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लड़की ने खोला कार का गेट, टकराकर स्कूटर सवार घायल, कोर्ट बोला- दोनों की गलती

कोर्ट ने इस केस में आरोपी 19 साल की छात्रा को बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि इस घटना में ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि सिर्फ आरोपी छात्रा की ही गलती थी, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ मिलेगा.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोर्ट ने कहा- चालक को भी रखनी चाहिए थी सावधानी
  • संकरी जगह में दोपहिया वाहन चलाना असुरक्षित- कोर्ट

महाराष्ट्र के मुंबई में टैक्सी से टकराकर घायल हुए स्कूटर सवार के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है. इस मामले में मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत ने टैक्सी सवार 19 वर्षीय छात्रा को बरी कर दिया है.

छात्रा के खिलाफ केस करने वाले पीड़ित के मुताबिक वह 11 मार्च 2019 की शाम 5.30 बजे अपने स्कूटर पर हाजी पेडर रोड से नरीमन पॉइंट जा रहा था. वह गिरगांव चौपाटी के पास सिग्नल पर पहुंचने ही वाला था कि अचानक एक टैक्सी के यात्री ने दरवाजा खोल दिया. पीड़ित के स्कूटर का हैंडल दरवाजे से टकराया और वह नीचे गिर गया. 

स्कूटर चालक को नायर अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टर्स ने उसे बताया कि उसके पैर में लिगामेंट (हड्डियों को जोड़ने वाला तत्व) फट गया है. टैक्सी चालक ने पीड़ित को उठाने में मदद की. जब वह उठ नहीं सका तो टैक्सी चालक उसे अस्पताल ले गया. हादसे के बाद स्कूटर चालक की ऑर्थोस्कोपी सर्जरी करनी पड़ी.

पीड़ित ने 19 साल की छात्रा के खिलाफ गांवदेवी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया. गिरगांव कोर्ट के मजिस्ट्रेट नदीम पटेल ने कई गवाहों से पूछताछ के बाद कहा कि एक संकरी जगह में दोपहिया वाहन चलाना सुरक्षित नहीं है और स्कूटर चालक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए था.

इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता है कि दुर्घटना लड़की की लापरवाही के कारण हुई है. यह ऐसा मामला है, जिसमें आरोपी के साथ-साथ स्कूटर चालक दोनों ने उचित ध्यान नहीं दिया. 

मजिस्ट्रेट पटेल ने आगे कहा कि तय कानून के मुताबिक जब 2 विचार संभव हों तो आरोपी के समर्थन करने वाले दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. इस केस में भी आरोपी और स्कूटर चालक दोनों ने लापरवाही की. सिर्फ आरोपी की लापरवाही पर संदेह है. इसलिए, आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है. 

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