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कौन थीं 18वीं शताब्दी की रानी कमलापति, जिनके नाम पर होगा हबीबगंज स्टेशन?

रानी कमलापति भोपाल की आखिरी हिंदू महारानी थीं. उनके नाम पर ही भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम अब रानी कमलापति स्टेशन होगा. रानी कमलापति ने आत्मसम्मान की रक्षा में जलसमाधि ले ली थी.

रानी कमलापति के शासन के बाद नवाबों का दौर शुरू हुआ. (फोटो- ट्विटर) रानी कमलापति के शासन के बाद नवाबों का दौर शुरू हुआ. (फोटो- ट्विटर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भोपाल की आखिरी हिंदू रानी थीं कमलापति
  • आत्मसम्मान की रक्षा में ले ली थी जलसमाधि
  • 14 साल के बेटे नवल शाह की हो गई थी हत्या

Who Was Rani Kamlapati: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति के नाम से जाना जाएगा. देश के पहले वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेश का उद्घाटन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) करेंगे. मध्य प्रदेश जनसंपर्क के मुताबिक, इस स्टेशन का निर्माण 1905 में किया गया था. उस समय इसे शाहपुर के नाम से जाना जाता था. 1979 में इसका नाम हबीबगंज कर दिया गया. करीब 42 साल बाद इसका नाम बदलकर अब रानी कमलापति स्टेशन किया गया है. 

बेहद सुंदर थीं, इसलिए नाम रखा- कमलापति

16वीं सदी में सीहोर जिले की सलकनपुर रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे. उनके यहां एक कन्या का जन्म हुआ. वो बेहद सुंदर थी, इसलिए उनका नाम कमलापति रखा गया. राजकुमारी कमलापति को शिक्षा, घुड़सवारी, मल्लयुद्ध और तीरकमान चलाने में महारत हासिल थी. सलकनपुर रियासत की देखरेख की जिम्मेदारी राजा कृपाल सिंह सरौतिया और राजकुमारी कमलापति पर ही थी. 

गिन्नौरगढ़ के राजा निजाम शाह से हुई थी शादी

16वीं सदी में ही करीब 750 गांवों को मिलाकर गिन्नौरगढ़ राज्य बनाया गया था. इसके राजा सूराज सिंह शाह (सलाम) थे. उनके बेटे निजाम शाह थे. उन्हीं से रानी कमलापति की शादी हुई थी. गोंड राजा निजाम शाह ने अपनी पत्नी रानी कमलापति के नाम पर भोपाल में तालाब के पास 1702 में एक बहुत ही सुंदर महल का निर्माण करवाया था. इस महल को आज भी रानी कमलापति महल के नाम से जाना जाता है. 1989 में इस महल को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपने संरक्षण में ले लिया था.

42 साल बाद बदला गया हबीबगंज स्टेशन का नाम. (फोटो-PTI)

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पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए अफगानी सरदार की मदद ली

सलकनपुर का ही रहने वाला चैन सिंह रानी कमलापति से शादी करना चाहता था. उसने कई बार राजा निजाम शाह की हत्या करने की कोशिश की, लेकिन हर बार नाकाम रहा. फिर एक दिन चैन सिंह ने राजा निजाम शाह को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया और जहर देकर उनकी हत्या कर दी. इसके बाद चैन सिंह ने रानी कमलापति को पाने के मकसद से गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया. उससे बचने के लिए रानी कमलापति अपने बेटे नवल के साथ भोपाल के उसी महल में छिप गईं, जिसे राजा निजाम शाह ने बनवाया था. 

कुछ वक्त बीत जाने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रुके हैं. इन अफगानियों का सरदार दोस्त मोहम्मद खान था, जो पैसा लेकर युद्ध लड़ता था. दोस्त मोहम्मद खान ने रानी कमलापति के कहने पर गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया, जिसमें चैन सिंह मारा गया. 

देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन है रानी कमलापति स्टेशन (फोटो-PTI)

जब 14 साल का बेटा लड़ा मोहम्मद खान से

दोस्त मोहम्मद खान ने गिन्नौरगढ़ के किले पर कब्जा कर लिया. लेकिन इसके बाद दोस्त मोहम्मद खान ने अपनी नीयत दिखा दी. मोहम्मद खान के नापाक इरादे देख रानी कमलापति के 14 साल के बेटे नवल शाह ने अपने 100 लड़ाकों के साथ लालघाटी में दोस्त मोहम्मद खान के साथ घमासान युद्ध लड़ा. इस युद्ध में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया. इस जगह पर इतना खून बहा कि यहां की जमीन लाल हो गई और इसलिए आज भी लालघाटी कहा जाता है. 

रानी कमलापति ने ली जल समाधि

जब बेटे नवल शाह की निर्मम हत्या कर दी गई और रानी कमलापति को लगा कि वो अब अपने राज्य का संरक्षण नहीं कर पाएंगी तो उन्होंने आत्मसम्मान की रक्षा में छोटे तालाब में समाधि ले ली. रानी कमलापति भोपाल की आखिरी हिंदू रानी थीं. उनके बाद यहां नवाबों का दौर शुरू हो गया. 

 

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