मध्य प्रदेश में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में मतदान के बाद मतगणना हुई. सिहावल विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शिवबहादुर सिंह चंदेल और कांग्रेस के कमलेश्वर इंद्रजीत कुमार के बीच मुकाबला हुआ जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार ने 63, 918 मत लेकर जीत हासिल की. बीजेपी उम्मीदवार को 32412 मत मिले. अभी इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है और कमलेश्वर कुमार यहां से विधायक हैं.
सीधी जिले की सिहावल सीट पर कांग्रेस का कब्जा है और यहां से पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार के बेटे कमलेश्वर कुमार विधायक हैं. पटेल को कांग्रेस नेतृत्व का करीबी माना जाता है और उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया है. करीब 2.13 लाख वोटर वाले इस क्षेत्र में ब्राह्मण, पटेल और साहू आबादी ज्यादा है जो हार-जीत का फैसला करती है. 2013 के चुनाव में बीजेपी बड़े अंतर से यह सीट हारी थी इसलिए इस चुनाव में पार्टी वापसी के लिए कमर कस रही है.
2013 चुनाव के नतीजे
कांग्रेस के कमलेश्वर कुमार- 72928 वोट
बीजेपी के विश्वमित्र पाठक- 40371 वोट
2008 चुनाव के नतीजे
बीजेपी के विश्वमित्र पाठक- 37083 वोट
कांग्रेस के इंद्रजीत कुमार- 34615 वोट
2013 में विधानसभा की क्या थी तस्वीर
मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 35 सीट अनुसूचित जाति जबकि 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 148 गैर-आरक्षित सीटें हैं. 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 165 सीटों पर जीत हासिल कर राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 58 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 4 जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी.
कितने लोगों ने किया मताधिकार का प्रयोग...
निर्वाचन आयोग के मुताबिक 2013 में मध्य प्रदेश में कुल 4,66,36,788 मतदाता थे जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2,20,64,402 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,45,71,298 और अन्य वोटर्स 1088 थे. 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.
वोटिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी....
निर्वाचन आयोग के मुताबिक इस बार मध्य प्रदेश में 75.05 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 4 फीसदी बढ़कर 74.03 प्रतिशत रहा. 2013 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 70.11 प्रतिशत रहा था.
इसके पहले कैसा रहा है वोटिंग का प्रतिशत...
1990 में स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए. तत्कालीन कांग्रेस की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 1993 में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव में उतरी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा और बीजेपी की पटवा सरकार हार गई थी.
वहीं, 1998 में वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था. उस वक्त दिग्विजय सिंह की सरकार बनी. लेकिन 2003 में उमा के नेतृत्व में भाजपा सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई. उस वक्त भी 7.03 प्रतिशत वोट बढ़े थे.
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