हरदा विधानसभा सीट हरदा जिले के अंतर्गत आती है. हरदा जिला 1988 में अस्तित्व में आया. इससे पहले ये होशंगाबाद जिले में आता था. हरदा की कुल जनसंख्या 5,70,465 है. हरदा विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है.
हरदा के मतदाता कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस के उम्मीदवार को जिताते आए हैं. इस सीट पर 7 बार कांग्रेस और 5 बीजेपी ने जीत हासिल की है. 1951 में यहां पर हुए पहले चुनाव में किसान मजदूर प्रजा पार्टी के महेश दत्त ने जीत हासिल की. 1957 में ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. इसके बाद कांग्रेस के गुलाब बाई ने चुनाव जीता.
1962 में यह सीट एक बार फिर सामान्य हो गई. सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहा. 1993 में कमल पटेल पहली बार चुनाव जीते और 20 साल तक इस सीट पर जीतते आए. कमल पटेल शिवराज सरकार में कैबिनट मंत्री भी रह चुके हैं.
मध्य प्रदेश पुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए राम किशोर दोगने ने 2013 के चुनाव में बीजेपी के दिग्गज कमल पटेल को हराया था. दोगने को 74607 वोट मिले थे तो वहीं बीजेपी के कमल पटेल को 69956 वोट मिले थे. इससे पहले 2008 के चुनाव में बीजेपी के कमल पटेल ने जीत हासिल की थी. उन्होंने कांग्रेस के हेमत ताले को 8 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था.
हरदा में आदिवासी वोटर्स चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं. जिले में 60 फीसदी में आदिवासी मतदाता है. वहीं क्षत्रिय ब्राह्मण भी करीब 35 हजार हैं. विकास के मामले में यह क्षेत्र पिछड़ा हुआ है. हरदा में बिजली, पानी, सड़क की समस्या है. यहां के लोग विधायक से नाराज हैं. उनपर वादा नहीं निभाने का आरोप लगा रहे हैं.
2013 के चुनावी नतीजे
मध्य प्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.