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शिवराज सरकार का एक साल: सुशासन, स्थायित्व, हिंदुत्व.. जानें- किस मंत्र पर कर रहे काम

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री के तौर पर यह चौथा कार्यकाल है, लेकिन इस बार की सियासी स्थिति पिछली तीन पारियों जैसी नहीं थी. यह एक कांटों भरा ताज जैसा था. इसके बावजूद शिवराज सिंह ने एक तरफ इसे टेंपरेरी से परमानेंट सरकार में तब्दील किया तो दूसरी तरफ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों के साथ-साथ बीजेपी नेताओं के साथ बैलेंस बनाए रखा.

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शिवराज सिंह चौहान शिवराज सिंह चौहान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शिवराज सरकार टेंपरेरी से परमानेंट बनी
  • शिवराज सरकार का एक साल 23 मार्च को पूरा
  • हिंदुत्व के एजेंडे में रची-बसी शिवराज सरकार

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की सत्ता से विदाई के बाद शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में बनी बीजेपी सरकार ने एक साल का सफर तय कर लिया है. शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री के तौर पर यह चौथा कार्यकाल है, लेकिन इस बार की सियासी स्थिति पिछली तीन पारियों जैसी नहीं थी. यह एक कांटों भरा ताज जैसा था. इसके बावजूद शिवराज सिंह ने एक तरफ अपनी टेंपरेरी सरकार को परमानेंट सरकार में तब्दील किया तो दूसरी तरफ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थकों के साथ-साथ बीजेपी नेताओं के साथ बैलेंस बनाए रखा. हालांकि, इस बार शिवराज अपनी छवि से इतर हिंदुत्व की राह पर चलते नजर आए, लेकिन साथ ही उन्होंने किसानों से लेकर युवा और आदिवासी समुदाय को पूरी तरह से साधकर रखा. 

शिवराज सरकार की सरकार का एक साल का कार्यकाल मंगलवार को पूरा हो रहा है, लेकिन बीजेपी ने सोमवार से ही जश्न की तैयारी शुरू कर दी है. शिवराज सरकार के एक साल की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाने के लिए बीजेपी 4 दिन का अभियान शुरू कर रही है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने विकास कार्यों के लिए शिवराज सरकार को 10 में से 10 अंक दिए. उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना महामारी रोकने में सफलता पाई. प्रदेश गेहूं उपार्जन में पहले, स्व-सहायता समूहों को कर्ज देने में दूसरे, जल जीवन मिशन के कार्यों में तीसरे, आत्मनिर्भर प्रदेश के मामले में दूसरे, फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों को कर्ज देने के मामले में पहले, आयुष्मान कार्ड बनाने में देश में पहले स्थान पर रहा. ऐसे ही कोरोना वॉरियर्स का टीकाकरण 86 फीसद हुआ, जो कि देश में सबसे ज्यादा है. 

टेंपरेरी से परमानेंट सरकार बनाई
मध्य प्रदेश के 2018 विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह को सियासी तौर पर गहरा झटका ही नहीं लगा था बल्कि सत्ता भी चली गई थी. पिछले साल मार्च में कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे के बाद वह सत्ता में लौट आए थे, लेकिन उनके पास अल्पमत की सरकार थी. राज्य की 28 सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को 19 सीटों पर जीत मिली जबकि कांग्रेस को 9 सीटों से संतोष करना पड़ा था. शिवराज सिंह चौहान ने इस तरह सदन में सुविधाजनक बहुमत हासिल कर अपनी सरकार की नींव मजबूत की और साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी पार्टी कांग्रेस की सत्ता में वापसी के सारे मंसूबों को ध्वस्त करने का काम किया. शिवराज सिंह चौहान ने 2018 में गंवाई सरकार को 2020 में फिर से सत्ता में परमानेंट करने का काम किया, जो बड़ी उपलब्धि के तौर पर माना जा रहा है. 

हिंदत्व की राह पर खुलकर खेल रहे शिवराज
सत्ता गंवाने के बाद शिवराज सिंह की लोकप्रिय छवि को गहरा धक्का लगा था, लेकिन सत्ता में वापसी के बाद उन्होंने कई सबक लिए हैं जो अब उनकी कार्यप्रणाली और नीतियों में झलक रहे हैं. वह एक तरफ सुशासन की छाप छोड़ने को व्यग्र दिखे तो दूसरी तरफ भाजपा के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक एजेंडे पर भी तेजी से अमल कर रहे हैं. मध्य प्रदेश में लव जिहाद की घटनाएं सीमित हैं, इसके बावजूद शिवराज सिंह चौहान ने इसके खिलाफ सख्त कानून बनवाने की पहल करने में विलंब नहीं किया.

एक वेब सीरीज 'अ सूटेबल ब्वॉय' में मंदिर के अंदर चुंबन के दृश्य दिखाने पर, नेटफ्लिक्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और गाय के संरक्षण के लिए कई कदम उठाए गए हैं. शिवराज सिंह चौहान ने 'गो-कैबिनेट' गठित की. अपराध-अपराधियों पर काबू और शांति-कानून व्यवस्था की दृष्टि से शिवराज सिंह सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं. पिछले दिनों इंदौर और उज्जैन में उपद्रवी तत्वों ने जब धार्मिक जुलूसों पर घरों की छत से पथराव किया तो प्रशासन ने इसमें शामिल उपद्रवियों को जेल भेजकर अगले दिन उनके घर भी ध्वस्त करवा दिए.

किसानों पर मेहरबान शिवराज सरकार
शिवराज चौहान खुद को किसान हितैषी बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. शिवराज सरकार ने इस बार के कार्यकाल में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के खातों में मुआवजा राशि भेजी. किसानों को प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना की ही तरह राज्य के किसानों को अतिरिक्त चार हजार रूपये प्रतिवर्ष सम्मान निधि दी. इस तरह से किसानों को अब 10 हजार रुपये सालाना मिल रहा है. इसके अलावा किसानों को बिना ब्याज दर पर फसल ऋण उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की गई है. राज्य में अधिकतर फसलों का एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य अन्य राज्यों के मुकाबले बेहतर है. यह उन चंद राज्यों में शामिल है जहां सरकार ने किसानों की उपज का एमएसपी सुनिश्चित करने के लिए भावांतर योजना लागू कर रखी है. यानी यदि किसानों को अपनी उपज एमएसपी से कम दर पर बेचनी पड़े तो मूल्य के अंतर की भरपाई सरकार करती है. यह वजह है कि किसान प्रधान प्रदेश होने के बावजूद एमपी में किसानों ने पंजाब और हरियाणा की तरह किसान आंदोलन खड़ा नहीं किया.

युवाओं-अदिवासियों को साधने की कवायद
मध्य प्रदेश में 2018 के चुनाव में बीजेपी की हार के पीछे सबसे अहम वजह युवा मतदाताओं की नाराजगी थी. यही वजह है कि सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं को साधने का दांव चला. उन्होंने प्रदेश की सरकारी नौकरियों को सिर्फ और सिर्फ प्रदेश के युवाओं के लिए 100 फीसदी आरक्षित कर दिया. इतना ही नहीं शिवराज सिंह ने अधिकारियों को सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती का निर्देश दिया था. गृह, राजस्व, जेल, लोक निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों में खाली पड़े पद फौरन भरे जाएं.

वहीं, शिवराज सरकार आदिवासी समुदाय के बीच दोबारा से अपनी जड़ें जमाने के लिए तमाम कवायद करती नजर आई है. सरकार ने प्रदेश में साहूकारों के कर्ज से आदिवासी समुदाय को मुक्ति दिलाने के लिए कानून बनाया है. साथ ही सरकार ने आदिवासियों के 15 अगस्त 2020 से पहले के सभी कर्जे माफ कर दिए हैं. इसके अलावा प्रदेश में बिना लाइसेंस के कोई साहूकार किसी व्यक्ति को कर्ज नहीं दे सकेगा और ना ही उसकी वसूली कर सकेगा. सिर्फ रजिस्टर्ड साहूकार ही कर्ज दे सकेंगे. सरकार ने अनुसूचित जनजाति मुक्ति विधेयक और साहूकारी संशोधन विधेयक 2020 को पारित कराया है. ऐसे में अब कोई साहूकार दबाव डालता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. 

 

 

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