मुंबई और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नवी मुंबई महानगरपालिका (NMMC) और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर कड़ा रुख अपनाया. मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड़ की पीठ ने चेतावनी दी कि यदि एयर क्वालिटी सुधारने के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो सख्त कार्रवाई होगी, यहां तक कि म्युनिसिपल कमिश्नर के वेतन पर रोक भी लगाई जा सकती है.
कोर्ट शहर की बिगड़ती हवा की गुणवत्ता से जुड़ी एक जनहित याचिका का स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी. पीठ ने विशेष रूप से NMMC के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अदालत के पहले दिए गए निर्देशों की खुलेआम अनदेखी और उल्लंघन किया गया है. अदालत ने कहा कि NMMC द्वारा दाखिल हलफनामे में यह नहीं दिखाया गया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नरों की ओर से चिन्हित 11 निर्माण स्थलों पर डस्ट-कंट्रोल नियमों के उल्लंघन को लेकर कोई निरीक्षण किया गया हो.
पीठ ने टिप्पणी की, 'हमें यह तक संकेत नहीं मिलता कि NMMC के किसी अधिकारी ने उन साइट्स का दौरा भी किया हो.' इसके साथ ही कोर्ट ने संकेत दिया कि वह अगले आदेश तक NMMC आयुक्त का वेतन रोकने का निर्देश देने पर विचार कर रही है. अदालत ने मौखिक रूप से यह भी चेतावनी दी कि इसी तरह की कार्रवाई BMC कमिश्नर के खिलाफ भी की जा सकती है, हालांकि यह स्पष्ट किया गया कि यह फिलहाल चेतावनी है, कोई तत्काल आदेश नहीं. BMC के रवैये पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने कहा कि नगर निगम की ओर से निर्देशों के पालन के लिए 'कोई वास्तविक और ईमानदार प्रयास' नहीं किया गया.
बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि बीएमसी ने कदम सिर्फ अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही क्यों उठाए, जबकि पिछले एक साल से उसे कई मौके दिए गए थे. कोर्ट ने BMC से यह भी जानकारी मांगी कि उसने कितने एयर-क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए हैं और उनमें से कितने केंद्रीय डैशबोर्ड से जुड़े हैं. एनजीओ ‘वांशक्ति’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जनक द्वारकादास और कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी डेरियस खंबाटा ने दलील दी कि अक्टूबर 2023 में दिए गए हाई कोर्ट के आदेशों को खुलेआम नजरअंदाज किया गया है और अब भी करीब 500 निर्माण स्थल बिना अनिवार्य सेंसर-आधारित एयर-क्वालिटी मॉनिटर के चल रहे हैं.
सुनवाई के बाद पीठ ने कहा कि BMC के खिलाफ भी NMMC जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है. हाई कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि बीएमसी कानून में अतिरिक्त अधिकार मांगे, ताकि धूल नियंत्रण और वायु प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 5 लाख से 5 करोड़ रुपये तक का उदाहरणात्मक जुर्माना लगाया जा सके. मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, 'उल्लंघन करने वालों को यह समझना चाहिए कि अपराध से फायदा नहीं होता. इतना भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए कि वे कानून तोड़ने से पहले दो बार सोचें.' मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी.