांकि, सावधानी बरतते हुए उन्होंने तेंदुए के शावक को रोजाना डेढ़ लीटर दूध दिया. उन्होंने इस बात का भी ख्याल रखा कि कहीं मादा तेंदुआ शावक को तलाश न कर रही हो. उसकी राह देखी.

वन विभाग के मालेगांव परिक्षेत्र के अधिकारी वैभव हिरे ने कहा कि यह नर जाति का 2 माह का शावक है. वहां बच्चे थे और उन सभी ने शावक को दूध पिलाया होगा, इसलिए शावक वहां से दूर नहीं गया. बच्ची के साथ खेलता था. वन्यजीव कानून के अनुसार, कुछ बंधन हैं, इसलिए शावक को हमने कस्टडी में लिया है, उसपर वेटनरी डॉक्टर ध्यान दे रहे हैं.

रिपोर्टः प्रवीन ठाकरे

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