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MP: जज और बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जहरीले आटे से फूड पॉयजनिंग का शक

एसडीओपी विजय पुंज ने बताया कि परिवार से जानकारी मिली है कि जज के न्यायालय में या सर्किट हाउस के पास किसी परिचित ने उन्हें आटा दिया था. जिसे घर जाकर रोटियां बनाई गई थीं. जिसे दोनों बेटों और जज ने खाया था. जिसके बाद जज और एक बेटे की हालत ज्यादा बिगड़ गयी. जबकि छोटा बेटा इलाज के बाद ठीक हो गया.

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पुलिस को किसी द्वारा दिए गए आटे पर है शक (फोटो: Aajtak)
पुलिस को किसी द्वारा दिए गए आटे पर है शक (फोटो: Aajtak)

  • एडीजे महेंद्र त्रिपाठी और उनके बेटे की फूड पॉयजनिंग से मौत
  • किसी परिचित ने दिया था आटा, उसी आटे की खाई गई थी रोटी
  • पुलिस कर रही है इस मामले की जांच, आटे का लिया गया सैंपल

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र कुमार त्रिपाठी एवं उनके युवा पुत्र अभियनराज उर्फ मोनू त्रिपाठी की मौत हो गयी है. मौत के पीछे फूड पॉयजनिंग का संदेह जताया जा रहा है. पिता और पुत्र को फूड पॉयजनिंग के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एक मजिस्ट्रेट और उनके पुत्र की मौत से हड़कंप मच गया है. दोनों की मौत संदिग्ध मानी जा रही है. मामले की जांच के बाद स्पष्ट होगा कि आटा जहरीला था या इसके पीछे किसी का हाथ था.

बताया जा रहा है कि एडीजे महेंद्र त्रिपाठी की रविवार सुबह इलाज के दौरान एलिक्सिस अस्पताल नागपुर में मृत्यु हो गयी. जबकि पुत्र ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया. इस घटना से अदालत, पुलिस, प्रशासन और अधिवक्ताओं में सन्नाटा खींच गया है. घटना से लोग स्तब्ध और शोकाकुल हैं.

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बताया जा रहा है कि फूड पॉयजनिंग के बाद पिता पुत्र को 23 जुलाई को पाढर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां हालत बिगड़ने पर शनिवार को उन्हें नागपुर रेफर किया गया था. गंभीर हालत में रेफर किए गए दोनों पिता-पुत्र में बेटे की हालत अधिक गंभीर होने के चलते बेटे की रास्ते में ही मौत हो गयी.

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एसडीओपी बैतूल विजय पुंज ने आजतक के से हुई बातचीत में कहा कि महेंद्र त्रिपाठी जिला न्यायालय में एडीजे के पद पर पदस्थ थे. परिवार से पता चला है कि 20 जुलाई को इनको किसी परिचित व्यक्ति ने आटा दिया था. जज की पत्नी ने उस आटे से रोटी बनाई थी, क्योंकि आटा कम था तो पति और दोनों बेटों को रोटी खिलाई थी. रोटी खाने के बाद तीनों की हालत गंभीर हो गई जिनका पहले बैतूल में इलाज कराया गया. उसके बाद उन्हें पाढर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें नागपुर रेफर किया गया. छोटे बेटे की हालत सुधर गई. बड़े बेटे और एडीजे महेंद्र त्रिपाठी की मौत हो गई. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

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इस मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. परिवार ने 20 जुलाई को रात में जो भोजन किया था, उसके बाद उनकी हालत बिगड़ी. पुलिस को प्रथम दृष्टया संदेह है कि मजिस्ट्रेट परिवार ने जो चपातियां खाई थीं. उससे फूड पॉयजनिंग हुई. इसमें मजिस्ट्रेट और उनके दो पुत्रों ने चपाती खाई थी. जबकि पत्नी ने चपाती नहीं खाई थी. उन्होंने चावल खाया था. जिसके कारण वे पॉयजनिंग का शिकार नहीं हुईं.

पुलिस इस मामले में घर में रखे आटे की सैंपलिंग करवाएगी वहीं बिसरा भी जांच के लिए भेजा जाएगा. दोनों पिता-पुत्र का शव परीक्षण नागपुर में ही किया जा रहा है. जिनके नाखून और बाल संरक्षित कर रखे जाने के लिए भी कहा गया है.

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एसडीओपी विजय पुंज ने बताया कि परिवार से जानकारी मिली है कि जज के न्यायालय में या सर्किट हाउस के पास किसी परिचित ने उन्हें आटा दिया था. जिसे घर जाकर रोटियां बनाई गई थीं. जिसे दोनों बेटों और जज ने खाया था. जिसके बाद जज और एक बेटे की हालत ज्यादा बिगड़ गयी. जबकि छोटा बेटा इलाज के बाद ठीक हो गया.

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इधर कोतवाली और गंज टीआई जज के निवास पर जांच के लिए पहुचे हैं. बंगले के भृत्य के मुताबिक जज की पत्नी और दोनो बेटे इंदौर से आये थे. खाना जज की पत्नी ने ही बनाया था. पुलिस ने जिस आटे से रोटी बनी थी उसे जब्त कर सैंपल के लिए भेज दिया है.

इधर बताया जा रहा है कि पिता और पुत्र के शवों को बैतूल न लाकर उनके गृह ग्राम ले जाया जाएगा. एडीजे त्रिपाठी मूलत शहडोल जिले के धनपुरी क्षेत्र के निवासी थे, इससे पहले वह अनूपपुर जिले के विवेक नगर क्षेत्र में भी रह चुके हैं.

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