गोवा बेंच की बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बर्च आग हादसे में राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. इस हादसे में पिछले साल 25 लोगों की मौत हो गई थी. जस्टिस सुमन श्याम और जस्टिस अमित जमसंदेकर की बेंच ने कहा कि यह घटना उन नाइट क्लब कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का साफ उल्लंघन है, जिनकी मौत हुई. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ मालिक ही नहीं बल्कि राज्य की भी जिम्मेदारी बनती है.
यह सुनवाई दिसंबर 2025 में अर्पोरा स्थित नाइट क्लब में लगी आग के मामले में स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) जनहित याचिका पर हो रही थी. कोर्ट ने कहा कि वह तीन मुख्य बिंदुओं हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान, पीड़ितों को मुआवजा और
भविष्य में ऐसी घटना न दोहराई जाए, इसके लिए सख्त कदम पर ध्यान देना चाहता है
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गोवा सरकार की ओर से पेश एडवोकेट जनरल देविदास पंगम से पूछा कि क्या बेसमेंट में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि मालिक की जिम्मेदारी अपनी जगह है लेकिन राज्य को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.
कोर्ट ने कहा कि यह इन कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का साफ उल्लंघन है. मालिक जिम्मेदार है, लेकिन राज्य की भी जवाबदेही है. अदालत ने यह भी माना कि मुआवजे का एक हिस्सा वर्कमेन कम्पनसेशन एक्ट के तहत आ सकता है, लेकिन राज्य को अलग से स्पष्ट मुआवजा देना होगा.
देविदास पंगम ने कहा कि उन्हें यह जांचने के लिए समय चाहिए कि सरकार की ओर से कोई भुगतान किया गया है या नहीं. आदेश देते हुए कोर्ट ने गोवा की सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिया कि वे पिछले पांच साल में जारी किए गए लाइसेंस, निर्माण की अनुमति, व्यापार लाइसेंस और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) का पूरा विवरण हलफनामे के जरिए जमा करें. इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को होगी.