सागर की सुरखी विधानसभा सीट अभी बीजेपी के पास है. यहां विधायक है पारूल साहू. पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता गोविंदसिंह राजपूत को हराया था. हालांकि, इस बार कहा जा रहा है कि पारूल साहू चुनाव नहीं लड़ेंगी. उनकी जगह किसी और को टिकट मिल सकता है.
विधायक पारूल के कार्यकाल की बात करें तो उन्होंने इलाके में काफी विकास कार्य करवाए हैं. वो चुनरी यात्रा जैसे सामाजिक सरोकार और मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र में की गई घोषणाओं के आधार पर हुए कामों को लेकर जनता के बीच पहचान बनाए हुए हैं.
इस सीट पर हुए पिछले चुनाव की दिलचस्प बात यह भी है कि वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में दोनों प्रत्याशियों के बीच हार-जीत का अंतर मात्र 141 वोट का था. यही कारण है कि कांग्रेस को इस सीट पर दोबारा जीत का भरोसा है.
वहीं, इस बार कांग्रेस यह जरूर चाहेगी कि बसपा क्षेत्र से दमदार प्रत्याशी मैदान में उतारे क्योंकि इससे उसे फायदा हो सकता है. इस सीट पर कोई ख़ास जातीय समीकरण असरदार नहीं होता है. प्रत्याशी की जीत में यहां के सभी वर्ग के मतदाताओं का योगदान रहता है. यही कारण है कि सुरखी से बाहरी प्रत्याशी चाहे वह कांग्रेस के हों या भाजपा या फिर जनता पार्टी के जीतते आए हैं.